संस्करणों
प्रेरणा

एक चायवाला जला रहा है झोपड़ी के 70 बच्चों में शिक्षा की जोत

4th May 2016
Add to
Shares
192
Comments
Share This
Add to
Shares
192
Comments
Share

दुष्यंत ने कहा था कि "असली हिन्दुस्तान तो फुटपाथ पर आबाद है।" वाकई यह बात सोलह आने सही है, असली हिन्दुस्तान डी प्रकाश राव जैसे ही न जाने कितने अनाम नायकों से आबाद है। जी हाँ प्रकाश राव अपनी तमाम समस्यायों और बेहद सीमित आमदनी के बावजूद भी अपने प्रयास से झोपड़ी के अंधेरों को शिक्षा की रौशनी से दूर करने के मिशन में तन मन धन से जुटे हैं।  

image


ओडिशा के शहर कटक के निवासी 58 वर्षीय डी. प्रकाश राव इस उम्र में भी अपनी झुग्गी के बच्चों को शिक्षित बनाने के मिशन के प्रति पूरी तरह समर्पित। उम्र के इस पड़ाव में जब आम आदमी अपना परलोक सुधारने की जुगत करने लगता है। प्रकाश राव तक़रीबन 10 सालों से रोज़ अहले सुबह 4 बजे बिस्तर छोड़ देते है। उठने के बाद नित्य क्रिया से फ़ारिग हो कर घर से चाय पी कर वो कटक के बक्सी बाज़ार स्थित अपनी फूटपाति चाय की छोटी सी दुकान पर पहुचते हैं। 

image


ये महज एक दुकान ही नहीं, जिससे राव के परिवार और उनका घर चलता है बल्कि आस-पास झुग्गी झोपड़ी में रह रहे लोगों के बच्चों के सपने को हक़ीक़त में तब्दील करने वाला मंदिर है। झुग्गी के बच्चों में फैली अशिक्षा के अँधेरे से उनकी रौशन दुनिया से तारुफ़ कराने वाला ठिया है। इस दुकान के मार्फ़त चाय बेचकर डी. प्रकाश राव अपनी आमदनी का 50 प्रतिशत झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई के ऊपर ख़र्च करते हैं।

image


स्कूल में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए प्रकाश सभी को दूध भी पीने को देते हैं। राव का कहना है, 

"बच्चे दूध पीकर ही सेहतमंद हो सकेंगे। बच्चे स्वास्थ्य और सेहतमंद रहेंगे तो उनका ध्यान पढ़ाई में लगा रहेगा। जब पढ़ाई करेंगे तो न केवल वो शिक्षित होंगे बल्कि गलत रास्ते पर जाने से बचेंगे और इससे समाज बेहतर होगा। आने वाली पीढ़ी बेहतर होगी।" 

अपने इस प्रयास में राव लागातार जी जान से भिड़े रहते है। हर मौसम में हर पहर राव की कोशिश है बच्चों को शिक्षित करना। नि:स्वार्थ भाव से बच्चों की सेवा के ज़रिए समाज और देश की सेवा में जुटे हैं। गुमनाम अंधेरों में भी शिक्षा की अलख जगाते डी प्रकाश राव अपने इस मिशन को ही समर्पित है।

image


कहते है कि शिक्षा के द्वारा ही आप किसी भी देश की दिशा और दशा सुधार सकते हैं। आज के इस दौर में जहां लोग समाज में छोटे से भी योगदान को बढ़ा चढ़ाकर प्रचारित करते है वही डी प्रकाश राव गुमनाम हो कर भी अपने सराहनीय योगदान से शिक्षा के माध्यम से गरीब बच्चों के भविष्य सवारने में महती भूमिका निभा रहे है।

image


ऐसी ही और प्रेरणादायक कहानियाँ पढ़ने के लिए हमारे Facebook पेज को लाइक करें

अब पढ़िए ये संबंधित कहानियाँ:

एक शख्स ने आदिवासियों के लिए छोड़ी बड़ी नौकरी, मोबाइल से आज कर रहा है उनकी समस्याओं का समाधान

कैसे एक चाय बनाने वाले बन गए चार्टर्ड अकाउंटेंट? महाराष्ट्र सरकार ने बनाया ‘अर्न एंड लर्न’ स्कीम का ब्रांड एंबेस्डर

बच्चों की ‘वानर सेना’ ने इंदौर में सीटी बजाकर रोकी खुले में शौच की प्रवृत्ति, 4 गांव को किया खुले में शौच से मुक्त

Add to
Shares
192
Comments
Share This
Add to
Shares
192
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags