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मिलिए 89 साल पुराने फैमिली बिजनेस को एक नई पहचान देने वाली लावन्या से

हार्वर्ड पासआउट लावन्या ने इस तरह संभाल लिया अपना फैमिली बिज़नेस...

15th Dec 2017
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नल्ली सिल्क साड़ी के परिवारिक व्यवसाय में शामिल होने वाली 33 वर्षीय लावन्या परिवार की पहली महिला हैं, जिन्होंने थोड़ी सी अवधि में ही अपनी योग्यता साबित कर 650 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले नल्ली सिल्क के कई नए स्टोर स्थापित कर कंपनी को और बड़ा बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, आईये जानें कि कब और कैसे शुरू हुआ था साड़ियों का ये सफर...

लावन्या (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

लावन्या (फोटो साभार- सोशल मीडिया)


 करीब नौ दशक बाद आज नल्ली सिल्क रेशम एक बड़ा ब्रांड है, जिसके पूरे देश में और विदेशों में 32 स्टोर हैं। इनमें से दो संयुक्त राज्य अमेरिका और सिंगापुर में हैं। परिवार ने 2012 में रिटेल ज्वैलरी में भी हाथ आजमाए हैं।

लावन्या अब बेंगलुरु में बस गई हैं। वे न केवल नल्ली के विकास पर ध्यान केंद्रित करने में व्यस्त हैं बल्कि अपने सात महीने के बेटे रुद्र की भी समान रूप से देखभाल करती हैं। 

लावन्या नल्ली के ग्रेट ग्रांड फादर नल्ली चिन्नासामी चेट्टी ने 1800 के अंत में चेन्नई में रेशम साड़ियों की बिक्री शुरू की। वे अपने शहर कांचीपुरम से साइकिल पर साड़ी लादकर लाते थे और 70 किलोमीटर दूर चेन्नई में बेचते थे। तब चेन्नई को मद्रास के नाम से जाना जाता था। 1928 में उन्होंने चेन्नई के टी नगर में एक छोटा रिटेल स्टोर खोला। करीब नौ दशक बाद आज नल्ली सिल्क रेशम एक बड़ा ब्रांड है, जिसके पूरे देश में और विदेशों में 32 स्टोर हैं। इनमें से दो संयुक्त राज्य अमेरिका और सिंगापुर में हैं। परिवार ने 2012 में रिटेल ज्वैलरी में भी हाथ आजमाए हैं।

परिवार के व्यवसाय में शामिल होने वाली पहली 33 वर्षीय महिला लावन्या ने थोड़ी सी अवधि के भीतर अपनी योग्यता साबित कर 650 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले नल्ली सिल्क के नए स्टोर स्थापित करने और कंपनी के राजस्व में वृद्धि करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लावन्या कहती हैं "मेरे पिता शुरू में मेरे बारे में बहुत ही परस्पर विरोधी थे कि मैं व्यवसाय में शामिल हो या नहीं। जैसा कि मैं इसका एक हिस्सा बनने के लिए दृढ़ थी और व्यापार चलाने की बारीकियों को जानने की कामना करती थी फिर उन्होंने सहमति व्यक्त की।" लावन्या ने 2007 में एक उप-ब्रांड नल्ली नेक्स्ट लॉन्च किया।

नल्ली नेक्स्ट लॉन्च करने का विचार उन छोटे ग्राहकों के साथ उनकी बातचीत को ध्यान में रखते हुए आया जो उनके स्टोरों में आया करते थे। लावन्या को ग्राहकों से पता चला कि उनके बीच आम धारणा यह थी कि नल्ली शादी की साड़ी या रेशम की साड़ियों की दुकान मात्र है इसमें युवा लोगों के लिए कुछ नहीं है। लावन्या का मानना है कि डिजाइनर साड़ियों का उनका संग्रह नोटिस नहीं किया गया। वे कहती हैं "ग्राहक सीधे रेशम साड़ी सेक्शन में जाते हैं और हमारे अन्य संग्रहों को देखे बिना खरीदारी पूरी कर लेते।" हालांकि इसके बाद लावन्या ने बिजनेस को बेहतर समझने के लिए ग्राहकों के व्यवहार की स्टडी करना शुरू किया। रिसर्च के दौरान उन्होंने चेन्नई में अपने प्रमुख स्टोर के चौकीदार से पूछा कि वास्तव में कितने दुकानदार खरीदारी करने के बाद नल्ली बैग में क्या ले जाते हैं।

अपने स्टोर में लावन्या

अपने स्टोर में लावन्या


लावन्या का अनुमान सही साबित हुआ। वे कहती हैं कि "हमने पाया है कि भले ही युवा लड़कियां अपने माता-पिता के साथ खरीददारी करने आई लेकिन उन्होंने स्वयं के लिए कुछ भी नहीं खरीदा था।" यहीं से नल्ली नेक्स्ट लॉन्च करने का आइडिया लावन्या के अंदर आया और फिर उसने युवाओं के अंदर से स्टीरियोटाइप को तोड़ दिया। लावन्या कहती हैं "इस अवधारणा का परीक्षण करने के लिए मैंने चेन्नई में अलवरपेट में छोटी दुकान खोलकर एक शुरुआत की थी। इसमें फायदा हुआ, जिसके बाद हमने बेंगलुरु और मुंबई में दो और दुकानें खोली।"

