संस्करणों
विविध

जब ऑक्सीजन नहीं मिलता तो सांस लेने के लिए अल्कोहल बनाने लगती है गोल्डफिश

yourstory हिन्दी
24th Aug 2017
Add to
Shares
3
Comments
Share This
Add to
Shares
3
Comments
Share

गोल्ड फिश का ऑक्सीजन की कमी पर अल्कोहल का निर्माण करना इंसानों की आक्सीजन की कमी पर लैक्टिक एसिड के निर्माण करने से बेहतर प्रक्रिया है।

गोल्डफिश  फोटो साभार (youtube)

गोल्डफिश  फोटो साभार (youtube)


 कुछ जानवर धरती पर ऐसे हैं, जो बिना ऑक्सीजन के ढेर सारे पानी में दिन तो क्या महीनों तक जीवित रह सकते हैं। ऐसा ही एक जीव है मछली।

भयंकर ठंड में जमकर बर्फ हो जाते हैं तो उस वक्त गोल्ड फिश का अल्कोहल लेवल तकरीबन 50 मिलीग्राम पर 100 मिलीलीटर हो जाता है। जोकि अधिकतर देशों में ड्रिंक एंड ड्राइव की तय सीमा से कहीं ज्यादा है।

ओस्लो और लिवरपूल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी ही रोचक खोज की है। उन्होंने सर्दियों के मौसम में एक गोल्ड फिश का लम्बे समय तक जीवित रहने से शराब का उत्पादन करने की प्रक्रिया का पता लगाया है। इस पृथ्वी पर मौजूद इंसान और अधिकांश जानवर ऐसे हैं जो ऑक्सीजन के बिना कुछ ही मिनटों में मर जाते हैं। इनके आलावा कुछ जानवर धरती पर ऐसे है जो बिना ऑक्सीजन के ढेर सारे पानी में दिन तो क्या महीनों तक जीवित रह सकते हैं। ऐसा ही एक जीव है मछली

मछली एनारोबिक रूप से बने लैक्टिक एसिड को इथेनॉल में बदल कर पाती है, जो उसके आसपास के गहरे पानी में फैल जाता है और शरीर में लैक्टिक एसिड का खतरनाक निर्माण करती है। इस असामान्य घटना के पीछे आणविक तंत्र का हाथ है, जो कि रीढ़ की हड्डियों में मौजूद अनोखा भाग है। यह प्रक्रिया सामान्यतः शराब बनाने वाले खमीर से जुड़ी है। यह रिसर्च लिवरपूल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ओस्लो और नॉर्वे विश्वविद्यालय के बीच सहयोग के परिणाम है।

बिना ऑक्सीजन के अल्कोहल बनाने की प्रक्रिया

इस अंतरराष्ट्रीय खोज टीम ने दिखाया है कि कैसे एक गोल्डफिश और क्रूसीन कार्प की मांसपेशियों में सिर्फ एक ही पूर्वजों की संरचना है। लगभग 8 मिलियन साल पहले गोल्डफिश और क्रूसीन कार्प के एक सामान्य पूर्वज में पूरे जीनोम दोहराव की घटना से प्रोटीन के दो सेट उभर आए थे। यूनिवर्सिटी ऑफ ओस्लो विश्वविद्यालय के डॉ कैथरीन एलिसाबेथ फेगेरनेस के मुताबिक, यह शोध जैविक नवीनता के विकास में पूरे जीनोम की नकल की भूमिका पर जोर देती है और प्रजातियों के पूर्व अनुकूल वातावरण में अनुकूलन करती है।

कई गुना तेजी से अल्कोहल का निर्माण

इस अध्ययन के शोधकर्ता डॉ. माइकल बेरेनब्रिंक के मुताबिक, मान लीजिए जिन तालाबों में मछलियां पाली जा रही हैं, वो भयंकर ठंड में जमकर बर्फ हो जाते हैं तो उस वक्त गोल्ड फिश का अल्कोहल लेवल तकरीबन 50 मिलीग्राम पर 100 मिलीलीटर हो जाता है। जोकि अधिकतर देशों में ड्रिंक एंड ड्राइव की तय सीमा से कहीं ज्यादा है।

हालांकि गोल्ड फिश का ऑक्सीजन की कमी पर अल्कोहल का निर्माण करना इंसानों की आक्सीजन की कमी पर लैक्टिक एसिड के निर्माण करने से बेहतर प्रक्रिया है। ये अध्ययन हमें मदद करेगा कि कैसे इंसानों के जीनोम को एडिट करने और आक्सीजन की कमी की अवस्था में सरवाइवल के विकल्पों पर काम किया जाए।

गोल्डफिश है एक उपयोगी मछली

ईथेनॉल उत्पादन के लिए क्रूसियन कार्प को कठोर वातावरणों में जीवित और शोषण करने वाली एकमात्र मछली प्रजातियों में से है। जो ऑक्सीजन युक्त गहरे पानी में बेहतर तारतम्य बनाए रखती है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्रूसियन कार्प और सुनहरी मछली मनुष्य की पसंदीदा मछलियों में से हैं। साथ ही पालतू जानवरों में लोग इनको पालना पसंद करते है। इनमें अल्कोहल निर्माण की प्रकिया एक अद्भुत प्रक्रम है, कि कैसे कम ऑक्सीजन में इंसान और अन्य जानवरों को जीवित रखा जा सकता है।

यह भी पढ़ें: तय मात्रा में अल्कोहल लेने से मिलता है सेहत को फायदा: रिसर्च

Add to
Shares
3
Comments
Share This
Add to
Shares
3
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags

Latest Stories

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें