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अपने इस्तीफों से बार-बार राजनीति में सनसनी फैलाने वाले गुरुदास कामत

जय प्रकाश जय
22nd Aug 2018
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कांग्रेस के शीर्ष नेता गुरुदास कामत नहीं रहे। प्रथम पंक्ति की सियासी शख्सियत के रूप में तो उन्हें रेखांकित नहीं किया जा सकता लेकिन मंत्रिमंडल से लेकर तमाम उच्च पदों पर रहते हुए वह जिस तरह बार-बार अपने इस्तीफों से सनसनी फैलाते रहे, उन्हे एक मुखर राजनेता के रूप में हमेशा जरूर याद किया जाता रहेगा।

गुरुदास कामत

गुरुदास कामत


जुलाई 2011 में उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जून 2016 में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देने और राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर सनसनी फैला दी थी, लेकिन सोनिया गांधी के कहने पर उन्होंने अपना निर्णय वापस ले लिया था।

बार-बार पार्टी, केंद्रीय मंत्रिमंडल आदि से इस्तीफे देकर भारतीय राजनीति में सनसनी का सबब रहे महाराष्ट्र के शीर्ष नेता गुरुदास कामत (63) ने बुधवार को दिल्‍ली के चाणक्‍यपुरी स्थित प्राइमस हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। मुंबई कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष रह चुके कामत को मुंबई की राजनीति की गहरी समझ के लिए जाना जाता है। उनके अंतिम दर्शन के लिए यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी अस्पताल पहुंचीं। वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते थे। उन्होंने मंगलवार रात भी ट्विटर पर देशवासियों को बकरीद की बधाई, साथ ही पार्टी के राज्यसभा सांसद अहमद पटेल को ट्विटर पर जन्मदिन की शुभकामना दी थी। वह जिस भी कार्यक्रम का हिस्सा बनते, उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करना नहीं भूलते थे। अब उनकी अनुपस्थिति पार्टी को काफी खलेगी। 

छात्र नेता के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने के बाद कामत भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के अध्यक्ष बने। उसके बाद महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष और कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के उपाध्यक्ष रहे। पेशे से वकील कामत ने मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा क्षेत्र का पांच बार 1984, 1991, 1998, 2004, 2009 में प्रतिनिधित्व किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के साथ संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था। एआईसीसी के महासचिव के अलावा वह काफी समय तक राजस्थान और केंद्र शासित क्षेत्रों दादरा, नगर हवेली और दमन एवं दीव के अलावा गुजरात के मामलों के प्रभारी भी रहे।

कामत को रि-जॉइन पॉलिटिक्स के लिए भी जाना जाता है। जुलाई 2011 में उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जून 2016 में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देने और राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर सनसनी फैला दी थी, लेकिन सोनिया गांधी के कहने पर उन्होंने अपना निर्णय वापस ले लिया था। उस समय उन्होंने कहा था- 'मैंने कुछ व्यक्ति‍गत कारणों से कांग्रेस महासचिव पद, ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया है। इस बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने मुझसे बात की और निर्णय पर फिर से विचार करने को कहा। पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी से मेरी मुलाकत ने मेरा इरादा बदला। अब मैं समाज सेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहता था और मुझे लगता है कि इसके लिए पार्टी सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म है।'

 फिर उन्होंने कहा था कि वह पार्टी में अपने पूर्व के पदों पर वापसी कर रहे हैं। अप्रैल 2017 में एक बार फिर उन्होंने ऐसे मौके पर कांग्रेस में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था, जब बृहन्मुंबई नगर निगम चुनाव के लिए पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा की गई थी। इससे पहले वर्ष 2014 में वह लोकसभा चुनाव हार गए थे। उस साल चुनाव आयोग के लिए प्रस्तुत कामत की निजी सम्पत्ति का ब्योरा भी उनकी राजनीतिक स्थितियों का बदनुमा आईना बना था। उन्होंने लिखित जानकारी दी थी कि वह कुल अड़तालीस करोड़ की सम्पत्ति के मालिक है। यह भी खुलासा हुआ था कि उनकी पत्नी के पास 48 करोड़ 88 लाख 71 हजार चार सौ तिरपन रुपए की निजी सम्पत्ति है। कहते हैं कि जब तक महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार रही, उन दस वर्षों में ही उनकी सम्पत्ति बढ़कर दसगुना से ज्यादा हो गई थी।

मुंबई के आर.ए. पोद्दार कॉलेज से ग्रेजुएट गुरुदास कामत ने नवम्बर 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे समाजसेवी अन्ना हजारे के जनलोकपाल बिल आंदोलन को ‘ड्रामा’ करार देते हुए कहा था कि 'अन्ना ने क्रेडिट लेने के लिए ये आंदोलन किया है क्योंकी केंद्र सरकार तो पहले ही जनलोकपाल बिल ला रही थी। अन्ना के तमाम साथी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। अन्ना एक बार अरविंद केजरीवाल, किरण वेदी और प्रशांत भूषण से भी सवाल पूछें। अन्ना लगातार कांग्रेस पर अंगुली उठा रहे हैं लेकिन यदि कांग्रेस ने अन्ना और उनकी टीम के खिलाफ बोलना शुरू किया तो फिर टीम अन्ना नहीं बचेगी।' जनवरी, 2017 की बात है, जब संजय निरुपम मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष बने, उनसे कामत का हमेशा छत्तीस का आकड़ा रहने लगा था। 

दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच उन दिनो घमासान छिड़ गया था। जब कामत ने खुलकर संजय निरुपम पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें नकारात्मकता से भरा नेता बताया, साथ ही अपने समर्थकों को भेजे एसएमएस में बीएमसी चुनाव में उम्मीदवारी के लिए भी संजय से संपर्क तक करने से मना कर दिया था तो उनके इस एसएमएस बम पर पार्टी हाईकमान ने निरुपम को तलब कर लिया था। इसके बाद गुजरात और राजस्थान में पार्टी का प्रभारी पद भी उन्होंने आननफानन में त्याग कर राजनीतिक संन्यास का ऐलान किया था। बाद में उन्हें शीर्ष नेतृत्व ने मना लिया था, इसके बावजूद मुंबई कांग्रेस के अंदर का घमासान चलता रहा।

यह भी पढ़ें: धरती को बचाने वाली शख्सियत हैं जल-पुरुष राजेंद्र सिंह

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