स्वदेशी टसर रेशम कीट के संरक्षण में मदद करेगी सुकिंदा माइन

By YS TEAM
May 24, 2016, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:17:15 GMT+0000
स्वदेशी टसर रेशम कीट के संरक्षण में मदद करेगी सुकिंदा माइन
ओडिशा में रेशम कीट की आठ प्रजातियाँ मिलती हैं। यहाँ सैकड़ों किसान अपनी आजीविका के लिए टसर की खेती करते हैं
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पीटीआई

ओडिशा के जाजपुर जिले स्थित टाटा स्टील की सुकिंदा क्रोमाइट माइन स्वदेशी रेशम कीट सुकिंदा इकोरेस के संरक्षण के लिए आगे आई है।

ओडिशा में रेशम कीट की आठ प्रजातियाँ मिलती हैं, जिनमें से सुकिंदा इकोरेस पर क्षेत्र के सैकड़ों किसान अपनी आजीविका के लिए निर्भर करते हैं क्योंकि इसके माध्यम से वो टसर की खेती करते हैं।

हालांकि, 2007 में जब से सुकिंदा की टसर पालक कोओपरेटिव सोसायटी ने सुकिंदा इकोरेस को पालना शुरू किया तब से इसे अन्य प्रजाति के तौर पर विरले स्वरूप में ही देखा जाता है जबकि उससे पहले डाबा टीवी प्रजाति ने इसे लगभग सभी खेतों से हटा दिया था।

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कंपनी ने एक बयान में कहा कि सुकिंदा इकोरेस प्रजाति के लिए सुकिंदा क्षेत्र उसका प्राकृतिक पर्यावास है, क्योंकि यहाँ पर जंगलात और मिट्टी का स्वरूप उसके लिए अधिक अनुकूल है।

ओडिशा कपड़ा निदेशालय और बारीपदा में केंद्रीय रेशम बोर्ड के क्षेत्रीय विस्तार केंद्र के तहत इस प्रजाति के संरक्षण के लिए सुकिंदा में पायलट प्रोजेक्ट सेंटर में विशेषज्ञ काम कर रहे हैं और सुकिंदा माइन ने भी इनके साथ इनके सरंक्षण के लिए हाथ मिलाया है।