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'मन की बात' ने बदल दी इस 'तिकड़ी' की किस्मत, नौकरी करने के बजाय अब दूसरों को दे रहे हैं रोजगार

21st Feb 2016
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बनारस में कर रहे हैं ऑनलाइन सब्जी का कारोबार....

चंद दिनों में शहर में बटोरी सुर्खियां...

लाखों तक पहुंचा सब्जी का कारोबार...

दूसरे नौजवानों को दे रहे हैं रोजगार...

एमसीए, बीसीए जैसी डिग्री लेने के बाद हर युवा चाहता है उसे नामी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिले। मोटी तनख्वाह हो। ऐशो आराम की जिंदगी हासिल हो। लेकिन बनारस के तीन युवा शायद ऐसा नहीं सोचते। उन्होंने टेक्निकल कोर्स करने के बाद खुद का रोजगार करने की ठानी और देखते ही देखते बदल दी अपने जिंदगी की तस्वीर। आज वो खुद नौकरी नहीं करते बल्कि दूसरों को नौकरी देते हैं। ऐसे ही तीन युवा हैं आशुतोष गुप्ता, अमित चौबे और राकेश कुमार। 

कैसी मिली प्रेरणा

बनारस की गलियों में आज इन तीन युवाओं की चर्चा है। दिन प्रतिदिन ये युवा घर-घर में अपनी पैठ जमाते जा रहे हैं। इनकी पहुंच हर घर के किचेन तक हो गई है। सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि गांव के किसानों की जुबान पर भी इनका नाम चढ़ चुका है। जी हां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से प्रभावित बनारस के ये युवा स्टार्टअप हैं। बनारस जैसे शहर में इन युवाओं ने ऑनलाइन सब्जी बेचने का काम शुरू कर मार्केटिंग का ट्रेंड ही बदल दिया है.....

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दरअसल पूरे देश में ऑनलाइन मार्केटिंग का कारोबार तेजी से पांव पसार रहा है....भागमभाग भरी जिदंगी में अब लोग दुकानों पर वक्त बर्बाद करने के बजाय ऑनलाइन सामान खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। सिर्फ मेट्रो सिटीज में ही नहीं छोटे शहरों के लोग भी धड़ल्ले से ऑनलाइन मार्केटिंग कर रहे हैं। लोगों के इसी रुझान को समझा बनारस के इन युवाओं ने और ऑनलाइन सब्जी बेचने का काम शुरू कर दिया। 23 साल के युवा कारोबारी अमित चौबे ने योरस्टोरी को बताया, 

''कुछ महीने पहले मैंने रेडियो पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम को सुना। इस कार्यक्रम में मोदी ने युवाओं को लेकर अपने मन के विचार रखे जिसमें उन्होंने स्टार्टअप इंडिया का जिक्र किया। इसी कार्यक्रम के बाद मेरे दिमाग में कुछ अलग करने की जिद्द आई।''


कुछ ही दिनों में अमित की ये जिद्द उनका जुनून बन गई। एमसीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमित ने किसी कंपनी में नौकरी करने के बजाय खुद का रोजगार करने का मन बनाया। अमित ने अपने दोस्त आशुतोष गुप्ता और राकेश के साथ मंथन किया। अमित की तरह आशुतोष ने भी बीसीए की पढ़ाई की जगह राकेश पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन तीनों ने नौकरी के लिए भटकने के बजाय खुद का कारोबार करना सोचा। अहमदाबाद की लोकप्रिय ऑनलाइन सब्जी वेबसाइट ''सब्जी वब्जी'' से प्रेरित होकर बनारस में भी कुछ ऐसा ही करने की ठानी। कहीं से जुगाड़ करके 70 हजार रुपए जुटाए। वेबसाइट तैयार कराई और ऑनलाइन सब्जी बेचने का कारोबार शुरु कर दिया। इन युवाओं की वेबसाइट का नाम banarasisabji.com है। इस वेबसाइट के जरिए ये तीनों युवा घर-घर तक सब्जी पहुंचाने का कारोबार कर रहे हैं। पहले दिन 15 ऑर्डर मिले। अमित के व्यवसाय करने के नायाब नमूने का लाभ अब काशी वासियों को मिल रहा है। 


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क्या है बनारसीसब्जी डॉट कॉम

banarasisabji.com पर सभी प्रकार की सब्जियां उपलब्ध होती हैं। सभी सब्ज़ियों के रेट भी वेबसाइट पर रहते हैं। जिससे ग्राहक को किसी भी तरह की परेशानी ना हो। वेबसाइट पर फोन नंबर भी दिया गया है। ग्राहकों को 2 घंटे के अंदर सब्जी डिलीवरी कर दी जाती है। वेबसाइट के ग्राहकों को समय-समय पर सेल और ऑफर भी दिया जाता है। 120 रूपये से ज्यादा सब्ज़ी की खरीद पर कोई भी डिलवरी चार्ज नहीं है। 20 जनवरी से शुरू हुई banarasisabji.com को लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। आलम ये है कि अब तक लगभग 450 लोग इससे जुड़कर ऑनलाइन सब्ज़ी खरीद रहे हैं। इस तिकड़ी की मेहनत का ही असर है कि चंद रुपयों से शुरू हुआ इन तीनों का कारोबार अब लाखों में हो गया है। अपने काम को आसान और ग्राहकों की सुविधा के लिए अमित और उसके दोस्तों ने 10 डिलवरी ब्वॉय रखा है जो शहर के कोने कोने में लोगों के घरों तक सब्जियां पहुंचाते हैं। 


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कैसे करता है काम बनारसीसब्ज़ी डॉट कॉम

अपनी वेबसाइट के जरिए अमित और उसके दोस्तों ने सब्जी मंडियों में बिचौलियों के चेन को भी तोड़ दिया है। आमतौर पर मंडियों में बिचौलियों और बड़े व्यापारियों का बोलबाला होता है। ये बिचौलिए किसानों से औने पौने दाम पर उनकी सब्जियां खरीदते है और फिर उसे ऊंचे दाम पर रिटेलर को बेचते है। इस लंबी चेन के कारण हमारी और आपकी थाली तक पहुंचने वाली सब्जियों के दाम आसमान छूने लगते हैं। इसका सबसे बड़ा असर किसानों और आम जनता पर पड़ता है। किसान के पास मंडियों के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं रहता तो ग्राहक मजबूरी में महंगी सब्जियां खरीदता है। यही वजह है कि ग्राहकों को ताजी और सस्ती सब्जी मिले इसके लिए ये युवा उन किसानों से सीधे संपर्क करते हैं जो सब्जियों की खेती करते हैं। अमित और उसके दोस्त गांव-गांव जाते हैं। उन्हें अपनी वेबसाइट के बारे में जानकारी देते हैं और उनकी सब्जियां खरीदते हैं। इस पहल से जहां किसानों को उनका उचित मेहनताना मिलता है वहीं वेबसाइट के ग्राहकों को ताजी और सब्जी सस्ती। अमित की योजना है कि आने वाले दिनों में वह सब्जी की खेती करने वाले किसानों को वैज्ञानिक तरीके से जागरुक करें। ताकि किसान भी खेती के नए नए तरीकों से वाकिफ हो। अमित इसके लिए बीएचयू के कृषि वैज्ञानिकों की मदद लेंगे। आने वाले दिनों में किसानों के लिए प्रशिक्षण शिविर लगाया जाएगा। अमित बताते हैं कि किसानों को टेक्निक के साथ जोड़ना मेरा असल मकसद है। पिछले दिनों पहुंच बना लेंगे। 

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banarasisabji.com से अब नवयुवकों को रोज़गार का मौका भी मिल रहा है। लगभग 30 युवक इस कंपनी से जुड़कर नौकरी कर रहे हैं। अमित के मुताबिक, 

"हमारा मकसद सिर्फ व्यापार करना ही नहीं है बल्कि और भी ऐसे युवा जो नौकरी के लिए दर-बदर भटक रहे हो। उन्हें रोज़गार मुहैया करवाना है। कुछ दिनों पहले पीएम मोदी के आदर्श ग्राम जयापुर में रोज़गार मेले के आयोजन में तमाम बड़ी कंपनियों के साथ हमने भी भागीदारी की थी और 25 नवयुवकों को अपने कंपनी में काम करने के लिए चयनित किया था। सिर्फ बेरोजगारों ही नहीं बल्कि दिव्यांगों को भी कंपनी की ओर से पूरा मौका दिया जा रहा है।" 

कंपनी अपने ग्राहकों तक सामान पहुंचाने के लिए सिर्फ दिव्यांगों के बनाए बैग का इस्तेमाल करती है, ताकि इन दिव्यांगों में भी स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके। अमित ने योर स्टोरी को बताया कि हम दिव्यांगों को मजबूर नहीं बल्कि मजबूत बनने का एहसास दिलाते हैं। खुद मोदी भी दिव्यांगों को बढ़ावा देने की अपील कर चुके हैं। ऐसे में हमारा नैतिक कर्तव्य बनाता है कि हम दिव्यांगों का साथ दें। 


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यकीनन पीएम नरेंद्र मोदी की एक सोच ने अमित जैसे लाखों युवाओं के सपने में रंग भर दिया है। अमित और उसके दोस्तों ने आज उस रास्ते को चुना है जो आसान नहीं है। लेकिन उन्हें यकीन है कि यही रास्ता उन्हें एक दिन मंजिल दिलाएगा। व्यापार का ये तरीका बनारस में न सिर्फ नया ट्रेंड बनकर उभरा है बल्कि कई बेरोजगारों के लिए सौगात भी लेकर आया है। उम्मीद है कि अमित की इस कोशिश से और भी युवा प्रेरणा लेंगे और मोदी के मेक इन इंडिया के सपने को साकार करेंगे। 


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