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विधवा विनीता के जीवन में इस दिवाली बिखरेगी रोशनी, वृंदावन में हुई शादी

19th Oct 2017
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 खास बात यह थी कि विवाह में सारी रस्में विधवा महिलांओं ने ही संपन्न कराई। इस आयोजन में मेहंदी, हल्दी तेल की रस्म के साथ गीतों का आयोजन भी विधवाओं द्वारा हुआ।

विनीता और राकेश, साथ में बिंदेश्वरी पाठक

विनीता और राकेश, साथ में बिंदेश्वरी पाठक


 यह देशव्यापी अभियान है और इसे पूरे देश में जारी रखा जाएगा। कार्यक्रम में सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक भी मौजूद रहे। 

विधवाओं ने मंदिर में रंगों से रंगोली सजाई, साथ ही दीये भी जलाए। उत्सव में शामिल हुईं सभी वृद्ध विधवाओं के चेहरे से खुशी झलक रही थी। 

हमारे समाज में विधवाओं को एक तरह से अलग-थलग कर दिया जाता है। यहां तक कि उन्हें किसी शुभ समारोह में भी शामिल नहीं किया जाता। लेकिन वृंदावन में इस बार एक विधवा की न केवल धूम-धाम से शादी कराई गई बल्कि उसमें 500 से भी अधिक विधवाओं ने भाग लिया और दांपत्य जीवन की सफलता के लिए दंपती को आशीर्वाद भी दिया। वृंदावन के सप्तदेवालयों में से एक राधा गोपीनाथ मंदिर में विधवा महिला का विवाह 16 अक्तूबर को संपन्न हुआ। विनीता ने वर्ष 2013 में केदारनाथ में आई बाढ़ में अपने पति को खो दिया था। विनीता इस शुभअवसर पर राकेश के साथ परिणय सूत्र में बंध गईं।

साल 2013 में केदारनाथ में आई भीषण त्रासदी में में पति को खो चुकी उत्तराखंड की रहने वाली विधवा विनीता का गोपीनाथ मंदिर में विवाह समारोह पारंपरिक तौर पर संपन्न कराया गया। खास बात यह थी कि विवाह में सारी रस्में विधवा महिलांओं ने ही संपन्न कराई। इस आयोजन में मेहंदी, हल्दी तेल की रस्म के साथ गीतों का आयोजन भी विधवाओं द्वारा हुआ। मंदिर प्रांगण में सजे मंडप में विनीता ने अपने जीवन साथी के साथ सात फेरे लेकर अपना नए वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। इस सार्थक पहल को गैर सरकारी संगठन सुलभ इंटरनेशनल ने आयोजित कराया। विनीता और राकेश दोनों के परिवार के लोगों ने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया।

संगठन की जनसंपर्क अधिकारी मदन झा के मुताबिक यह देशव्यापी अभियान है और इसे पूरे देश में जारी रखा जाएगा। कार्यक्रम में सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक भी मौजूद रहे। इसके साथ ही इस दिवाली पर राधा गोपीनाथ मंदिर प्रांगण में दिवाली पर्व का आयोजन होगा। वृंदावन की विधवा और निराश्रित महिलाएं यहां दिवाली मनाएंगी। इस मौके पर पहुंचे सुलभ के संस्थापक बिंदेश्वरी पाठक ने कहा कि वीरान जिंदगी गुजार रही ये विधवाएं परंपराओं की जंजीरों से जकड़ी हुई थीं। उन्होंने इन विधवाओं के साथ होली, दीवाली और रक्षाबंधन जैसे पर्व साथ मनाकर इनके जीवन में रंग भरने की कोशिश की है।

सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के दिशा में अपनी तरह से सुलभ ऐसे सकारात्मक कदम उठा रहा है। सदियों से अंधेरी जिंदगी गुजार रहीं विधवाओं की जिंदगी रोशन करने की कोशिश संस्था पिछले तीन साल से लगातार कर रही है। इस मौके पर सुलभ संस्था द्वारा विधवाओं को दीपावली गिफ्ट के तौर पर साड़ियां भी दी गईं। विधवाओं ने मंदिर में रंगों से रंगोली सजाई, साथ ही दीये भी जलाए। उत्सव में शामिल हुईं सभी वृद्ध विधवाओं के चेहरे से खुशी झलक रही थी। 

यह भी पढ़ें: लैंगिक भेदभाव समाप्त करने के लिए सरकार ने की 'आई एम दैट वुमन' अभियान की शुरूआत

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