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न्यूयॉर्क से लौटकर गोरखपुर से शुरू किया स्टार्टअप, भूसे से तैयार करती हैं घर

5th Dec 2018
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श्रिति ने मुंबई या दिल्ली जैसे बड़े शहरों के बजाय अपने होमटाउन गोरखपुर से व्यवसाय की नींव रखने का फ़ैसला लिया। वह मानती हैं कि छोटे शहर के पढ़े-लिखे युवा भी अच्छे स्किल्स न होने की वजह से सही रोज़गार नहीं हासिल कर पाते।

श्रिति पांडे

श्रिति पांडे


स्टार्टअप को यूएन द्वारा 22वीं यूथ एसेंबली इम्पैक्ट चैलेंज पुरस्कार मिल चुका है। साथ ही, कंपनी ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप कॉनक्लेव में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जहां से कंपनी को फ़ंडिंग भी मिली। 

स्टार्टअप- स्ट्रॉक्चर ईको (Strawcture Eco)

जगह- गोरखपुर

शुरुआत- 2017

काम- ग्राहकों के लिए मनचाहा, उपयोगी, पर्यावरण के अनुकूल और किफ़ायती आवास तैयार करना

फ़ाउंडर- श्रिति पांडे

फ़ंडिंग- बूटस्ट्रैप्ड

श्रिति पांडे ने यूएस से कन्सट्रक्शन मैनेजमेंट में पोस्ट-ग्रैजुएशन किया है। पढ़ाई के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में एक कन्सलटेन्सी फ़र्म के साथ काम करना शुरू किया। कुछ समय बाद ही उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि यूएस में काम करते हुए वह सिर्फ़ अपनी सुविधाओं के लिए काम कर रही हैं जबकि वह कुछ ऐसा करना चाहती थीं, जिसके माध्यम से समाज के एक बड़े वर्ग का भला हो सके।

2016 में श्रिति ने तय किया कि वह भारत वापस लौटेंगी। उन्होंने एसबीआई यूथ फ़ेलोशिप में हिस्सा लिया और फ़ेलोशिप मिलने के बाद उन्हें सुदूर गांवों में काम करने का मौक़ा मिला। फ़ेलोशिप पूरी करने के बाद उन्होंने तय किया कि वह एक ऐसे स्टार्टअप की शुरुआत करेंगी, जिसके माध्यम से वह अपनी क्षमताओं और क़ाबिलियत को पूरी तरह से भुना सकें।

श्रिति ने मुंबई या दिल्ली जैसे बड़े शहरों के बजाय अपने होमटाउन गोरखपुर से व्यवसाय की नींव रखने का फ़ैसला लिया। वह मानती हैं कि छोटे शहर के पढ़े-लिखे युवा भी अच्छे स्किल्स न होने की वजह से सही रोज़गार नहीं हासिल कर पाते। वह ऐसे युवाओं के लिए मिसाल क़ायम करना चाहती थीं।

श्रिति बताती हैं कि उनकी टीम तेज़ी के साथ कम्प्रेस्ड ऐग्री-फ़ाइबर के पैनल्स और स्टील के स्ट्रक्चर आदि का इस्तेमाल करके मज़बूत घर तैयार करती है। इन पैनल्स को फ़सल के बाद बचने वाले अवशेष या भूसे से तैयार किया जाता है। श्रिति का दावा है कि उनकी टीम महज़ चार हफ़्तों में घर तैयार कर सकती है। स्ट्रॉक्चर ईको ने यूरोपियन कंपनी ईकोपैनली के साथ समझौता किया है।

श्रिति बताती हैं कि उनका उद्देश्य है कि भारत फ़सल के अवशेषों को जलने से बचाया जा सके ताकि पर्यावरण प्रदूषण पर भी नियंत्रण रखा जा सके। साथ ही, वह चाहती हैं कि लोगों को कम क़ीमतों में पर्यावरण के अनुकूल के घर मिल सकें और घरों के निर्माण में कम से कम वक़्त खर्च हो।

स्टार्टअप को यूएन द्वारा 22वीं यूथ एसेंबली इम्पैक्ट चैलेंज पुरस्कार मिल चुका है। साथ ही, कंपनी ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप कॉनक्लेव में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जहां से कंपनी को फ़ंडिंग भी मिली। स्ट्रॉक्चर ईको को अटल इनक्यूबेशन सेंटर, बनस्थली विद्यापीठ और आईआईएम बेंगलुरु विमिन स्टार्टअप प्रोग्राम द्वारा इनक्यूबेशन सपोर्ट मिल चुका है।

श्रिति ने एक विमिन ऑन्त्रप्रन्योर होने से जुड़ीं चुनौतियों का ज़िक्र करते हुए बताया कि वह कई ऐसे निवेशकों और इंडस्ट्री के लोगों से मिल चुकी हैं, जिन्हें उनकी क्षमताओं पर सिर्फ़ इसलिए शक था क्योंकि वह एक महिला थीं। वह बताती हैं कि कुछ लोगों ने तो उनसे यहां तक कहा कि उन्हें किसी पुरुष को को-फ़ाउंडर बनाना चाहिए ताकि निवेशक उनके आइडिया पर अधिक भरोसा जता सकें। लोग उनसे काम और उनके आइडिया से ज़्यादा उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में पूछते थे, लेकिन उनके परिवार और दोस्तों ने उनका पूरा साथ दिया और वह लोगों की परवाह किए बिना अपने आइडिया पर काम करती रहीं।

स्ट्रॉक्चर ईको की योजना है कि फसल के अवशेष से पैनल्स बनाने की तकनीक के माध्यम से किसानों को भी रोज़गार दे सकें। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से एक किसान एक एकड़ ज़मीन के बराबर भूसे से 25 हज़ार रुपए तक कमा सकता है और साथ ही, भूसे को जलाने की जद्दोजहद से भी बच सकता है।

श्रिति चाहती हैं कि उनकी तकनीक भी प्रधानमंत्री आवास योजना का हिस्सा बन सके और उनकी कंपनी भी 2022 तक सभी को अपना आवास उपलब्ध कराने के लक्ष्य में सरकार का सहयोग कर सके।

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