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घर बैठे जूस पीना है तो 'Juice Maker' की सेवाएं लीजिए, सेहत बनाइए

स्वास्थ्य के प्रति सजग लोगों को ताजा और पौष्टिक फलों और सब्जियों का जूस करवा रहे हैं उपलब्धछोटे से गांव पपनाचेरी के रहने वाले सवाद ने अपने दो मित्रों नियासिम और मोहसिन के निवेश के दमपर रखी नींवप्रारंभ में बैंगलोर की एक होटल चेन के साथ आतिथ्य उद्योग की बारीकियों से हुए रूबरूभारत में डिब्बाबंद जूस की संस्कृति और चलन को बदलने का रखते हैं इरादा

Pooja Goel
16th Aug 2015
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वर्तमान समय मे लोग इस बात को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं कि वे क्या खा रहे हैं और वे पहले से अधिक फिट और प्रसन्न रहने के लिये स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ाते जा रहे हैं धीरे-धीरे जूस का सेवन करना स्वास्थ्य का पर्याय बनकर उभरता जा रहा है। फलों के जूस का बाजार लगभग 25 से 30 प्रतिशत की सीएजीआर की दर से वृद्धि कर रहा है और ऐसे में भारत में जूस का व्यापार मुख्यतः असंगठित खिलाडि़यों के हाथों में खेल रहा है जो बाजार के 75 प्रतिशत से भी अधिक हिस्से पर कब्जा बनाए बैठे हैं। परामर्श फर्म टेक्नोपैक के अनुसार सिर्फ भारत मेें ही डिब्बाबंद (पैकेज्ड) जूस का बाजार 1100 करोड़ रुपये से अधिक का होने का अनुमान है।

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सवाद ने अपने उद्यम Juice Maker (जूस मेकर) को शुरू करने से पहले यहीं पर अपने लिये एक बेहतर भविष्य के मौके को देखा। मूलतः पपनाचेरी गांव से आने वाले सवाद ने 19 वर्ष की उम्र में ही अपने पैतृक स्थान को छोड़ दिया था। अतीत के बारे मेे बात करते हुए वे उन दिनों की याद में खो जाते हैं जब उन्होंने अपनी जेब में सिर्फ 250 रुपये लेकर बैंगलोर में पहला कदम रखा था।

वे बतातेे हैं, ‘‘मुझे अंग्रेजी में बात करना नहीं आता था। मेरे बचपन के एक मित्र नियासिम, जो अब व्यापार में मेरे साझेदार भी हैं, ने मेरे प्रारंभिक बुनयादी संचार और अस्तित्व को बचाए रखने में मददगार कुछ पटकथाएं अंग्रेजी भाषा में लिखीं और मेरी सहायता की।’’

प्रारंभ में एक होटल चेन के साथ काम करना प्रारंभ करके सवाद ने आतिथ्य उद्योग के कामकाज की बारीकियां सीखीं। समय के साथ धीरे-धीरे उन्होंने खुद को इस काम के संचालन में तैयार किया और एक दिन अपने दम पर कुछ नया शुरू करने की कल्पना को पंख लगाये।

अधिक समय नहीं लगा जब सवाद बैंगलोर की इस नामी होटल चेन के सबसे कम उम्र के जनरल मैनेजर बनने में कामयाब रहे लेकिन उनकी सफलता का सफर बस यहीं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने लोगों को एक स्वस्थ विकल्प उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से कोरामंगला इलाके में एक छोटी सी जूस की दुकान के रूप में ‘जूस मेकर’ की स्थापना की। सवाद बताते हैं कि उपभोक्ताओं को ताजे फलों का जूस उपलब्ध करवाने से अधिक बेहतर उन्हें और कुछ नहीं लगता है।

सवाद

सवाद


एक सामाजिक प्रयोग के रूप में सामने आया ‘जूस मेकर’ अब उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार मासिक सदस्यता के आधार पर फलों का ताजा जूस उपलब्ध करवाता है। सवाद के बचपन के दो मित्रों नियासिम और मोहसिन को उनके दृष्टिकोण पर भरोसा था और इसलिये वे दोनों उनके इस उद्यम में निवेश करते हुए शामिल होने के लिये मान गए। हालांकि अभी ये अपनी स्थापना के प्रारंभिक चरण में ही हैं लेकिन इन्होंने सिर्फ मुंह-जुबानी प्रचार के माध्यम से ही 250 से अधिक सदस्यता हासिल करने में सफलता हासिल कर ली है।

