संस्करणों
विविध

कोल्डस्टोर के लिये ओजोन अनुकूलित इंसुलेशन पैनल बनाकर पर्यावरण की रक्षा कर रहा है यह उद्यमी

14th Nov 2018
Add to
Shares
163
Comments
Share This
Add to
Shares
163
Comments
Share

वासुदेवन का कहना है कि उन्हें समय रहते ही यह महसूस हुआ कि भारत में कोल्डस्टोर और क्लैडिंग/आवरण (इंसुलेशन के लिये सामानों को एक-दूसरे के ऊपर लगाना) से जुड़े इंसुलेटेड पैनलों के बाजार को लेकर असीम संभावनाएं हैं।

एस वासुदेवन

एस वासुदेवन


कोलडस्टोर के क्षेत्र के अपने अनुभव का लाभ उठाने की नीयत के साथ वासुदेवन ने 2010 में वापस भारत का रुख किया और तमिलनाडु के विल्लीपुरम में पायनियर कोल्डस्टोर एंड क्लैडिंग की नींव रखी।

कंपनीः पायनियर कोल्डस्टोर एंड क्लैडिंग

संस्थापकः एस वासुदेवन

स्थानः विल्लीपुरम, तमिलनाडु

टर्नओवरः 47.5 करोड़ रुपये

एस वासुदेवन 2000 के दशक के प्रारंभ में दुबई में कोल्डस्टोरों के लिये इंसुलेटिड पैनलों और उनके सहायक उपकरणों की आपूर्ति का काम कर रहे थे। कोल्डस्टोर ठंडे तापमान वाला एक ऐसा कमरा या इमारत को कहते हैं जिसमें सामानों को बेहद कम तापमान पर जमा किया जाता है और यह अधिकांशतः आमतौर पर आयात/निर्यात केंद्रों के आसपास स्थित होते हैं।

वासुदेवन का कहना है कि उन्हें समय रहते ही यह महसूस हुआ कि भारत में कोल्डस्टोर और क्लैडिंग/आवरण (इंसुलेशन के लिये सामानों को एक-दूसरे के ऊपर लगाना) से जुड़े इंसुलेटेड पैनलों के बाजार को लेकर असीम संभावनाएं हैं।

पुराने समय को याद करते हुए वे कहते हैं, "उस समय मैं दुबई में एक ऐसी कंपनी के साथ कार्यरत था जो दुबई अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे, दुबई और शारजाह के सब्जी बाजार, दुबई इंडस्ट्रियल सिटी सहित कई प्रतिष्ठित परियोजनाओं को इंसुलेटिड पैनलों की आपूर्ति करती थी, लेकिन मैं वहां के अपने अनुभवों के आधार पर कुछ अलग और बिल्कुल अद्वितीय करना चाहता था।"

कोलडस्टोर के क्षेत्र के अपने अनुभव का लाभ उठाने की सोच के साथ वासुदेवन ने 2010 में वापस भारत का रुख किया और तमिलनाडु के विल्लीपुरम में पायनियर कोल्डस्टोर एंड क्लैडिंग की नींव रखी। वासुदेवन बताते हैं कि बीते वर्ष उनकी कंपनी ने कुल 47.5 करोड़ रुपये का कारोबार किया और वे प्रतिमाह 1,20,000 वर्ग मीटर इंसुलेटिड पैनलों का निर्माण करते हैं। वे अबतक अपने इस व्यवसाय में 13 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं और अब उत्तर भारतीय उपभोक्ताओं को लक्षित करने के उद्देश्य से इस क्षेत्र में भी एक नया उद्यम प्रारंभ करने की कोशिश में लगे हैं।

एसएमबी स्टोरी के साथ उनकी बातचीत के कुछ अंश:

अपकी कंपनी विभिन्न श्रेणियों में कैसे आगे बढ़ी और किस तरह विविधताओं को प्राप्त किया?

