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उम्र के हिसाब से अलग अलग ढंग से काम करता है इंसानी दिमाग

1st Sep 2017
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शोधकर्ताओं ने अब मान लिया है कि बढ़ती उम्र के साथ हमारा दिमाग भी बदलता रहता है। उसकी संरचना और काम करने के तरीके में बदलाव आते रहते हैं और ये बदलाव बचपन से किशोरावस्था में पहुंचने और जवानी से बुढ़ापे की अवस्था तक आने में होते ही रहते हैं।

फोटो साभार: सोशल मीडिया

फोटो साभार: सोशल मीडिया


बीजिंग जियातोंग यूनिवर्सिटी की लिक्जिया टियान, जो कि इस शोध की लेखिका भी हैं, के मुताबिक, प्रौढ़ावस्था के दौरान मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्य प्रणाली के बारे में लोग अब तक अनभिज्ञ थे। हमारे शोध को इसी तथ्य से प्रेरणा मिली। और जब शोध का निष्कर्ण निकला तो वो काफी अलग था। 

चूंकि वैज्ञानिक ये बात मानते रहे कि एक उम्र के बाद मानव मस्तिष्क में कोई तब्दीली ही नहीं आती तो दिमागी बीमारियों का इलाज भी इसी के मुताबिक होता रहे, जोकि खतरनाक है। 

चीन के वैज्ञानिकों ने पाया है कि एक वयस्क इंसान के दिमाग में शुरू के कुछ सालों में कुछ तब्दीलियां आती हैं। इन तब्दीलियों के बाद एक वयस्क के दिमागी क्षमता की सही सही जांच संभव है। इस शोध का ये निष्कर्ष काफी चौंकाने वाला है क्योंकि अब तक वैज्ञानिकों का मानना था कि जब इंसान किशोरावस्था से निकलकर एक परिपक्व इंसान बनता है तो उसका दिमाग स्थिर और पूर्ण विकसित हो चुका होता है। शोधकर्ताओं ने अब मान लिया है कि बढ़ती उम्र के साथ हमारा दिमाग भी बदलता रहता है। उसकी संरचना और काम करने के तरीके में बदलाव आते रहते हैं। और ये बदलाव बचपन से किशोरावस्था में पहुंचने और जवानी से बुढ़ापे की अवस्थआ तक आने में होते रहते हैं।

अब तक क्या होता था कि एक अवधारणा को ही सत्य मान लिया गया था। ये अवधारणा कहती थी कि एक वयस्क इंसान का दिमाग सुगठित और सुविकसित होता है और एक उम्र के बाद इसमें कोई बदलाव नहीं आते वो मृत्युपर्यंत ऐसा ही रहता है। बीजिंग जियातोंग यूनिवर्सिटी की लिक्जिया टियान, जो कि इस शोध की लेखिका भी हैं, के मुताबिक, प्रौढ़ावस्था के दौरान मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्य प्रणाली के बारे में लोग अब तक अनभिज्ञ थे। हमारे शोध को इसी तथ्य से प्रेरणा मिली। और जब शोध का निष्कर्ण निकला तो वो काफी अलग था। ये शोध अभी हाल ही में फ्रंटियर्स इन ह्यूमन न्यूरोसाइंस में प्रकाशित हुआ है।

उम्र के साथ बदलती रहती है दिमाग की संरचना

चूंकि वैज्ञानिक ये बात मानते रहे कि एक उम्र के बाद मानव मस्तिष्क में कोई तब्दीली ही नहीं आती तो दिमागी बीमारियों का इलाज भी इसी के मुताबिक होती रहीं। जोकि खतरनाक है। दिमाग के अध्ययन के लिए लिखी गई किताबों में भी यहीं बातें है और छात्र यही बात पढ़ रहे हैं। जब किताबों में उम्र दर उम्र मस्तिष्क के विकारों के बारे में बात होती है तो इससे जुड़े तथ्यों को बड़ी ही सावधानी से रखना चाहिए। गलत आधार पर हुई पढ़ाई गलत ही निष्कर्ष देगी, गलत इलाज को बढ़ावा देगी।

