'पूर्ण ब्रह्मा' का खाना खाओगे, ब्रह्मांड भर में 'जयंती' के गुण गाओगे

    By Harish Bisht
    June 28, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
    'पूर्ण ब्रह्मा' का खाना खाओगे, ब्रह्मांड भर में 'जयंती' के गुण गाओगे
    जून, 2013 में पूर्ण ब्रह्मा की शुरूआतमराठी खाना बनाने में महारत
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    बात जब खाने की हो तो जहन में घर का खाना सबसे पहले आता है। इस बात को जयंती खतले से ज्यादा बेहतर कौन जान सकता है। जो बैंगलौर में पूर्ण ब्रह्मा खानपान सेवा चलाती हैं। जिनको क्षेत्रियों व्यंजनों को बनाने में खासी महारत हासिल है। खासतौर से मराठी व्यंजन वो काफी लज्जतदार बनाती हैं। जयंती के मुताबिक इसकी वजह है कि उनको खाना बनाना अच्छा लगता है। शायद यही कारण है कि मिशेलिन स्टार शेफ भी उनकी तरह बढ़िया खाना नहीं बना सकती।

    जयंती और उनका स्टॉफ

    जयंती और उनका स्टॉफ


    जयंती इंफोसिस में प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर काम कर चुकी हैं लेकिन खाना बनाना उनके लिए पैशन है जिसको पूरा करने के लिए उन्होने नौकरी को छोड़ दिया। संयुक्त परिवार में जन्म लेने वाली जयंती साल 2004 में बेंगलौर आई। जब वो यहां पर नौकरी कर रही थी तो उन्होने घर के बने मोदक बनाकर outkut के माध्यम से बेचने शुरू किये। साल भर के दौरान उनका काम काम चल निकला और उनके बनाये मोदक की तारीफ करने लगे। नौकरी के साथ काम इतना शानदार चल निकला था लेकिन जयंती के भाग्य में कुछ और ही लिखा था।

    साल 2006 में उनके पति का तबादला ऑस्ट्रेलिया हो गया। इस वजह से उनको भी अपने पति से साथ वहां जाना पड़ा। लेकिन उन्होने वहां भी अपने शौक को जिंदा रखा। भारतीय समुदाय के बीच उनकी बनाई मिठाइयां दूसरे देशी व्यंजन काफी प्रसिद्ध होने लगे। इसके साथ साथ वो यहां पर एक छोटी सी कंपनी इंपेक्ट डॉटा में भी काम कर रही थी। साल 2008 में भारत लौटने के बाद जयंती ने मराठी खाना बनाने का काम फिर शुरू कर दिया और पहले बच्चे के जन्म के बाद उन्होने इंफोसिस में नौकरी शुरू कर दी।

    नौकरी के साथ साथ उन्होने कैटरिंग का काम भी जारी रखा। जयंती के मुताबिक दीवाली के मौके पर जब मिठाइयों की काफी मांग होती है तब उन्होने घरों में खाना पहुंचाने का काम शुरू कर दिया। इसके लिए जयंती ने कुछ अलग हटकर काम करने का मॉडल तैयार किया। इस मॉडल के मुताबिक जो जवान लोग होते वो खुद आकर जयंती के पास आकर खाना ले जाते जबकि जो बुजुर्ग लोग होते उनके लिये जयंती खुद खाना भिजवाने का इंतजाम कराती। इसके अलावा वो काफी वक्त अपने ग्राहकों के साथ बातचीत में भी लगाती। ताकि वो उनके विचार जान सकें।

