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भाईचारे का अद्भुत मिसाल पेश करती एक संस्था, मुस्लिम समाज में पिछड़ेपन को दूर करने में भी जुटी

23rd Apr 2016
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राजस्थान के जोधपुर में मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी की स्थापना 1929 में इस उद्देश्य के साथ हुई कि मुसलमानों और दीगर कमजोर तबके से ताल्लुक रखने वालों को तालीम दी जा सके. इस संस्था का एक संकल्प शिक्षा के जरिए सद्भाव बनाना भी है.

मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी

मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी


यह संस्था आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के साथ काम करते हुए लड़कियों को भी शिक्षा मुहैया कराती आ रही है. उच्च शिक्षा से वंचित बच्चों को कॉलेज तक लाने का बीड़ा यह संस्था उठाती है. किसी भी समाज में विकास के लिए उच्च शिक्षा ही अहम भूमिका निभाती है और इसी को ध्यान में रखते हुए मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी ने मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी की स्थापना की. सोसायटी प्राइमरी, अपर प्राइमरी और सीनियर सेकंडरी स्कूल (लड़के और लड़कियों) के लिए तो चला रही है. इसके साथ ही मौलाना आजाद मुस्लिम टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज (बी.एड), मौलाना आजाद मुस्लिम महिला टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज (बी.एड), माई खदिजा इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग साइन्सेज, मौलना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, मौलाना अबुल कलाम आजाद आईटीआई और मौलाना आजाद मुस्लिम डी.एड कॉलेज (बी.एस.टी.सी) की स्थापना की है.



मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी की मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी कैंपस<br>

मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी की मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी कैंपस


साथ ही कल्याणकारी कार्यो में माई खदिजा अस्पताल, जहां लागत शुल्क पर डिलीवरी और सभी चिकित्सा सम्बन्धी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है. मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के पब्ल्कि हेल्थ डिपार्टमेन्ट में सर रतन टाटा ट्रस्ट द्वारा फंडिं ‘एम. हेल्थ प्रोजेक्ट‘ संचालित किया जा रहा है जिसमें अफगास्तिान, नाइजीरिया, केन्या, अमेरिका और देश-विदेश के पब्ल्कि हेल्थ से जुड़े लोग शिक्षा ले रहे हैं.

राजस्थान व अन्य प्रदेशों के पिछडे इलाकों के मदरसा टीचर को अंग्रेजी भाषा सिखाना और मदरसों के मॉडर्नाइजेशन के लिए अमेरिकन एंबेसी के सहयोग से 'रेलो' प्रोग्राम चलाया जा रहा है. साथ ही सोसायटी के परिसर में ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल से घर बैठे हजारों लोगों को डिस्टेंस एजुकेशन से दसवीं और बारहवीं कराई जा रही है. मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, कौमी कौन्सिल बराए फरोग उर्दू भाषा (एनसीयूपीएल) और इन्दिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी का स्टडी सेन्टर भी संचालित किया जा रहा है।



गायों के लिए गोशाला भी चलाची है सोसायटी<br>

गायों के लिए गोशाला भी चलाची है सोसायटी


मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद अतीक के मुताबिक,

‘हमारी सोसायटी 32 शिक्षण संस्थान व सामाजिक प्रोग्राम चलाती है जहां सभी धर्मों के 8000 से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और 500 से अधिक शिक्षाविद्, डॉक्टर व अन्य कर्मचारी कार्यरत हैं. ये संस्थान समाज में सभी पिछड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रयासरत हैं. हमारा मकसद है अपने बच्चों को अच्छी तालीम दिलाना. जो लोग हालात के कारण पढ़ न सकें. उन्हें भी शिक्षा से जोड़ना. विशेषकर लड़कियों को शिक्षा के साथ कुछ हुनरमंद कोर्स करवाना. सब मिलकर इस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र को मज़बूती देने के लिए सभी धर्मो के लोगों में आपसी मोहब्ब्त व भाईचारा फैलाना और एक-दूसरे को समझना, पूरे सम्मान के साथ उनके मुश्किल दिनों में मदद करना.’

गाय की सेवा से अनोखा संदेश

देश और समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए संस्था द्वारा संचालित संस्थानों में हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई धर्मों के छात्रों को भी तव्वजो दी जाती है. यहीं नहीं सोसायटी समाज में सकारात्मक संदेश देने के लिए निस्वार्थ भाव से दूध न देने वाली बूढ़ी और बीमार गायों की ‘मारवाड़ मुस्लिम आदर्श गौशाला‘ सेवा भी करती है। बूढ़ी और बीमार गायों के लिए चिकित्सा सेवा का इन्तज़ाम है तथा उनके रहने और खाने-पीने का इंतजाम किया जाता है। सोसायटी के इस कदम से सभी धर्मो के बीच सौहार्द बढ़ा है और सोसायटी के प्रति लोगों का जुड़ाव भी, और सांप्रदायिक सौहार्द भी बनाए रखने में कामयाबी हासिल हुई है।


मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक <br>

मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक


मोहम्मद अतीक इस गौशाला के बारे में बताते हैं,

‘गौशाला को लेकर, हिन्दू भाईयों का सकारात्मक दृष्टिकोण दिखा. लोग मुस्लिम समाज के इस सराहनीय प्रयास को सलामी देते हैं और समय-समय पर इन बीमार व असहाय गायों के लिए चारे की व्यवस्था के लिए आर्थिक सहायता भी करते रहते हैं. हमें गायों की सेवा कर बहुत खुशी और संतुष्टि हासिल होती है. ’

इस संस्था से हर साल करीब 1300 लड़के, लड़कियां बीएड, बीएसटीसी, नर्सिंग, फार्मेसी व वोकेशनल हुनरमन्द कोर्सेस से तालीम हासिल कर समाज में एक बेहतर मुकाम हासिल करने के लिए निकलते हैं.


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