संस्करणों
विविध

सिर्फ 125 रुपये में शुरू किया मसाले का बिजनेस, आज विदेशों में मचा रही हैं धूम

राजस्थानी सास और बहू की बदौलत देश के मसाले विदेशों में बिखेर रहे हैं अपने स्वाद की खुशबू...

17th Nov 2017
Add to
Shares
2.1k
Comments
Share This
Add to
Shares
2.1k
Comments
Share

लक्ष्मी के घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, ऊपर से जवान बेटे के असमय देहांत के बाद मानों उन पर ग़मों का पहाड़ टूट पड़ा। इसी विपदा की घड़ी से उनकी सफलता की नींव पड़ी।

पुरस्कृत होतीं लक्ष्मी और उनकी बहू अनुराधा

पुरस्कृत होतीं लक्ष्मी और उनकी बहू अनुराधा


साल 2000 का वक्त था उस वक्त आज के जैसे शॉपिंग के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट नहीं मौजूद थीं। वे मसाले तैयार करके नजदीकी मार्केट में बेच देती थीं। शुरुआत में तो मेहनत काफी ज्यादा पड़ती थी और उस अनुपात में मुनाफा बेहद कम।

जब इंटरनेट का युग आया और सबके हाथों में स्मार्टफोन आने लगे तो अनुराधा ने तकनीक की अहमियत को समझते हुए इसके जरिए कारोबार करना शुरू किया। आज उनके मसाले देश के विभिन्न शहरों के अलावा दुबई जैसे शहरों में भी बिकने के लिए जाते हैं।

कहते हैं कि अगर सपनों को हकीकत में बदलने की चाहत हो तो मेहनत के बलबूते कुछ भी हासिल किया जा सकता है। इस बात की मिसाल हैं राजस्थान के नागौर की दो महिलाएं। रिश्तों में सास और बहू ने मिलकर अपनी काबिलियत के दम पर मजबूरियों को पस्त कर दिया। ये कहानी है 68 साल की लक्ष्मी और उनकी बहू अनुराधा की। दरअसल लक्ष्मी के घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, ऊपर से जवान बेटे के असमय देहांत के बाद मानों उन पर ग़मों का पहाड़ टूट पड़ा। इसी विपदा की घड़ी से उनकी सफलता की नींव पड़ी।

उन्होंने घर से नाम सिर्फ 125 रुपयों से स्वयं सहायता समूह के जरिए मसालों का कारोबार शुरू किया। शुरुआत काफी छोटी थी, लेकिन मकसद सिर्फ यही था कि उन्हें दो वक्त की रोटी ढंग से मिल सके और घर का गुजारा हो सके। साल 2000 का वक्त था उस वक्त आज के जैसे शॉपिंग के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट नहीं मौजूद थीं। वे मसाले तैयार करके नजदीकी मार्केट में बेच देती थीं। शुरुआत में तो मेहनत काफी ज्यादा पड़ती थी और उस अनुपात में मुनाफा बेहद कम। लेकिन लक्ष्मी और उनकी बहू अनुराधा ने हार नहीं मानी और अपने प्रयास में लगी रहीं।

इसी तरह उन्होंने अपना कारोबार बढ़ाया और एक वक्त ऐसा भी आया कि प्रदेशभर में उनके मसालों की तारीफ होने लगी। वे राजस्थान में लगने वाले कृषि और उत्पाद मेलों में अपने मसालों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए जाती थीं। इसके बाद जब इंटरनेट का युग आया और सबके हाथों में स्मार्टफोन आने लगे तो अनुराधा ने तकनीक की अहमियत को समझते हुए इसके जरिए कारोबार करना शुरू किया। आज उनके मसाले देश के विभिन्न शहरों के अलावा दुबई जैसे शहरों में भी बिकने के लिए जाते हैं।

अनु-कलेक्शन नाम से बनाए महिला-पुरुष के दो अलग वॉट्सऐप ग्रुप के माध्यम से वे घरेलू खाद्य उत्पाद की बिक्री ऑर्डर पर पार्सल के माध्यम से बिक्री कर रही है। जिंदगी के इस पड़ाव पर आकर तमाम कठिनाइयों का सामना करने वाली लक्ष्मी कहती हैं कि खुद पर विश्वास रखो, तो कोई परेशानी बड़ी नहीं होती। वे कहती हैं कि अंदरूनी शक्ति जगा ली जाए, तो कोई भी आपदा आपको कमजोर नहीं कर सकती। इस उम्र में भी जुझारूपन से लैस लक्ष्मी उन तमाम उद्यमियों के लिए मिसाल हैं जो किसी कारण से हार मान जाते हैं। लक्ष्मी की कहानी उन सब के लिए किसी ज्योति से कम नहीं है जो खुद का काम शुरू करना चाहते हैं।

यह भी पढ़ें: जो कभी करती थी दूसरों के घरों में काम, अब करेगी देश की संसद को संबोधित

Add to
Shares
2.1k
Comments
Share This
Add to
Shares
2.1k
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags