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13 साल की उम्र में बम ब्लास्ट में दोनों हाथ खोने वाली मालविका आज दुनिया को दे रही हैं प्रेरणा

मुश्किलों को मात देकर दुनिया के सामने नजीर बन रही हैं 28 वर्षीय मालविका...

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21st Feb 2018
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 जिंदगी हम सभी के सामने नई-नई चुनौतियां और मुश्किलें खड़ी करती रहती है। कुछ लोग इनसे डर के हार मान लेते हैं और अपना रास्ता बदल लेते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हर चुनौती का डटकर सामना करते हैं और मुश्किलों को मात देकर दुनिया के लिए नजीर बन जाते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत का नाम है मालविका अय्यर।

मालविका अय्यर (फोटो साभार- फेसबुक)

मालविका अय्यर (फोटो साभार- फेसबुक)


मालविका पहले पारंगत कथक नृत्यांगना थीं, लेकिन अब वह उतने अच्छे से डांस नहीं कर पाती हैं क्योंकि इस डांस में हाथों का मूवमेंट भी जरूरी होता है। पहले वह कंप्यूटर पर काफी तेजी से टाइपिंग किया करती थीं जो वह अब नहीं कर पातीं। 

जिंदगी हम सभी के सामने नई-नई चुनौतियां और मुश्किलें खड़ी करती रहती है। कुछ लोग इनसे डर के हार मान लेते हैं और अपना रास्ता बदल लेते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हर चुनौती का डटकर सामना करते हैं और मुश्किलों को मात देकर दुनिया के लिए नजीर बन जाते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत का नाम है मालविका अय्यर। 28 वर्षीय मालविका ने एक हादसे में अपने दोनों हाथ 13 साल की उम्र में खो दिए थे। वह अपने गैरेज के पास खेल रही थीं तभी पास की गोला बारूद की फैक्ट्री से एक ग्रेनेड आकर गिरा और जैसे ही मालविका ने उसे उठाने की कोशिश की वह फट गया। इसके बाद वह बुरी तरह जख्मी हो गईं।

मालविका को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने किसी तरह उन्हें बचा लिया, लेकिन उनकी दोनों हथेलियां इस हादसे में चली गईं। उनके पैरों में भी काफी गंभीर चोटें आईं। नसों में लकवा मार गया। शुरू के छह महीने उन्हें व्हीलचेयर पर बिताने पड़े। पैर को सही करने के लिए उसमें लोहे की रॉड डाली गई। पूरे 18 महीने तक वे अस्पताल में रहीं और सर्जरी होती रही। लेकिन वो ठीक हुईं और खुद से चलना शुरू किया। उन्होंने प्रोस्थेटिक हाथों के सहारे काम भी करना शुरू किया। इस वक्त वह 10वीं कक्षा में थीं और अपने स्कूल को काफी मिस करती थीं, लेकिन हालत से मजबूर थीं।

इस हालत में मालविका ने खुद को क्रैश कोर्श कोर्स में एनरोल कराया और काफी मेहनत से पढ़ाई की। एक राइटर की सहायता से वह बोर्ड एग्जाम में बैठीं और अच्छे नंबरों से बोर्ड एग्जाम क्वॉलिफाई किया। यह उनकी पहली जीत थी। उन्हें राज्य स्तर पर रैंक हासिल हुई। इसके बाद मालविका ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने अर्थशास्त्र में ग्रैजुएशन किया और उसके बाद सोशल वर्क में मास्टर। कॉलेज के शुरुआती साल काफी कष्टपूर्ण थे। वह बताती हैं, 'मैं हमेशा ऐसे लोगों से घिरी रहती थी जिनके जिंदगी में सब कुछ सही चल रहा होता और उन्हें मेरी तरह छोटी-छोटी चीजों के लिए संघर्ष नहीं करना होता था।'

वह बताती हैं, 'मैं हमेशा खुद को ढंककर रखती थी और अपने साथ हुए हादसे के बारे में बात नहीं करती थी। लेकिन मेरा परिवार मेरे साथ हर मौके पर पूरी मजबूती के साथ खड़ा रहा। उन्होंने मुझपर यकीन किया और हमेशा मेरी जीत को सेलिब्रेट किया।' मालविका ने दिव्यांगजनों के ऊपर शोध किया। उन्होंने पाया कि सभी दिव्यांग लोग खुद को दयनीय नहीं मानना चाहते। वे अपनी जिंदगी को बिना दया का पात्र बने जीना चाहते हैं। 2012 में उन्होंने फेसबुक के माध्यम से अपनी कहानी साझा कि जो कि काफी वायरल हुई। इसके बाद उन्हें TEDx talk में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया।

मालविका

मालविका


उन्हें यूनाइटेड नेशन के हेडक्वॉर्टर में बोलने के लिए भी बुलाया गया। आज वह पूरी दुनिया में 300 से अधिक स्पीच दे चुकी हैं। वह वर्ल्ड इकोनॉमिक्स फोरम में इंडिया इकोनॉमिक समिट के दौरान भी भाषण दे चुकी हैं। आज भी मालविका को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन वह पूरी शिद्दत के साथ हर मुश्किल का सामना करती हैं और दूसरों को भी अच्छा करने की प्रेरणा देती हैं। वह दिव्यांगजनों के प्रति लोगों की सोच बदलने पर काम कर रही हैं।

मालविका पहले पारंगत कथक नृत्यांगना थीं, लेकिन अब वह उतने अच्छे से डांस नहीं कर पाती हैं क्योंकि इस डांस में हाथों का मूवमेंट भी जरूरी होता है। पहले वह कंप्यूटर पर काफी तेजी से टाइपिंग किया करती थीं जो वह अब नहीं कर पातीं। वह फैशन डिजाइनर बनना चाहती थीं, लेकिन वक्त ने उनसे उनके ये सारे सपने छीन लिए। एक वक्त इन सारी चीजों के बारे में सोचकर मालविका को काफी दुख होता था और वह अपने कमरे में जाकर काफी देर तक रोती थीं। लेकिन उन्होंने खुद को समझाने की कोशिश की। उन्हें लगा कि और भी कई सारी चीजें हैं जिनमें वह बेहतर कर सकती हैं।

मालविका कहती हैं, 'मैं दुनिया को दिखाना चाहती हूं कि आप अपने आत्मविश्वास के सहारे कुछ भी हासिल कर सकते हैं। आप ही अपने भीतर की असली शक्ति होते हैं और दूसरा कोई आपके आत्मविश्वास को नहीं डिगा सकता। आप मुझे देखिए मैंने बिना हाथ के सहारे अपनी पीएचडी परी की है। आप सिर्फ ये समझिये कि बुरा वक्त या बुरा हादसा आपकी जिंदगी का सिर्फ एक हिस्सा हो सकता है उसे पूरी जिंदगी पर हावी मत होने दीजिए।' मालविका जिंदगी को काफी सकारात्मक रूप में लेती हैं और दूसरों को भी प्रेरित करती रहती हैं।

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