एस वासुदेवनः मैंने वर्ष 2008 में इस कंपनी की कल्पना की और वर्ष 2010 में कारखाने के निर्माण का काम शुरू किया। यह कारखाना चेन्नई से करीब 100 किलोमीटर दूर विल्लीपुरम जिले के टिंडीवनम के औद्योगिक एस्टेट में स्थित है। यह एक अत्याधुनिक उत्पादन क्षमता सुविधा से लैस कारखाना है जो आधुनिक आधारभूत संरचना और वृहद उत्पादन क्षमता रखती है।

यहां पर बड़ी मात्रा में और वह भी समय पर उच्चतम गुणवत्ता वाले औद्योगिक पैनलों का निर्माण किया जाता है और वह भी बिल्कुल आधुनिक और नवीनतम तकनीक का उपयोग करते हुए। इस विशेषता के दम पर ही हम इंसुलेशन पैनल, प्रोफाईल्ड कम्पोसिट पैनल, कैम लाॅक पैनल, इंसुलेटिड दरवाजे और वातानुकूलित/रेफ्रिजरेटिड ट्रक केबिन जैसे उत्पादों का निर्माण करने में सक्षम हैं। हम खाद्य और पेय पदार्थ, फार्मा, हेल्थकेयर, रसायन और विनिर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों को आपूर्ति करते हैं।

आपकी इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण मील के पत्थर कौन से रहे हैं?

एस वासुदेवनः वर्ष 2010 में कंपनी की स्थापना के बाद, हमने अपने व्यापार में पारदर्शिता के लिए एक एसएपी प्रणाली लागू की। उसके बाद, हमने एक स्वचालित उत्पादन लाइन स्थापित की और डन और ब्रैडस्ट्रीट इंडिया से एक एसएमई पुरस्कार के विजेता भी बने। इसके बाद, हमने अपने उपभोक्ताओं और बिक्री एवं रसद विभागों के लिए डिजिटल भुगतान, ऑर्डर ट्रैकिंग, एसएमएस सेवाएं, क्यूआर कोड और मोबाइल ऐप उपयोग में लाए। हम इन सभी को अपने सफर का मील का पत्थर मानते हैं। इस साल, हमने अपनी एक बिल्कुल नई तकनीक ‘पेंटीन’ भी लॉन्च की, जो हमारे उत्पादित पैनलों पर ओजोन की कोई परत नहीं छोड़ती है।

आप स्वयं को प्रतियोगिता से कैसे अलग मानते हैं?

एस वासुदेवनः इस समय बाजार में सात से आठ प्रमुख खिलाड़ी हैं, और हमारे पास बाजार की हिस्सेदारी का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा है। हम अपने त्वरित वितरण, अनुकूलित समाधान, वृहद क्षमता, और सभी विक्रेताओं को समय पर किये जाने वाले नियमित भुगतान के कारण औरों से बिल्कुल अलग हैं।

व्यापार को बनाए रखने और इसका विस्तार करने के मामले में आपके सामने क्या प्रमुख चुनौतियां हैं?

एस वासुदेवनः इस समय भारत के उत्तरी क्षेत्रों में अपने उत्पादों को पहुंचाने में बड़ी भौगोलिक दूरी और इस काम में आने वाली उच्च वितरण लागत हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इसी वजह से हम उत्तर भारत में भी विस्तार करने पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा, किसी भी नए खिलाड़ी को हमेशा बाजार की बदलती स्थितियों-परिस्थितियों और जोखिमों के प्रति सचेत रहना चाहिए। जब तक ऐसा होता है और एक कंपनी के पास गुणवत्ता वाले उत्पाद होते हैं, तो आप इस उद्योग में सफल हो सकते हैं। इसी के साथ, हम उम्मीद करते हैं कि सरकार निर्यात के क्षेत्र के लिये प्रचार को बढ़ावा देगी और लोहे एवं इस्पात की कीमतों को नियंत्रण में रखेगी।

अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद: निशांत गोयल

यह भी पढ़ें: गरीब दिव्यांगों को कृत्रिम अंग बांटने के लिए स्कूली बच्चों ने जुटाए 40 लाख रुपये

Add to
Shares
163
Comments
Share This
Add to
Shares
163
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags