सर्फिंग का मजा लेना है तो आइए देश के पहले 'सर्फिंग क्लब'

अमरीका के जैक्सनविले के रहने वाले जैक हैनबर ने मैंगलोर में रखी ‘मंत्रा सर्फिंग क्लब’ की नींव1972 में आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में भारत आए जैक पूर्व से सर्फिंग के शौकीन रहे हैं और अब सर्फिंग स्वामी के नाम से हैं मशहूरवर्ष 2004 में SurfingIndia.net वेबसाइट की शुरुआत की और जल्द ही हो गए लोकप्रियक्लब के अलावा वेबसाइट डिजाइनिंग और नारियल बेचकर चलाते हैं खर्चा

सर्फिंग का मजा लेना है तो आइए देश के पहले 'सर्फिंग क्लब'

Tuesday June 16, 2015,

5 min Read

क्या आपने किसी ऐसे साधु के बारे में सुना है जो अपने आध्यात्मिक ज्ञान के अलावा सर्फिंग (लहरों पर चलने का खेल) के लिये भी मशहूर हों। मूल रूप से अमरीका के जैक्सनविले के रहने वाले जैक हैनबर एक ऐसे स्वामी अपनी हैं जो अपनी सर्फिंग की कला के लिये भी जाने जाते हैं। जितनी आसानी से वे समुद्र की लहरों की सर्फिंग कर लेते हैं उतनी ही आसानी से भी इंटरनेट की सर्फिंग कभी कर लेते हैं। पिछले 50 वर्षों से सर्फिंग की दुनिया में सक्रिय जैक अब सर्फिंग स्वामी के नाम से मशहूर हो चुके हैं। वर्ष 1972 में उन्होंने पारंपरिक भारतीय आध्यात्म के चिंतन में हाथ आजमाने की सोची और उसी समय से यह साधु सर्फिंग की दुनिया में रम गया। सर्फिंग भारत में अभी इतनी लोकप्रिय नहीं हैं और जैक इस मान्यता को बदलने का इरादा रखते हैं। जैक के लिये यह अब भी एक अबूझ पहेली ही है कि भारत जैसे देश में जहां दुनिया की सबसे लंबी तटरेखा में से एक मौजूद है और जहां विभिन्न मौसमों में सर्फिंक करने की सुविधा देते असंख्य स्थल हैं उस देश के निवासी सर्फिंग की संस्कृति से बिल्कुल अनजान हैं।

image


वर्ष 2004 में इन्होंने दक्षिण भारत के कुछ युवा लड़कों को अपने साथ जोड़ते हुए मैंगलोर में एक छोटे से सर्फिंग क्लब की स्थापना करी। उस समय उनके पास सर्फिंग सीखने आने वालों में एक 8 वर्षीय लड़का राममोहन सिंह भी था। हमनें भारत के पहले सर्फिंग क्लब ‘मंत्रा’ के बारे में और अधिक जानकारी लेने के लिये राममोहन से विस्ततृत बातचीत की। राममोहन ने सर्फिंग करने के अलावा सर्फिंग की फोटोग्राफी करनी भी शुरू की और थोड़े ही समय में वे इसमें मशहूर आ गए। सर्फिंग के समय उनकी खींची गई कई तस्वीरें दुनिया भर की पत्रिकाओं की शोभा बढ़ा चुकी हैं। राममोहन कहते हैं, ‘‘शुरुआत में हमें सर्फिंग करने के लिये चेन्नई का रुख करना पड़ता था। खुद को स्थापित करने के लिये सर्फिंग स्वामी ने मैंगलोर का चयन किया और लोगों को महासागर में सर्फिंग का आनंद प्रदान करने के उद्देश्य से ‘मंत्रा सर्फिंग क्लब’ की स्थापना की।’’