    जयंती के बनाये खाने की तारीफ हर जगह हो रही थी कि अचानक एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि साइड बिजनेस के तौर पर वो जो काम कर रही थी उसे उन्होने और गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। उस दिन एक बुजुर्ग ने उनको फोन कर दिवाली के लिए कुछ खाने का सामान का ऑर्डर किया। तब जयंती ने उस बुजुर्ग से कहा कि वो खुद उनके घर तक सारा सामान पहुंचा देंगी लेकिन वो बुजुर्ग नहीं माने और वो उनके घर आ गए। जैसे ही जयंती ने उनके लिए दरवाजा खोला वैसे ही सीधे वो कमरे में आ गए और जयंती को अपर्णा के नाम से पुकारने लगे। वो इस बात से भी दुखी थे कि जयंती ने उनको पानी और खाने के लिए नहीं पूछा। इससे जयंती के पति भी थोड़ा सकपकाये और उन्होने उनको समझाने की कोशिश की। इसके बाद दोनों ने उस बुजुर्ग को शांत किया और उनकी कहानी सुनी। वो एक रिटायर्ड आईएएफ ऑफिसर थे। उनके दो लड़के थे जो शादी के बाद अमेरिका में ही बस गए। 18 सालों से उन्होने अपने बच्चों से मुलाकात नहीं की थी। जब वो बुजुर्ग अपनी कहानी जयंती को बता रहे थे तो साथ ही साथ वो रो भी रहे थे। जयंती ने जब उनसे पूछा कि कभी आप वहां गये तो उन्होने कहां हां वो गये थे लेकिन उनको वहां ठीक नहीं लगा इसलिए वो वापस लौट गए। उन्होने बताया कि पिछले 40-45 सालों से उनकी पत्नी दीवाली के मौके पर लड्डू बनाती हैं लेकिन गठिया होने के कारण अब वो बिस्तर पर हैं। लेकिन उन्होने जयंती के घर के खाने की बात सुनी तो वो यहां अपनी पत्नी के लिए कुछ सामान खरीदने के लिए आये हैं।

    इसके बाद जब जयंती और उनके पति उस बुजुर्ग को घर छोड़ने गये तो उनकी पत्नी ने घर का दरवाजा खोला और उनसे बात की। जयंती के पति ने जब उन लोगों से बोला कि जब आपके बेटे आपके पास नहीं आते तो आप ही लोग क्यों नहीं वहां चले जाते तो उस बुजुर्ग की पत्नी ने बोला कि वो कैसे अपनी सास जिनकी उम्र 106 साल की है छोड़कर जा सकती हैं। उस रात जयंती और उनके पति को इतना बुरा लगा कि उन्होने खाना भी नहीं खाया। उन दोनों ने तय किया कि वो लोगों में खुशिया बांटेंगे इसके लिए वो क्षेत्रिय व्यंजन को प्राथमिकता देंगी ताकि लोगों को अपनापन महसूस हो।

    इस घटना के बाद जयंती ने तय किया कि जो लोग अपने परिवार से दूर रहते हैं उन तक वो क्षेत्रिय व्यंजनों का स्वाद पहुंचाएंगी। इसके लिए जयंती ने पूर्ण ब्रह्मा की शुरूआत की। ये वो वक्त था जब इन लोगों को कंपनी की ओर से बोनस मिलना था। तब इनके पति ने इनसे पूछा कि वो उनको क्या लाकर दे एक हीरे का हार या नई कार। लेकिन जयंती ने इनकी जगह पूर्ण ब्रह्मा खोलने का विचार दिया।

    जून, 2013 में पूर्ण ब्रह्मा को शुरू किया गया। इसके लिए वो अपने पैतृक गांव से एक बावर्ची ले आईँ। अब ये अलग अलग संस्कृतियों के अलग अलग त्यौहार के मौके पर खास पकवान बनाती हैं। फिर चाहे वो वेलेंटाइन्स डे हो या फिर रक्षाबंधन। इसके अलावा हर रोज वो विभिन्न पकवानों से सजी खास तरह की थाली बनाती हैं। जयंती का कहना है कि अपने सपनों को पूरा करना चाहिए उनको मारना नहीं चाहिए, कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि सच्चाई की ही जीत होती है।

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