नल्ली में लावन्या का पहला कार्यकाल 2005 से 2009 तक था। जब उन्होंने कंप्यूटर विज्ञान में अन्ना विश्वविद्यालय से स्नातक किया था। उस अवधि में नल्ली की आय 44 मिलियन डॉलर से 100 मिलियन डॉलर तक दोगुनी से भी ज्यादा हो गई और दुकान की संख्या 14 से बढ़कर 21 हो गई। लावन्या ने एमबीए करने के लिए समय निकाला और 2009 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल ज्वाइन कर लिया। हार्वर्ड से स्नातक होने के बाद उन्होंने मैक्किंसे एंड कंपनी में शिकागो में तीन साल तक काम किया। हार्वर्ड में लावन्या की मुलाकात आईआईटी कानपुर के एक छात्र अभय कोठारी से हुई। दोनों का 2011 में विवाह हो गया और शिकागो चले गए जहां लावन्या ने मैकिन्से और अभय ने बोज एंड कंपनी ज्वाइन कर ली।

इस दंपति ने बड़े पैमाने पर यात्रा की और सोमवार से शुक्रवार तक एक दूसरे से दूर रहे। ऐसा तीन साल तक चलता रहा। कुछ क्वालिटी टाइम एक साथ बिताने के लिए दोनों ने छुट्टी लेने का फैसला किया और कुछ यात्रा करने के बाद वापस भारत आ गए। 2014 में भारत लौट आने के बाद लावन्या रेवेन्यू और शॉपिंग के अनुभव के उपाध्यक्ष के रूप में एक फैशन पोर्टल मैन्न्रा डॉट कॉम में शामिल हुई। लावन्या खुलासा करते हुए कहती हैं कि "जब मैं वापस आ गई तो मेरी एक मित्र से मुलाकात हुई जो बेंगलुरु में फ्लिपकार्ट के साथ था। चूंकि मैं उपभोक्ता और रिटेल को लेकर काफी पैसनेट हूं, इसलिए उसने सुझाव दिया कि मैं मंत्रा (Myntra) में ज्वाइन कर लूं, जो कि फ्लिपकार्ट द्वारा अधिग्रहण कर लिया गया।"

हालांकि लावन्या ने मंत्रा ज्वाइन तो कर लिया लेकिन ज्यादा दिन तक काम नहीं किया और 2015 के अंत में उन्होंने मंत्रा को छोड़ दिया और ई-कॉमर्स और ओमनीचैनेल प्लेटफार्म का नेतृत्व करने वाले उपाध्यक्ष के रूप में नल्ली में फिर से शामिल हो गईं। वह कहती हैं कि "मेरे पिताजी जो मेरी इंजीनियरिंग के बाद परिवार के व्यापार में शामिल होने पर खुश नहीं थे, इस समय काफी खुश नजर आ रहे थे।"

लावन्या

लावन्या


नल्ली ने तीसरी पीढ़ी के कुप्पस्वामी चेट्टी के नेतृत्व में बड़ी वृद्धि देखी, जिन्होंने 1956 में बिजनेस को संभाला। बाद में, लावन्या के पिता रामनाथन नल्ली उनके साथ शामिल हो गए और चेन्नई से परे नल्ली सिल्क्स के दिल्ली और मुंबई में आउटलेट खोलने लगे। लावन्या कहती हैं कि "व्यापार अच्छी तरह से चल रहा था, मेरे पिता को एहसास हुआ कि हर जगह अवसर थे और 80 के दशक के अंत में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए करने का फैसला किया। उनके इस अनुभव ने व्यापार को स्केल करने में बहुत अधिक मदद की।"

लावन्या अब बेंगलुरु में बस गई हैं। वे न केवल नल्ली के विकास पर ध्यान केंद्रित करने में व्यस्त हैं बल्कि अपने सात महीने के बेटे रुद्र की भी समान रूप से देखभाल करती हैं। उनके पति अभय ने एक एंड-टू-एंड कोल्ड सप्लाई चेन सॉल्यूशन के निर्माण में अपना खुद का व्यवसाय स्थापित किया है।

लावन्या कहती हैं "दशकों पहले, 1940 के दशक में मेरे ग्रेट ग्रांड फादर ने हमारे उत्पादों पर छूट की पेशकश के मॉडल को नहीं अपनाने का फैसला किया। उन्होंने जो निर्णय लिया था वह हमारे बिजनेस को सही रूप से चलाने में हमें मदद करता है। नल्ली में काफी कुछ बदलाव मैं ला रही हूं, लेकिन पीढ़ियों से निर्मित व्यापार के मूल मूल्य हमेशा वही रहेंगे जो हमारे बुजुर्गों ने स्थापित किए थे।"

यह भी पढ़ें: आखिर क्यों करोड़ों की सैलरी पाने वाली पूर्व एसबीआई चीफ को सोना पड़ा जमीन पर!

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