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मिलिए कमला मिल आग हादसे में 150 लोगों को बचाने वाले इन दो सिक्योरिटी गार्डों से

31st Dec 2017
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गंभीर होती आग को देखते ही सूरज ने तुरंत फायर ब्रिगेड को कॉल किया वहीं महेश पाइप के सहारे चौथी मंजिल पर चढ़ गये। क्योंकि ऊपर जाने के सारे रास्ते आग की लपटों की वजह से बंद हो गए थे...

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बताया जा रहा है कि जिन रास्तों से लोगों को बाहर निकलना था, वहां सिर्फ धुआं ही धुआं था। कुछ भी साफ तौर पर नहीं नजर आ रहा था, इसकी वजह से लोग फंस गए। लाख कोशिशों के बाद भी वे लोग बाहर नहीं आ पाए।

सूरज ग्राउंड फ्लोर पर ही खड़े होकर लोगों को बाहर निकलने का रास्ता बता रहे थे। दोनों सिक्योरिटी गार्डों ने लगभग 150 लोगों की जिंदगियां बचा लीं। इन दोनों की बहादुरी पर एक सलाम तो बनता है।

पिछले हफ्ते मुंबई के कमला मिल कंपाउंड में आग लगने की वजह से 15 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस हादसे में मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता था, लेकिन वहां पर तैनात दो सुरक्षाकर्मियों की बदौलत सैकड़ों लोगों की जानें बच गईं। महेश साबले और सूरज गिरी पास वाली बिल्डिंग में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर तैनात हैं। वे दोनों टाइम्स नाउ के सर्वर रूम में काम करते हैं। उन्होंने अपने ऑफिस से सामने वाली बिल्डिंग में रात को लगी आग को देखा।

गंभीर होती आग को देखते ही सूरज ने तुरंत फायर ब्रिगेड को कॉल किया वहीं महेश पाइप के सहारे चौथी मंजिल पर चढ़ गये। क्योंकि ऊपर जाने के सारे रास्ते आग की लपटों की वजह से बंद हो गए थे। लेकिन महेश ने किसी तरह वहां पहुंचकर दरवाजे को तोड़ दिया। इतना ही नहीं वे थोड़ा और आगे गए और आग की लपटों से घायल हो चुके 12 लोगों को खींचकर सुरक्षित स्थान पर ले गए। बताया जा रहा है कि जिन रास्तों से लोगों को बाहर निकलना था, वहां सिर्फ धुआं ही धुआं था। कुछ भी साफ तौर पर नहीं नजर आ रहा था, इसकी वजह से लोग फंस गए। लाख कोशिशों के बाद भी वे लोग बाहर नहीं आ पाए।

वहां फंसे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। बचाव कार्य में शामिल एक फायरमैन ने बताया, 'हमें सभी 15 शव एक बाथरूम में मिले जो कि तकरीबन 100 वर्ग फीट क्षेत्र में बना हुआ है। इसके साथ ही नीचे आने के लिए दो सीढ़ियां थीं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि लोगों ने यहीं से निकलने की कोशिश की होगी। हालांकि, आगे एक सीढ़ी पूरी तरह से आग की चपेट में आ चुकी थी और दूसरी में कुछ भी साफ तौर पर नजर नहीं आ रहा था। पूरे क्षेत्र में धुआं ही धुआं था।'

महेश ने एनडीटीवी से बात करते हुए बताया कि वहां पर इतनी भारी मात्रा में काला धुआं निकल रहा था कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था। इसलिए महेश ने किसी तरह नाक बंद किया और लोगों को बाहर निकालने लगे। वहीं सूरज ग्राउंड फ्लोर पर ही खड़े होकर लोगों को बाहर निकलने का रास्ता बता रहे थे। दोनों सिक्योरिटी गार्डों ने लगभग 150 लोगों की जिंदगियां बचा लीं। इन दोनों की बहादुरी पर एक सलाम तो बनता है।

यह भी पढ़ें: मिलिए हर रोज 500 लोगों को सिर्फ 5 रुपये में भरपेट खाना खिलाने वाले अनूप से

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