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अंजान शहर में ख़रीदारी की सबसे अच्छी दुकानें बस एक क्लिक दूर

माइका के छात्रों ने कोलकता में शुरू की फैशन की ऑनलाइन वेबसाइट फैशीओनोवडॉटकॉम

1st Jul 2015
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लगभग सभी को घर से बाहर दूसरे शहर में रहते हुए, खरीदारी के लिए सही जगह ढूंढने में परेशानी होती है। कोलकाता में रह रहे माइका (एमआईसीए) के दो पूर्व छात्र शरद कुमार और तनुश्री खंडेलवाल ने इस परेशानी में छुपे व्यवसाय के अवसर को पहचाना। कैंपस के आस-पास के ऑटो वाले उनके खरीदारी के लिए गाइड हुआ करते थे, लेकिन फिर भी दोनों को लगता था कि कोई ना कोई और बेहतर तरीका होना चाहिए जो ख़रीदारी की सही जगहों तक पहुंचा सके। फैशीओनोवडॉटकॉम (fashionove.com) को लेकर की गयी शुरूआती चर्चा के बारे में दोनों बताते हैं 

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“हमने सोचा कि कोई ऐसी साइट होनी चाहिए जिसमे लोगों को स्थानीय फैशन बुटीकों, दुकानों की रेटिंग मिले में, उनमे मौजूद सामान की जानकारी मिले और उनकी कीमत का पता चले।”

जहाँ शरद ने उत्पाद बनाने और उसके विकास के लिए अपने कौशल का उपयोग किया। वहीँ तनुश्री ने फ़ैशन और मार्किट की रिसर्च करने में अपनी समझ को लगाया।” हर अच्छे-बुरे अनुभव के लिए पहचाने जाने वाला कोलकाता शहर एक नये व्यवसाय के लिए तैयार था। सस्ता जीवन-यापन, मददगार लोग और पौशाकों के मामले में शहर का सम्पन्न होना, फैशीओनोव के लिहाज से सबसे अच्छी बात है। तनुश्री कहती है कि “दूसरी तरफ व्यवसाय को लेकर यहाँ नकारात्मक माहौल भी है। यहां के लोग जोख़िम नहीं लेना चाहते। कुछ अलग और नया करने का ‘उन्माद’ यहां गायब है।” कोलकाता में व्यवसाय को लेकर एक प्रकार की रूढ़िवादी सोच बनी हुई है और जब दोनों निवेशक ढूंढने निकले तो लोगों की यह सोच सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आई। लेकिन फैशीओनोव का लक्ष्य लोगों की इस सोच को ग़लत साबित करते हुए, यह सन्देश देना था कि किसी भी शहर सफलता में मुमकिन है और यह सफलता कार्य करने वाले व्यक्ति पर निर्भर करती है।

अक्टूबर 2014 में शुरू हुआ फैशीओनोव शानदार तरीके से कार्य करते हुए, 200 बुटीकों की समीक्षा अपनी साइट डाल चुका है। फ़ैशन इ-कॉमर्स बाज़ार में 80 ऑनलाइन विक्रेताओं के साथ उनके पास छ हज़ार से ज्यादा स्टॉक कीपिंग यूनिट है। शरद बताते हैं बिना कहीं प्रचार किये, शुरू में रोज 300 लोग हमारी साइट को देखने लगे। हमें नियमित तौर पर बहुत से कॉल ग्राहकों और विक्रेताओं की ओर से आने लगे, कोलकाता जैसे शहर में यह आत्मविश्वास को बढ़ाता है। फैशीओनोव ऑनलाइन टू ऑनलाइन है। ऐसी साइट में सबसे अहम बात लोगों के लिए ऑफलाइन जानकारियों को इकठ्ठा करना होता है। लोग सामान की जानकरियों को ऑनलाइन देखने के बाद खरीदारी करने लिए सीधे स्टोर में जा सकते हैं। लेकिन फैशीओनोव इसमें एक कदम आगे बढ़त हुए ऑनलाइन ख़रीदारी की सुविधा भी देता है। जस्टडायल और जोमाटो ने इस मॉडल को भारत के परिपेक्ष्य में बहुत कारगर साबित किया है। कपड़ों के ऑनलाइन बाज़ार की ओर बहुत सी तकनीकी कम्पनियां सक्रियता बढ़ा रही हैं। फिल्प्कार्ट के संस्थापकों ने जहां महिला परिधानों के लिए ऑनलाइन ‘रोपोसो’ शुरू किया है, वहीँ वेंचर ग्रुप के लिए ऑनलाइन में ‘वूप्लर’ यह भूमिका निभा रहा है। कई वर्गीकृत वेबसाइटों में बुटीक हैं, लेकिन एक वर्ग पर ज्यादा केन्द्रित होने के कारण फैशीओनोव का डाटा बहुत बढ़ जाएगा।

शरद कहते हैं कि “हम असंगठित बुटीक या स्टोर को उतनी ही जगह देते हैं जितनी संगठित बुटीक या स्टोर को। इस तरह ऑनलाइन जगह मिलने से बुटीक और स्टोर के ऑनलाइन और ऑफलाइन ग्राहक बढ़ जाते हैं।” उनकी वेबसाइट मोबाइल पर पहुंच चुकी है लेकिन एप्प अभी तक आया नहीं है। कोलकाता और मुंबई में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुकी फैशीओनोव, एप्प के साथ तीन और शहरों में अपना विस्तार करने वाली है।

मुश्किल शुरुआत के बाद फैशीओनोव एक लम्बी यात्रा पर निकल चुका है। तनुश्री इस कहानी को बॉलीवुड मसाला की तरह देखते हुए कहती है 

“कहानी में एक माँ जो अपने बच्चे पर आँख मूँद कर भरोसा करती है और उसके लिए दुनिया से लड़ सकती है। एक पिता है जो कभी ज्यादा कुछ कहते नहीं, लेकिन समय-समय पर संकेत देते रहते हैं कि, छोटे से लाभ के लिए की गयी नौकरी जीवन की सबसे बड़ी भूल होती है। ये सुन कर लोग चौंक जाते हैं कि 15 लाख एमबीए पर खर्च करने बाद हम कुछ नहीं कमा रहे हैं, जबकि हमारे दोस्त हमारे साहस को सलाम करते हैं, हमारे अच्छे काम पर मुस्कराते हैं और जब कोई मूर्खता करते हैं तो ये दोस्त ठहाके भी मारते हैं। हम अपने सपनों का पीछा करते हुए चुनौतियों से लड़ रहे हैं।”
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