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जो कभी सेक्स वर्कर थीं, आज दूसरी सेक्स वर्कर्स को बता रही हैं HIV के खतरे

21st Dec 2015
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सेक्स वर्करों को करती हैं साक्षर...

एचआईवी के खतरों की जानकारी देती हैं...

स्वच्छता अभियान इस रेड लाइट एरिया की खूबी...


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वो कभी खुद सेक्स वर्कर थी लेकिन आज दूसरी सेक्स वर्करों के सशक्तिकरण के काम में लगी हैं। वो कभी पढ़ाई नहीं कर सकीं लेकिन आज उनकी बदलौत दूसरी सेक्स वर्कर साक्षर बन रही हैं। ये उन्हीं का प्रयास है कि आज महाराष्ट्र के सांगली शहर में स्वरूप थियेटर के पास मौजूद रेड लाइट एरिया देश के दूसरे रेड लाइट एरिया से ज्यादा स्वच्छ और सुंदर हैं। अमीरीबाई भले ही अपना पेशा सालों पहले छोड़ चुकी हों लेकिन आज ये सब काम अपनी संस्था ‘वेश्या महिला एड्स निर्मूलन केंद्र’ के जरिये करती हैं। वो यहां सेक्स वर्करों को एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी को लेकर ना सिर्फ जागरूक करती हैं बल्कि उनकी काउंसलिंग और इलाज का भी ध्यान रखती हैं। अमीरीबाई के इस काम में मदद करते हैं दीपक चौहान। जो उनकी संस्था में एक युवा सदस्य हैं।

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अमीरीबाई पिछड़े तबके से ताल्लुक रखती हैं और कई साल पहले धोखे से वो वेश्यावृति के इस धंधे में फंस गई, लेकिन पिछले 10 सालों से वो इस पेशे से दूर हैं। उन्होंने अपने इस काम की शुरूआत ये सोच कर की थी कि जिस रेड लाइट इलाके में वो रहती हैं वहां पर सेक्स वर्कर की कई तरह की दिक्कत हैं। ऐसे में उनकी परेशानियों को सुलझाने के लिए क्यों ना वो खुद पहल करें। इसी सोच के साथ उन्होने सबसे पहले इस रेड लाइट एरिया में एक स्कूल खोला। जहां पर सेक्स वर्कर पढ़ने आ सकती थीं, क्योंकि यहां पर कई सारी ऐसी सेक्स वर्कर थीं जो अनपढ़ होने के कारण कई तरह के काम नहीं कर पाती थी। इनमें से बहुत सारी महिलाएं तो ऐसी थी जो अपना नाम तक नहीं लिख पाती थी। इसके अलावा अमीरीबाई का उद्देश्य था कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार हो जहां पर सभी सेक्स वर्कर आएं और वो उनको एड्स जैसी गंभीर बीमारी के बारे में बता सकें। इसके साथ साथ जरूरत पड़ने पर वो सेक्स वर्कर की काउंसलिंग भी कर सकें।

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अमीरीबाई और उनके सहयोगी दीपक चौहान के मुताबिक महाराष्ट्र का सांगली जिला एचआईवी पीड़ित लोगों के मामले में दूसरे स्थान पर है। सरकारी आंकड़ो के मुताबिक ज्यादातर एचआईवी पीड़ित रेड लाइट एरिया की वजह से हुए। जब साल 2005 में अमीरीबाई को इस बात का पता चला तो उन्होने फैसला लिया कि वो इसको रोकने के लिए कदम उठायेंगी। सांगली शहर के इस रेड लाइट एरिया में करीब दो सौ सेक्स वर्कर काम करती हैं। अमीरी बाई ने जब इस काम की शुरूआत की तब इस इलाके में करीब 10 प्रतिशत महिलाएं एचआईवी से पीड़ित थी। इसलिए अमीरीबाई और उनकी संस्था में सचिव दीपक चौहान ने पहले उन सेक्स वर्कर की काउंसलिंग का इंतजाम कराया और एचआईवी पीड़ित सेक्स वर्कर को इसके पेशे से बाहर निकाला। इसके बाद उनको सब्जी बेचने, चाय का स्टॉल लगाने और दूसरे काम करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वो अपना गुजर बसर कर सकें।

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दीपक ने योर स्टोरी को बताया 

“जो सेक्स वर्कर एचआईवी पीड़ित होती हैं हम उनका हर तीन महीने में टेस्ट कराते हैं, उनका इलाज कराते हैं, जरूरत पड़ने पर दवाईयां उपलब्ध कराते हैं इसके अलावा समय समय पर यहां पर डॉक्टर आते हैं जो सेक्स वर्कर महिलाओं का चेकअप करते हैं।”

सेक्स वर्करों के लिए खोले गये स्कूल में इन लोगों ने ना सिर्फ पढ़ाई कराई बल्कि यहां आने वाली सेक्स वर्कर को बताया कि एचआईवी के कारण किस शहर में कितनी मौतें हुई। सेक्स वर्कर को इस तरह की जानकारी देने का काफी फायदा भी हुआ। अमीरीबाई चाहती थीं कि सेक्स वर्कर के बच्चों को इस काम से दूर रखा जाये और ये तभी संभव हो सकता था जब इलाके में ही स्कूल की व्यवस्था हो। इसके लिए इन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर दबाव बनाया जिसके बाद यहां पर प्री-प्राइमरी स्कूल की स्थापना हुई। इसके बाद जो बच्चे यहां की सड़क पर खाली घुमते थे वो अब स्कूल जाने लगे। दीपक के मुताबिक 

"जब ये बच्चे थोड़े बड़े हो जाते हैं तो उनको उनकी मां के पैतृक गांव भेज दिया जाता है। इसकी वजह है कि सेक्स वर्कर की दूसरी पीढ़ी इस पेशे में ना उतर सकें। खासतौर से लड़कियों के मामले में ये ज्यादा सावधानी बरतते हैं ताकि वो अपना जीवन इस अंधेरी दुनिया से बाहर उजाले में जी सके।"
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स्वच्छता अभियान इस रेड लाइट एरिया की खास यूएसपी है। अमीरीबाई का दावा है कि ये इलाका देश के दूसरे रेड लाइट एरिया से ज्यादा साफ और सुंदर हैं। इस इलाके में रहने वाली सभी सेक्स वर्कर ने अपने घर को गुलाबी रंग से रंगा हुआ है। यहां पर साफ सफाई का इतना ध्यान रखा जाता है कि कोई भी अगर कहीं थूकने की कोशिश करता है या कूड़ा फेंकता है तो उसे वहां मौजूद लोग ऐसा नहीं करने देते। इलाके में सफाई बनी रहे इसलिए हर घर के दरवाजे पर कूड़ादान बनाया गया है ताकि लोग इधर उधर अपना कूड़ा ना फेंके। अमीरीबाई अपने संगठन के जरिये सभी त्योहार मनाती हैं। जिसमें यहां की लगभग सभी सेक्स वर्कर शामिल होती हैं। पिछले 10 सालों सेक्स वर्कर के लिए काम कर रही अमीरीबाई आज ना सिर्फ एचआईवी से जुड़ी जानकारी देती हैं बल्कि यहां रहने वाली महिलाओं की व्यवसायिक शिक्षा, रोजगार और दूसरे कामों के जरिये इस बदनाम पेशे से महिलाओं को बाहर निकालने में निरंतर जुटी हैं।

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