‘मंत्रा सर्फिंग क्लब’ मूलतः एक आश्रम है जहां लोग आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में आते हैं - ‘‘हमलोग रोजाना सुबह 4 बजे जाग जाते हैं और स्नानादि से निवृत्त होकर हम अपने मंत्रों और ध्यान में जुट जाते हैं। सुबह 6.30 बजे एक समूह मंत्र के बाद एक पूजा का आयोजन किया जाता है। ध्यान करने के लिये प्रयोग होने वाले मंत्र को हम महा मंत्र या कृष्ण मंत्र कहते हैं,’’ जैक अपनी वेबसाइट पर लिखते हैं। और बस इसके बाद होती है सर्फिंग! ‘मंत्रा सर्फिंग क्लब’ मेहमानों के लिये खुला है और वे चाहें तो इनके परिसर में रहकर सर्फिंग की कक्षाओं का भाग बन सकते हैं या फिर वे कक्षाओं के लिये पंजीकरण भी करवा सकते हैं।

‘मंत्रा सर्फिंग क्लब’ एक बार में सिर्फ 6 से 8 मेहमानों को ही अपने यहां रुकने की व्यवस्था करवाता है और अपवादस्वरूप अगर कुछ आवेदक सिर्फ सर्फिंग ही सीखने के इच्छुक हों तो संख्या बढ़कर 15 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा इस क्लब को संभालने के लिये जैक और उनकी टीम वेब डिजाइनिंग से लेकर नारियल बेचने जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहती है। ‘‘हमारी वेबसाइट सर्फिंग के चाहने वालों के बीच बेहद लोकप्रिय है और अब हमने सर्फिंग से संबंधित उत्पादों को बेचने के लिये एक ई-काॅमर्स स्टोर भी खोला है,’’ राममोहन कहते हैं। वे आगे जोड़ते हैं, ‘‘हमने वर्ष 2004 में SurfingIndia.net वेबसाइट की शुरुआत की और हमें काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। बहुत ही कम समय में यह वेबसाइट बेहद लोकप्रिय हो गई और भारत का पहला सर्फिंग क्लब होने के चलते हमें लगातार महासागरीय जीवन का वास्तविक आनंद लेने के आकांक्षी लोगों से हमें अनुरोध मिलते रहते हैं। डाॅटनेट डोमेन हमें वास्तव में एक नेटवर्क या क्लब की अनुभूति देता है जो हम वास्तव में हैं भी।’’

क्लब का संचालन बेहतर तरीके से करने के लिये ‘मंत्रा सर्फिंग क्लब’ के पास करीब 5 सदस्यों की एक टीम है जिसमें से सदस्यों की संख्या जरूरत और समय के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है। सर्फिंग स्वामी अधिकतर यात्राओं पर रहते हैं लेकिन उन्होंने मैंगलोर को ही अपना आधार रखा है। इसके अलावा यह क्लब सर्फिंग से जुड़ी कई प्रतियोगिताओं का आयोजन भी करता रहता है जिसमें भाग लेने के लिये प्रतिवर्ष दुनिया भर के सर्फर मैंगलोर का रुख करते हैं। प्रकृति का सम्मान भी हमारे जीवन का एक अहम हिससा है। जैक कहते हैं, ‘‘हम लोगों को प्रकृति को सर्वोंच्चता की एक मिसाल मानते हुए उसका सम्मान करने के लिये प्रेरित करते हैं और उन्हें इसकी सर्वोच्चता की भावना के प्रति जागरुक भी करते हैं। इसके अलावा हम लोगों को पर्यावरण का संरक्षक होने की शिक्षा देते हुए उनसे जंगलों, पर्वतों, नदियों, समुद्र इत्यादि को प्रदूषिण से बचाने के लिये कहते हैं।’’

‘मंत्रा सर्फ क्लब’ को लोकप्रियता में लगातार इजाफा होता जा रहा है और अब इनसे इस खेल के बारे में संपर्क करने वालों की संख्या भी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है। इन्होंने हाल ही में मैक्सिको में सिएरा माॅदर की पहाडि़यों में एक नई परियोजना को शुरू किया है। उस इलाके के नाम के अनुरूप उन्होंने इस परियोजना का नाम हौस्टेका पोटासिना और एंकेंटांडा रखा है जहां आकर लोग कायकिंग, राफ्टिंग, ट्रायल बाइकिंग, रैपलिंग इत्यादि का आनंद ले सकते हैं।

इसके अलावा ‘मंत्रा सर्फिंग क्लब’ ने हाल ही में चेन्नई में एक सफल समारोह की मेजबानी भी की।