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इस शख़्स की वजह से बिहार के गाँवों के 300 घर हुए मुफ्त शिक्षा की रोशनी से जगमग

मुंबई छोड़ समस्तीपुर के ग्रामीण युवाओं को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं राजेश कुमार सुमन, 300 छात्र ले रहे हें विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए कोचिंग...

10th Apr 2018
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शिक्षा उस खुशबू की तरह होती है जो सदा फैलती है और समाज में सकारात्मक बदलाव का कारण बनती है। इन्हीं बातों को समझते हुए छात्रों को शिक्षा प्रदान करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाने के मिशन में लगे हैं समस्तीपुर जिले के राजेश कुमार सुमन।

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राजेश कुमार सुमन ने समस्तीपुर महाविद्यालय समस्तीपुर से इतिहास से स्नातकोत्तर किया। सुमन शुरू से ही गरीब बच्चों को पढ़ाने में रूचि रखते थे। कुछ समय बाद सुमन को विदेश मंत्रालय में नौकरी मिल गई। वो अपनी नौकरी से खुश तो थे लेकिन उनके मन में गरीब छात्रों के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की इच्छा थी।

कहते हैं कि किसी गरीब को पैसे दे दो तो आप कुछ हद तक ही उसकी गरीबी मिटा सकते हैं, लेकिन अगर आप किसी की ज़िंदगी में शिक्षा का उजियारा भर पायें, तो उसकी आने वाली पीढ़ियों का भी भविष्य संवार सकते हैं। शिक्षा उस खुशबू की तरह होती है जो सदा फैलती है और समाज में सकारात्मक बदलाव का कारण बनती है और इन्हीं बातों को समझते हुए छात्रों को शिक्षा प्रदान करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाने के मिशन में लगे है समस्तीपुर जिले के रोसड़ा स्थित 'बीएसएस क्लब: नि:शुल्क शैक्षणिक संस्थान' के संस्थापक राजेश कुमार सुमन

कैसे आया विचार

राजेश कुमार सुमन ने समस्तीपुर महाविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर किया है। सुमन शुरू से ही गरीब बच्चों को पढ़ाने में रूचि रखते थे। कुछ समय बाद सुमन को विदेश मंत्रालय में नौकरी मिल गई। वो अपनी नौकरी से खुश तो थे लेकिन उनके मन में गरीब छात्रों के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की इच्छा अब भी बाकी थी। वे चाहते थे कि अपने गृह रोसड़ा के लिए कुछ करें। समस्तीपुर बिहार का एक पिछड़ा हुआ इलाका है। जहां छात्रों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल रहा था और यहां के होनहार छात्र भी छोटा-मोटा काम करके अपनी जिंदगी गुजारने पर मजबूर थे। सुमन ने सोचा कि क्यों न वे समस्तीपुर में एक ऐसा इंस्टीट्यूट खोलें जहां वे छात्रों को विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करें और उनका भविष्य संवारें। यही सोचकर सुमन ने अपनी नौकरी छोड़ दी और सन् 2008 में बीएसएस क्लब: नि:शुल्क शैक्षणिक संस्थान की स्थापना की। अपने इस सपने को पूरा करने में उन्हें अपने परिवार विशेषकर अपने पिताजी का पूरा सहयोग मिला जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें प्रोत्साहित करते रहे।

सुमन बताते हैं कि समस्तीपुर में उच्च शिक्षा कम ही लोगों के पास है और जिनके पास है वो शहरों में रहकर ही अपना कैरियर बनाना पसंद करते हैं इससे इस इलाके की स्थिति जस-की-तस बनी हुई है। लेकिन सुमन ने ठान लिया था कि वे यहां के युवाओं के लिए कुछ करेंगे और उन्होंने अपना मिशन आरंभ किया। शुरूआत में सुमन के पास केवल 4 छात्र थे जिन्हें सुमन ने मुफ्त पढ़ाना शुरू किया। सुमन की लगन और जुनून ही था कि धीरे-धीरे इलाके में उनका नाम फैलने लगा और दूर-दूर से बच्चे उनके इंस्टीट्यूट में पढ़ने आने लगे।

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4 से 300 बच्चे

आज सुमन की कोचिंग में 300 बच्चे विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए मुफ्त कोचिंग ले रहे हैं। यहां से ट्रेनिंग लिए छात्र विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल भी हो रहे हैं, इसके साथ ही अपना और अपने परिवार का नाम रौशन कर रहे हैं। रेलवे, एसएससी, सेना और बिहार पुलिस विभाग के विभिन्न पदों के लिए सुमन छात्रों को ट्रेनिंग देते हैं।

गरीबों, किसानों, शहीदों, विधवाओं और विकलांग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा

सुमन बताते हैं कि बिहार में काफी लोग फौज में हैं और देश की सेवा में लगे हुए हैं ऐसे में हम अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए शहीदों के बच्चों को मुफ्त में कोचिंग देते हैं साथ ही विधवाओं, गरीबों, किसानों और विकलांग के बच्चों को मुफ्त में कोचिंग दी जाती है ।

सुमन को जब भी समय मिलता है वे ग्रामीण इलाकों में जाकर शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए काम करते हैं। वे वहां के छात्रों को गाइड़ करते हैं। शिक्षा संबंधी उनकी हर समस्या को हल करते हैं। वे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जागरुक करते हैं और उन्हें ज़िंदगी में शिक्षा के महत्व को बताते हैं। इस काम में वे पिछले कई वर्षों से लगे हुए हैं जिस कारण समस्तीपुर में सुमन का काफी नाम है और दूर-दूर से लोग उनसे सलाह लेने आते हैं। सुमन मानते हैं कि लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना ही अब उनकी जिंदगी का लक्ष्य है।

इन सब कार्यों को सुमन खुद अपने दम पर करते हैं उन्हें किसी प्रकार का कोई अनुदान नहीं मिलता और न ही वे अनुदान के लिए किसी से कहते हैं । सुबह-सुबह ही सुमन लोगों की मदद के लिए निकल जाते हैं और फिर देर रात तक घर लौटते हैं। छुट्टी वाले दिन वे ग्रामीण इलाकों में निकल जाते हैं और वहां के लोगों की मदद करते हैं। अपने काम के चलते ही सुमन को पूरे इलाके में लोग जानते हैं और उनकी बहुत इज्ज़त करते हैं।

सुमन मानते हैं कि "शिक्षा ही हर समस्या का समाधान है। भारत को अगर सुपरपावर बनना है तो यहां के गांव-गांव में शिक्षा का प्रचार प्रसार हमें करना होगा। यह काम केवल सरकार का नहीं होना चाहिए हर व्यक्ति को शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए आगे आना चाहिए और अगर हम भारत में शिक्षा को तेजी से गांव-गांव तक पहुंचा पाते हैं तो बहुत जल्द ही भारत दुनिया के अग्रणी मुल्कों में शामिल हो जाएगा।"

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