टियान की टीम ने 111 वॉलन्टियर को इकट्ठा किया। ये 111 लोग 18 से लेकर 55 साल के उम्र वर्ग के थे। उनके दिमागों की जांच की गई। टीम ने पाया कि आंशिक एनिसोट्रॉपी काफी उम्र से कम हो गई है और विशिष्ट मस्तिष्क क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां आरंभिक आयु से संबंधित परिवर्तन हुए। परिवर्तन इतने अधिक उम्र से जुड़े थे कि शोधकर्ता अपने मस्तिष्क स्कैन का विश्लेषण करके केवल किसी व्यक्ति की उम्र का अनुमान कर सकते हैं। इससे पहले यह विचार किया जा रहा है, वैज्ञानिकों ने सोचा था कि स्वस्थ वयस्कों की मस्तिष्क की संरचना पुरानी उम्र से पहले अपेक्षाकृत स्थिर थी। 

उन्होंने पाया कि आंशिक एनिसोट्रॉपी काफी उम्र से कम हो गई है, और विशिष्ट मस्तिष्क क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां आरंभिक आयु से संबंधित परिवर्तन हुए। परिवर्तन इतने अधिक उम्र से जुड़े थे कि शोधकर्ता अपने मस्तिष्क स्कैन का विश्लेषण करके केवल किसी व्यक्ति की उम्र का अनुमान कर सकते हैं। इससे पहले यह विचार किया जा रहा है, वैज्ञानिकों ने सोचा था कि स्वस्थ वयस्कों की मस्तिष्क की संरचना पुरानी उम्र से पहले अपेक्षाकृत स्थिर थी।

टीम ने स्वस्थ वॉलटिंयरों के एक समूह से मस्तिष्क स्कैन के एक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटासेट का विश्लेषण किया था, जो एक विशेष प्रकार के चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग थे, जो प्रसार के इमेजिंग से गुजर चुके थे। प्रसार तंत्रिका इमेजिंग वैज्ञानिकों को मस्तिष्क में छवि और नक्शा संरचनाओं की अनुमति देती है और विशिष्ट मस्तिष्क क्षेत्रों में तंत्रिका तंतुओं के व्यास, घनत्व और कनेक्टिविटी के आधार पर आंशिक एनिस्ट्रॉपी जैसे मापदंडों को मापने देती है।

इस रिसर्च के मायने क्या हैं

तो, इन परिवर्तनों का क्या मतलब है? टियान कहती हैं, 'शोधकर्ताओं ने मानव मस्तिष्क की बीमारी या बुढ़ापे में गिरावट के लिए आंशिक एनिसोट्रोपॉपी में घट जाती है। यद्यपि बुजुर्ग लोगों में पहले की रिपोर्ट के मुकाबले संरचनात्मक परिवर्तन सूक्ष्म थे, मस्तिष्क के क्षेत्रों ने पुराने परिवर्तनों से पता चला है कि बुढ़ापे में संज्ञानात्मक गिरावट, जैसे कम प्रतिक्रिया समय, तर्क क्षमता और स्मृति के साथ जुड़े रहे हैंतो, इन परिवर्तनों का क्या मतलब है? शोधकर्ताओं ने मानव मस्तिष्क की बीमारी या बुढ़ापे में गिरावट के लिए आंशिक एनिसोट्रोपॉपी में घट जाती है। यद्यपि बुजुर्ग लोगों में पहले की रिपोर्ट के मुकाबले संरचनात्मक परिवर्तन सूक्ष्म थे, मस्तिष्क के क्षेत्रों ने पुराने परिवर्तनों से पता चला है कि बुढ़ापे में संज्ञानात्मक गिरावट, जैसे कम प्रतिक्रिया समय, तर्क क्षमता और स्मृति के साथ जुड़े रहे हैं।'

टीम ने इन वयस्कों में संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़े परिवर्तनों की सीधे जांच नहीं की। ये परिवर्तन बुढ़ापे मस्तिष्क के कुछ पहले लक्षणों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अगर वे उम्र से संबंधित संज्ञानात्मक गिरावट की शुरुआत से मेल खाते हैं।टीम ने इन वयस्कों में संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़े परिवर्तनों की सीधे जांच नहीं की। ये परिवर्तन बुढ़ापे मस्तिष्क के कुछ पहले लक्षणों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अगर वे उम्र से संबंधित संज्ञानात्मक गिरावट की शुरुआत से मेल खाते हैं। अध्ययन की सीमाओं में से एक यह है कि यह वयस्कता पर मस्तिष्क संरचना में मतभेद का सिर्फ एक स्नैपशॉट प्रदान करता है। शोधकर्ता एक ही लोगों के शुरुआती से लेकर मध्य-वयस्क होने तक लंबी अवधि के अध्ययन का पालन करना चाहते हैं। 

ये भी पढ़ें- तो मोटापा ही बन जाएगा डायबिटीज का इलाज !

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