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सिर्फ महिला कर्मचारी के भरोसे चलने वाले रेलवे स्टेशन का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

10th Jan 2018
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सेंट्रल रेलवे के जनरल मैनेजर डी के शर्मा की कोशिशों से सेंट्रल रेलवे ने 34 महिलाओं की नियुक्ति की थी। इस टीम में स्टेशन मैनेजर, पॉइंट पर्सन, बुकिंग स्टाफ, टिकट चेकर, आदि सभी महिलाएं हैं। 

फोटो साभार- टाइम्स ऑफ इंडिया

फोटो साभार- टाइम्स ऑफ इंडिया


12 जुलाई 2017 को माटुंगा रेलवे स्टेशन को औपचारिक रूप से महिला कर्मियों को सौंप दिया गया था। फिलहाल कुल 41 महिलाएं स्टाफ में शामिल हैं। इनका नेतृत्व स्टेशन मैनेजर ममता कुलकर्णी कर रही हैं। अब इस स्टेशन पर सिर्फ महिला कर्मचारी ही तैनात हैं।

हमें अक्सर महिला सशक्तिकरण के बारे में लंबी-चौड़ी बातें सुनने को मिलती हैं, लेकिन हकीकत में कितना अमल हो पाता है यह सबको पता है। सेंट्रल रेलवे ने इसे हकीकत में साकार करते हुए मुंबई के उपनगरीय माटुंगा रेलवे स्टेशन को पूरी तरह से महिलाओं के भरोसे कर दिया है। अब इस स्टेशन पर सिर्फ महिला कर्मचारी ही तैनात हैं। इसके लिए माटुंगा रेलवे स्टेशन को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी मिलने वाला है।

रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, 'हमें यह बताते हुए खुशी महसूस हो रही है कि सेंट्रल रेलवे के स्टेशन पर सिर्फ महिलाओं को तैनात करने के छह महीने बाद इसे लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स-2018 देने की घोषणा की गई है।' अधिकारी ने कहा कि इसका पूरा श्रेय सेंट्रल रेलवे के जनरल मैनेजर डी के शर्मा को जाता है जिन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने की मुहिम शुरू की। यह रेलवे स्टेशन पिछले साल 2017 में जुलाई से महिलाओं के भरोसे चल रहा है। भारत में यह अपनी तरह का अनोखा प्रयास था।

जनरल मैनेजर डी के शर्मा की कोशिशों से सेंट्रल रेलवे ने 34 महिलाओं की नियुक्ति की थी। इस टीम में स्टेशन मैनेजर, पॉइंट पर्सन, बुकिंग स्टाफ, टिकट चेकर, आदि सभी महिलाएं हैं। 12 जुलाई 2017 को औपचारिक रूप से स्टेशन को इन महिला कर्मियों को सौंप दिया गया था। फिलहाल कुल 41 महिलाएं स्टाफ में शामिल हैं। इनका नेतृत्व स्टेशन मैनेजर ममता कुलकर्णी कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि ममता जब 1992 में सेंट्रल रेलवे में आई थीं तब वह खुद भी मुंबई डिविजन में स्टेशन मास्टर बनने वाली पहली महिला थीं। यह स्टाफ पिछले 6 महीने से स्टेशन चला रहा है।

सेंट्रल रेलवे के सीपीआरओ सुनील उदासी ने बताया कि इस स्टेशन को विकसित करने के पीछे यही कारण था कि ऐसा माहौल बनाया जाए जहां महिलाएं अपने निजी और प्रफेशनल भले के लिए और संगठन के बारे में भी फैसले खुद करें। पुरुष यात्रियों से भी निपटने में अब यह स्टाफ पारंगत हो चुका है। एक टिकट चेकर ने बताया कि कभी-कभी रात की ड्यूटी में कुछ चुनौतियां आती हैं। असामाजिक तत्व, नशेबाज लोग कई बार स्टेशन के आसपास घूमते हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन की मदद से वह इस सब से आसानी से निपट पाती हैं।

यह भी पढ़ें: ट्रेनों को हादसे से बचाने के लिए हर जोन में ड्रोन कैमरे से निगरानी करेगा रेलवे

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