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रेलवे स्टेशनों पर लगेंगे बड़े स्क्रीन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी और गोरखपुर के रेलवे स्टेशन समेत छह रेलवे स्टेशन उन 2175 स्टेशनों का हिस्सा है जिनका चयन दो लाख स्क्रीन को लगाने के लिए किया गया है।

18th Oct 2016
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सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान के तहत इस महीने के अंत तक पुरानी दिल्ली, ग्वालियर, जयपुर और उत्तर प्रदेश के दो रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों से संबंधित जानकारी बड़े स्क्रीन पर दी जाएगी।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी और गोरखपुर के रेलवे स्टेशन समेत छह रेलवे स्टेशन उन 2175 स्टेशनों का हिस्सा है जिनका चयन दो लाख स्क्रीन को लगाने के लिए किया गया है। इन स्क्रीन के जरिये यात्रियों को आगमन, प्रस्थान, सीट की उपलब्धता और अन्य संबंधित जानकारी प्रदान की जाएगी।

इन सूचनाओं को प्रदान करने के अलावा, रेल डिस्प्ले नेटवर्क (आरडीएन) राजस्व को बढ़ाने के लिए भी विज्ञापन प्रदर्शित करेगी।

परियोजना में शामिल रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 'हमें इन दो लाख आरडीएन स्क्रीन से करीब 1000 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है।'

उधर दूसरी तरफ आतंकवादियों के सफाये के लिए सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में लक्षित हमले के बाद सीमा पर उत्पन्न स्थिति तथा त्यौहार के मौसम के मद्देनजर रेलवे की सुरक्षा के लिहाज से राजकीय रेल पुलिस जालंधर सहित पंजाब के चार बडे स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगवा रही है । हालांकि, जीआरपी का आरोप है कि डीआरएम से हरी झंडी मिलने के बावजूद रेलवे स्टेशन के अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं । राजकीय रेल पुलिस अधीक्षक लखविंदरपाल सिंह खरा ने कहा, 'जीआरपी अपनी ओर से रेलवे और यात्रियों की सुरक्षा के लिए जालंधर शहर, लुधियाना, अमृतसर तथा पठानकोट स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगवा रही है हालांकि, मंडल रेल प्रबंधक के निर्देशों के बावजूद संबंधित स्टेशनों के अधिकारी इस काम में सहयोग नहीं कर रहे हैं ।’ 

खरा के अनुसार 'चारों स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने का काम एक हफ्ते में पूरा हो जाएगा लेकिन हमारे पास नियंत्रण कक्ष बनाने के लिए जगह नहीं है । मंडल रेल प्रबंधक अनुज प्रकाश हालांकि, इन स्टेशनों के अधिकारियों से तत्काल जगह मुहैया कराने के लिए कह चुके हैं लेकिन हमें अभी तक जगह नहीं दी गयी है ।’ 

मंडल रेल प्रबंधक अनुज प्रकाश ने कहा, ‘मैने संबंधित स्टेशनों के अधिकारियों से कहा है कि नियंत्रण कक्ष बनाने के लिए शीघ्र ही जीआरपी को स्टेशन पर कोई कमरा उपलब्ध करवायें ताकि सुरक्षा उपायों का प्रबंध किया जा सके । रेलवे का भी अपना काम है और हम स्टेशनों पर जगह खाली करा रहे हैं और उनका काम समाप्त होने तक अथवा जितना जल्दी संभव हो सकेगा हम उन्हें नियंत्रण कक्ष के लिए स्थान मुहैया करवा देंगे ।’ 

यह पूछने पर कि इस परियोजना में क्या मंडल की ओर से कोई आर्थिक सहयोग किया जा रहा है, प्रकाश ने कहा, ‘‘नहीं । यह परियोजना जीआरपी की है । हमारा सहयोग केवल स्थान उपलब्ध कराने का ही है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए रेलवे और जीआरपी, दोनो की ओर से भी कैमरे लगवाये जाते हैं । हालांकि, इन सबका एकमात्र मकसद रेलवे और यात्रियों की सुरक्षा होता है ।’’ प्रकाश ने कहा कि रेल और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए जीआरपी को जहां कहीं भी सहयोग और जगह की आवश्यकता होगी रलवे की ओर से तत्काल उन्हें यह मुहैया करवाया जाएगा । इससे पहले खरा ने बताया, ‘‘पहले चरण में हमने इन चार स्टेशनों को चुना है । यहां कैमरे लग जाने के बाद दूसरे चरण में जालंधर छावनी और बठिंडा जैसे दूसरे बडे स्टेशनों पर कैमरे लगाने का काम शुरू किया जाएगा ।’’ दूसरी ओर रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया, ‘‘रेलवे अपनी कमाई में से राज्य सरकार को भी हिस्सा देती है और जीआरपी राज्य सरकार की पुलिस होती है । रेलवे, प्लेटफॉर्म और यात्रियों सहित अन्य की सुरक्षा का काम जीआरपी का होता है । इसलिए रेल पुलिस ये कैमरे लगवा रही है और मंडल का इस परियोजना में कोई दखल नहीं है ।’’

अधिकारी ने बताया, ‘ऐसे भी सुरक्षा के लिहाज से रेलवे की योजना मंडल के चार एवन कैटेगरी के स्टेशनों पर कैमरा लगवाने की है इनमें जालंधर शहर, अमृतसर, लुधियाना और जम्मूतवी शामिल है। इस परियोजना के लिए ढाई करोड रुपये भी जारी हो चुके हैं ।’ यह पूछने पर कि पंजाब में जिन स्टेशनों पर जीआरपी कैमरे लगवा रही है क्या रेलवे की ओर से वहां भी कैमरे लगाये जायेंगे, इस पर उन्होंने कहा, ‘अभी इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है क्योंकि रेलवे की योजना संवेदनशील स्थानो पर कैमरा लगाने की है जिनमें रेलवे लाइन भी शामिल है । अब उपर से निर्देशों के बाद ही इस बारे में कोई निर्णय किया जा सकता है ।’ इससे पहले खरा ने कहा, ‘जालंधर, पठानकोट और अमृतसर में स्टेशन अधिकारियों की उदासीनता से ही काम में देरी हो रही है । लुधियाना स्टेशन पर जीआरपी के बैठने की जगह पर ही हमने एक छोटे से हिस्से में नियंत्रण कक्ष बना लिया है ।’ उन्होंने कहा, ‘जालंधर में कैमरे और तार का काम पूरा हो गया है और हमें नियंत्रण कक्ष का इंतजार है ताकि काम जल्दी से पूरा हो सके ।’ 

पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि उनकी योजना सभी स्टाफ के अलावा लोडिंग और अनलोडिंग करने वाले तथा हेल्पर को परिचय पत्र जारी करने की है । 

इस पर बैठकें चल रही है और इस बारे में भी जल्दी ही निर्णय कर लिया जाएगा ।

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