सवाद कहते हैं, ‘‘हमें सदस्यता के आधार पर जूस उपलब्ध करवाने के लिये कुछ स्टार्टअप्स के अलावा बहुराष्ट्रीय कंपनियों, अपार्टमेंट के साथ कई जिम संचालकों ने भी संपर्क किया और अब वे हमारे सम्मानित उपयोगकर्ता हैं। इसके बाद हमारे मन में विचार आया कि अगर हम इसके संचालन में तकनीक का भी समायोजन कर दें तो यह न सिर्फ हमारे उपभोक्ताओं के लिये बेहतर होगा बल्कि हमें भी एक सफल व्यापार माॅडल की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। डिब्बाबंद जूस की संस्कृति को बदलने का इरादा लिये ताजा जूस तैयार करने की हमारी विधि और स्वास्थ्य पैक के मिश्रण हमें औरों से कहीं आगे खड़ा कर रहे हैं।’’

सात व्यक्तियों की एक टीम के अलावा इनके पास जूस तैयार करने वालों और डिलिवरी करने वाले लड़कों के रूप में 19 व्यक्तियों की एक टीम है। इनका कहना है कि इनका यह उद्यम महीने-दर-महीने 125 प्रतिशत की दर से वृद्धि कर रहा है और नके राजस्व का प्रमुख स्त्रोत कंपनी के आॅफलाइन स्टोर्स से आता है।

नियासिम

नियासिम


ये लोग काॅर्पोरेट आर्डरव लेने से भी नहीं हिचकते हैं और फिलहाल इनके पास लुकअप, 103स्टूडियोज़, टूकीटाॅकी, पाॅल्सी और गेट क्लोज़र जैसी कंपनियों का एक मजबूत उपभोक्ता आधार है। इसके अलावा इन्होंने अपने उपभोक्ताओं तक जल्द सेवा पहुंचाने और उनके साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिये स्विगी, टाइनीआउल, टेस्टीखन्ना और फूडपांडा इत्यादि के साथ भी हाथ मिलाया है।

आने वाले दिनों में इनका इरादा जूस के लिये सिर्फ जैविक सब्जियों और फलों को इस्तेमाल करने का है। इसके अलावा वे अपने लिये फलों और सब्जियों की निर्बाध आपूति सुनिश्चित करने के लिये कुछ विक्रेताओं के साथ वार्ताओं के अंतिम चरण में हैं।

‘जूस मेकर’ वेब के अलावा एंड्रायड और आईओएस आधारित मोबाइल मंच के द्वारा अपने उपभोक्ताओं की सेवा कर रहा है। इसके अलावा यह कंपनी अगले वर्ष तक चेन्नई के बाहर भी उपस्थिति दर्ज करवाने के प्रयासों में लगा हुआ है।

एक व्यवसायी के रूप में सामने आई चुनौतियों के बारे में बताते हुए सवाद कहते हैं, ‘‘इस पूरे सफर के दौरान मैंने कई उतार और चढ़ाव के क्षणों का सामना किया है। प्रारंभिक दौर में खुद को स्थापित करने पर अधिकाधिक ध्यान देते हुए एक उद्यमी अपनी टीम के लिये सर्वश्रेष्ठ करने के बारे में सोचते हुए सामने आने वाले सवालों के जवाब देने की चिंता में ही लगा रहता है।’’

मोहसिन

मोहसिन


सवाद का सारा जोर इस बात पर रहता है कि उपभोक्ता के साथ इनका संबंध सिर्फ जूस पहुंचाने तक सीमित न रहे। इसके अलावा इनका पूरा ध्यान सेवाओं में सुधार करते हुए उन्हें और बेहतर बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाते हुए उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया लेने में भी लगाते हैं।

अगर कोई 50 बिलियन से भी अधिक के फूडटेक के बाजारपर नजर डालें तो फलों के जूस को पहुंचने का व्यवसाय अधिक आश्चर्यजनक नहीं है। बिजनेस इनसाइडर के अनुसार सिलिकाॅन वैली में बिल्कुल ‘जूस मेकर’ की तर्ज पर संचालित होने वाला एक अन्य स्टार्टअप ‘जूसरो’ बहुत अच्छी कमाई कर रहा है। अक्टूबर 2013 में 4 मिलियन अमरीकी डाॅलर और 2014 के अप्रैल में 15.8 मिलियन डाॅलर का निवेश प्राप्त करने के बाद रिपोर्टो का कहना था कि यह उद्यम जनवरी 2015 आते-आते 100 मिलियन डाॅलर का निवेश पाने वाला था।

समय के साथ ‘जूस मेकर’ निवेशकों का ध्या अपनी ओर आकर्षित करने में सफल हो रहा है। इसके अलावा आने वाले दिनों में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि यह स्टार्टअप ‘जूसरे’ की तरह सफलता की कहानी को दोहराने में सफल होता है या नहीं।

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