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भारत में ड्रोन के इस्तेमाल के लिए लेना होगा लाइसेंस, जल्द बनेंगे नियम

नए ड्राफ्ट के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों के मानक का ख्याल रखना होगा ड्रोन के रजिस्ट्रेशन के लिए।

2nd Nov 2017
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ड्रोन के इस्तेमाल में कई तरह की सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। इसके गैरकानूनी और अवैध प्रयोग के भी खतरे होते हैं। इसलिए सरकार ने नियम बनाकर लाइसेंस लेने की योजना पर काम करना शुरू किया था।

ड्रोन (सांकेतिक तस्वीर)

ड्रोन (सांकेतिक तस्वीर)


ड्रोन के लिए नियम बनाने को लेकर पहले कई बार चर्चाएं होती थीं, लेकिन ये सिर्फ चर्चा तक ही सिमट कर रह जाती थी। इस नए ड्राफ्ट के मुताबिक ड्रोन के रजिस्ट्रेशन के लिए सुरक्षा एजेंसियों के मानक का ख्याल रखना होगा। 

ड्राफ्ट के मुताबिक दिल्ली के हाई सिक्यॉरिटी वाले विजय चौक व संसद भवन के आसपास के इलाके, सैन्य प्रतिष्ठानों के ऊपर और उसके पांच किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाने पर पर पाबंदी होगी।

आने वाले समय में भारत में भी ड्रोन के जरिए सामानों की डिलिवरी संभव हो सकेगी। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी दिशानिर्देशों का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस ड्राफ्ट के मुताबिक ही ड्रोन के इस्तेमाल के लिये कानून बनाए जाएंगे। ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पहले कमेटी से सुझाव मांगे गए हैं। इस प्रक्रिया में अभी दो महीने लग सकते हैं। इसके बाद माना जा रहा है कि अगले साल से ड्रोन को उड़ाने का नियम लागू हो जाएगा। इससे ई-कॉमर्स कंपनियां और स्टार्ट अप कंपनियों को काफी फायदा नजर आ रहा है।

ड्रोन के इस्तेमाल में कई तरह की सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। इसके गैरकानूनी और अवैध प्रयोग के भी खतरे होते हैं। इसले सरकार ने नियम बनाकर लाइसेंस लेने की योजना पर काम करना शुरू किया था। इसके पहले भी ड्रोन के इस्तेमाल संबंधी एक ड्राफ्ट पेश किया गया था, लेकिन जानकारों का कहना है कि वो ज्यादा कारगर और व्यावहारिक नहीं था। पहले ड्रोन के इस्तेमाल के लिए अनुमति लेने में 90 दिन लगने की बात कही गई थी, वहीं अब इसे 7 दिन कर दिया गया है। इस लिहाज से देखें तो पहले ड्राफ्ट से दूसरा ड्राफ्ट बेहतर है।

केंद्रीय मंत्री अशोक गजपति राजू ने डीजीसीए की ओर तैयार ड्राफ्ट को पेश किया। ड्रोन के लिए नियम बनाने को लेकर पहले कई बार चर्चाएं होती थीं, लेकिन ये सिर्फ चर्चा तक ही सिमट कर रह जाती थी। इस नए ड्राफ्ट के मुताबिक ड्रोन के रजिस्ट्रेशन के लिए सुरक्षा एजेंसियों के मानक का ख्याल रखना होगा। ड्रोनों को कई श्रेणी में बांटा गया है। नैनो ड्रोन की उड़ान 250 ग्राम वजन की होगी. माइक्रो उड़ान 250 ग्राम से अधिक और दो किलोग्राम से कम होगी। मिनी उड़ान 2-25 किलोग्राम तक होगी. स्माल उड़ान 25 से 150 किलोग्राम के बीच जबकि लार्ज 150 किलोग्राम से अधिक होगी। ये सभी ड्रोन वजन की क्षमता के अनुसार उड़ान भर सकेंगे।

साथ ही डीजीसीए की प्रस्तावित नीति को मानना होगा और ऐसे आपरेटरों को यूनीक आईडेंटीफाई नंबर (यूआईएन) मिलेगा। ऑपरेटर को कैटिगरी के अनुसार परमिट लेना होगा। ड्रोन दो किलोग्राम वजन के साथ दो सौ फीट तक उड़ान भरेगा। नैनो और माइक्रो कैटगरी में रिमोट पाइलट को प्रशिक्षण लेना होगा। इसके अलावा एयरपोर्ट, दिल्ली के हाई सिक्यॉरिटी वाले विजय चौक व संसद भवन के आसपास के इलाके, सैन्य प्रतिष्ठानों के ऊपर और उसके पांच किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाने पर पर पाबंदी होगी।

हालांकि 250 ग्राम तक के नैनो ड्रोन के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इससे ऊपर की क्षमता वाले ड्रोनों पर उसके आने और पहुंचने वाले स्थान पर सारी जानकारी लिखी होनी जरूरी होगी। बड़े ड्रोन पर यूआइडी प्लेट के अलावा आरएफआइडी/सिम, जीपीएस, आरटीएच (रिटर्न टू होम) और एंटी कोलीजन लाइट लगाना आवश्यक होगा। अभी कई देशों में ई-कॉमर्स और फूड डिलिवरी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी ड्रोन नहीं उड़ाए जा सकेंगे। वहीं समुद्र से सिर्फ 500 मीटर की दूरी तक ही इनके उड़ाने की अनुमति मिलेगी।

यह भी पढ़ें: IIT कानपुर ने डेवलप की कंडक्टिव इंक, तकनीक को मिलेगा बढ़ावा

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