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मनचलों को सबक सिखाने के लिए लड़कियों की सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग का नाम है‘मुक्का मार’ मुहिम

Geeta Bisht
11th Apr 2016
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‘मुक्का मार’ लड़ाई-झगड़े के लिए किसी को उकसाने के लिए नहीं, बल्कि एक ऐसी मुहिम है, जो लड़कियों को उन मनचलों से बचने के लिए प्रशिक्षण देती है, जो सरे राह लड़कियों के साथ छेड़खानी करने से बाज नहीं आते। इसलिए कभी आप मुंबई के वर्सोवा बीच में घूम रहे हों और सफेद रेत में आपको कुछ लड़कियां कुंग फू की ट्रेनिंग लेती मिल जाए तो अचरज मत कीजिएगा। स्लम में रहने वाली ये लड़कियां ‘मुक्का मार’ मुहिम के तहत मुफ्त में कुंग फू की ट्रेनिंग लेती हैं। खास बात ये है कि इस मुहिम को विज्ञापन फिल्मों से अपना करियर शुरू करने वाली इशिता शर्मा चला रही हैं और कुंग फू ट्रेनर अलेक्जेंडर फर्नांडीस हैं।

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‘मुक्का मार’ मुहिम शुरू करने से पहले ‘दिल दोस्ती एक्स्ट्रा’ जैसी फिल्मों और ‘डांस इंडिया डांस’ टीवी शो को होस्ट कर चुकी इशिता शर्मा ने परफॉर्मिंग आर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए ‘आमद’ नाम से एक इस्टिट्यूट खोला। जहाँ पर डांस, मार्शल आर्ट और योग की ट्रेनिंग दी जाती है। इशिता ने योर स्टोरी को बताया, 

“कुछ महीने पहले मैंने निर्भया पर एक डॉक्यूमेंट्री देखी। इसे देखकर मैं अंदर तक हिल गई और ये सोचने को मजबूर हो गई कि मैं ऐसा क्या करूं कि जो निर्भया के साथ हुआ वो दूसरी लड़कियों के साथ न हो।” 

उसी दौरान उनको अपने साथ हुई एक घटना अचानक याद आई। इशिता का कहना है, 

“एक बार मैं अपनी कार से कहीं जा रहीं थी तभी 6 लड़के 3 बाइकों में सवार होकर फब्तियां कस रहे थे। इससे परेशान होकर मैंने उनको जोर से डांट दिया था जिसके बाद वो लड़के भाग खड़े हुए।”
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हालांकि इस घटना को काफी वक्त बीत चुका था, इसलिए उनको याद नहीं था कि उन्होंने उन लड़कों को कैसे डांटा था। तभी उनको याद आया कि शायद वो मार्शल आर्ट की छात्रा थीं और उनको हर पंच के साथ एक आवाज निकालनी होती थी। वो करीब 8 महीने से इसकी ट्रेनिंग ले रहीं थी। इसके बाद इशिता ने फैसला लिया कि वो लड़कियों को मार्शल आर्ट सिखाएंगीं। इशिता का मानना है कि रेप और छेड़खानी के पीछे एक बहुत बड़ा कारण समाज में अशिक्षा और लड़कियों के साथ उनके अभिभावकों का जागरूक ना होना है। तब उन्होने मुंबई में ‘लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ ताईचे, मार्शल आर्ट एंड हिलिंग रिसर्च सेंटर’ चलाने वाले अलेक्जेंडर फर्नांडीस के सामने अपना आइडिया रखा, जिसे उन्होंने काफी पसंद किया और वो इशिता की इस मुहिम का साथ देने को तैयार हो गये। अलेक्जेंडर फर्नांडीस की सिर्फ यही एक पहचान नहीं है बल्कि वो अनेक प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।

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‘मुक्का मार’ मुहिम शुरू करने वाली इशिता के लिये ये इतना आसान भी नहीं था। इसलिए उन्होंने सबसे पहले अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट डाला। इसे काफी लोगों ने पसंद तो किया, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। बावजूद इसके इशिता ठान चुकी थी कि उनको इस मुहिम को फेसबुक से बाहर लाकर हकीकत में बदलना है। इसलिए उन्होंने वर्सोवा के स्लम इलाके में जाकर लोगों से मुलाकात की और उनको समझाया कि लड़कियों को अपनी सुरक्षा के लिए मार्शल आर्ट सीखना कितना जरूरी है। इशिता की ये बात स्लम में रहने वाले ज्यादातर लोगों को पसंद नहीं आई। क्योंकि उनका कहना था कि वो अपनी लड़कियों को घर से बाहर नहीं भेजना चाहते, क्योंकि स्लम का माहौल बहुत ही खराब है।

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इशिता कहती हैं कि स्लम में रहने वाले लोग एक अच्छा काम कर रहे थे कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेज रहे थे। तब इशिता उन स्कूलों में गई जहां पर स्लम में रहने वाली ये लड़कियां पढ़ती थीं। इशिता ने वहां पर टीचरों से बात कर उनको भरोसे में लिया और उनसे कहा कि वे लड़कियों के माता-पिता से इस बारे में बात करें। इशिता की ये तरकीब काम कर गई और कुछ लड़कियों के माता-पिता अपनी लड़कियों को ट्रेनिंग में भेजने के लिए तैयार हो गये।

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इस तरह इशिता ने अलेक्जेंडर फर्नांडीस के साथ मिलकर फरवरी से “मुक्का मार” मुहिम की शुरूआत की। इसके लिए उन्होंने वर्सोवा बीच में नाना नानी चौक के पास स्थित स्लम एरिया को चुना। यहां पर लड़कियों को मार्शल आर्ट कूंग-फू की मुफ्त में ट्रेनिंग दी जाती है। इशिता इस मुहिम को अपनी संस्था ‘आमद’ के जरिये चलाती हैं। इसके लिए उन्होने अलेक्जेंडर फर्नांडीस अपने साथ 4 इंस्ट्रक्टर को रखा हुआ है। ‘मुक्का मार’ की ये क्लास हर शनिवार और रविवार शाम 5:30 बजे से 7 बजे तक चलती हैं। इशिता ने 10-15 लड़कियों के साथ इस मुहिम की शुरूआत की और कुछ वक्त बाद ही ये संख्या बढ़कर 50-60 हो गई। इस समय इनसे करीब 75 लड़कियां कुंग-फू की ट्रेनिंग ले रहीं हैं। ट्रेनिंग ले रही इन लड़कियों की उम्र 5 से 15 साल के बीच है। इन लड़कियों को 2 ग्रुप में कुंग-फू की ट्रेनिंग दी जाती है।

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इशिता बताती हैं कि उन्होने इस काम के लिए वर्सोवा को इसलिए चुना, क्योंकि ये जगह स्लम के एकदम करीब है। वो चाहती थीं कि यहां तक पहुंचने में किसी भी लड़की को कोई पैसा खर्च ना करना पड़े और जब भी कुंग फू की क्लास शुरू हो तो वो तुरंत मौके पर आ जाये। इशिता का कहना है कि शुरूआत में इन लड़कियों को सीखाने में उनको काफी मुश्किलें आई क्योंकि ये लड़कियां ठीक से पंच भी नहीं मार पा रहीं थी और काफी कोशिशों के बाद उनकी मेहनत रंग लाने लगी।

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अपनी परेशानियों के बारे में इशिता का कहना है कि वो स्लम के जिन लड़कियों को कुंग फू सिखाने का काम करती हैं उनके माता-पिता को ये समझाना काफी मुश्किल होता है कि सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग लड़कियों के लिए क्यों बहुत जरूरी है। ये एक ऐसा इलाका है जहां छोटी लड़कियां भी खेलने के लिए बाहर नहीं आती हैं, क्योंकि इनके साथ छेड़ाखानी आम बात है। बावजूद लड़कियों के अभिभावकों का कहना होता है कि कुंग फू की जगह वो उनको डांस या गाना जैसी चीजें सिखायें। यही वजह है कि कई लड़कियां 3-4 क्लास के बाद ही कुंग फू की ट्रेनिंग लेना बंद कर देती हैं।

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अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में इशिता का कहना है कि अगर कहीं से उनको आर्थिक मदद मिलती है तो वो मुंबई के दूसरे हिस्सों में भी मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने के लिए तैयार हैं। वर्सोवा के सेंटर को चलाने का खर्च इशिता अपनी संस्था ‘आमद’ के जरिये करतीं हैं। अब वो चाहती हैं कि वर्सोवा में जिन लड़िकयों को वो कुंग फू की ट्रेनिंग दे रही हैं, वो दूसरी जगहों में जाकर और लड़कियों को ट्रेनिंग देने का काम करें। 

वेबसाइट : www.aamad.co

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