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राखी चावला, दीवानगी मैथ्स की और काम एडुप्रेन्योर का

Sahil
20th Aug 2015
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एक सॉफ्टवेयर रिसर्च इंजीनियर से एक मां और वहां से एक एडुप्रेन्योर- राखी चावला के अब तक के सफर का ये सारांश है।

एमटेक के लास्ट सेमेस्टर के दौरान उन्हें हैदराबाद में एक जानी-मानी एमएनसी से आकर्षक जॉब का ऑफर मिला और अगले एक महीने में विकास के साथ उनकी सगाई हो गई। दोनों की अब शादी हो चुकी है। चूंकि वह स्लमबर्गर (Schlumberger) में जॉब करते थे, इसलिए उन्होंने हैदराबाद में अपना करियर शुरू करने और उनकी छुट्टियों के दौरान उनसे मिलना तय किया।

अपने बेटे के जन्म के बाद राखी नोएडा शिफ्ट हो गईं जो उनके होमटाउन आगरा के नजदीक है। उन्होंने वहां करीब एक साल तक काम किया, इसी दौरान उनके पति की वापस इंडिया में पोस्टिंग हो गई। राखी बताती हैं- “मेरे सामने दो विकल्प थे। या तो सबकुछ छोड़कर उनके साथ दुनिया का सफर करूं या अपने होमटाउन चले जाऊं और ब्रेक लेकर अपने बेटे के बड़े होने का लुत्फ उठाऊं। मैंने दूसरे विकल्प को चुना।”

उन्होंने ग्रेजुएशन, इंजीनियरिंग और एमबीए लेवल पर मैथमेटिक्स और कंप्यूटर साइंस के गेस्ट लेक्चरर के रूप में काम करना शुरू कर दिया। राखी ने एजुकेशन सिस्टम में रिसर्च का फैसला किया। वह बताती हैं- “मैंने तब ही एजुकेशन के खराब हालात को महसूस किया। स्टूडेंट्स बगैर कुछ महत्वपूर्ण सीखे, सिर्फ मार्क्स और डिग्री पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे।” उन्होंने करीब दो साल तक अलग-अलग तरह की मेथडोलॉजी के साथ टीचिंग पर हाथ आजमाया मगर वह कहती हैं कि स्टूडेंट्स एक ही ढर्रे की पढ़ाई के इस कदर आदी हो चुके थे कि इनोवेटिव मेथड्स का भी उन पर कोई असर नहीं पड़ता था। राखी ने महसूस किया कि असल समस्या प्राइमरी और सेकेंडरी (आठवीं क्लास तक) लेवल तक है। जब स्टूडेंट नौवीं क्लास में जाता है तो पैरेंट्स, स्कूल, कोचिंग सेंटर्स सब एकाएक उसे नोटिस करते हैं। एडुप्रेन्योर राखी बताती हैं- “उस समय छात्र पर बड़ी आकांक्षाओं और प्रीमियर इंस्टीट्यूट्स में दाखिले के इंट्रेंस एग्जामिनेशन का जबरदस्त दबाव होता है।”

राखी को सिस्टम में सुधार के लिए स्मार्ट टीचर्स, स्मार्ट मेथडोलॉजिज और स्मार्ट माइंड्स की जरुरत का अंदाजा हो चुका है।

इस तरह अपने गृहनगर आगरा में ईडी3डी की स्थापना के साथ वह एक एंटरप्रेन्योर बन गई। वह ईडी3डी की फाउंडर और सीईओ हैं। उनका वेंचर हायर क्लासेज के स्टूडेंट्स को प्रत्येक ‘कठिन’ सबजेक्ट के बेसिक कॉन्सेप्टस से परिचित कराने की एक कोशिश है। Ed3d में मैथमेटिक्स और लॉजिक, कंप्यूटर्स और साइंस के लिए तीन लैब हैं।

राखी बेगिनर्स लेवल पर मैथमेटिक्स के लिए इंट्रोडक्शन प्रोग्राम बनाया है जो विजुअल, टेक्टाइल और एक्सपेरिमेंटल मेथड्स पर आधारित हैं। 2013 के अंत तक उनके पास पांच साल से 13 साल के बच्चों के लिए एक कोर्स स्ट्रक्चर तैयार था। राखी का बेटा भी उनके मकसद में मददगार साबित होता है। वह चाहती हैं कि वह सीखे, एक्सप्लोर करे, रिसर्च करे, एक्सपेरिमेंट करे, असफल और सफल हो।

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मैथमेटिक्स से प्यार करने वाली राखी ने खुद को इस विषय के लिए समर्पित कर दिया

राखी ने आगरा से ही मैथ और कंप्यूटर में अपनी बीएससी और एमएससी को कंप्लीट किया। कॉलेज के दिनों में ही वह मुंबई यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित आईआईटी मुंबई में हुए एमटीटीएस (मैथमेटिक्स ट्रेनिंग एंड टैलेंट सर्च प्रोग्राम) के लिए चयनित हुई। ये एक महीने भर का कोर्स था जिसमें मैथमेटिक्स के देश भर के प्रतिभावान छात्र हिस्सा ले रहे थे। राखी कहती हैं- “शहर से बाहर अकेले मेरा ये पहला कदम था। मुझे अब भी याद है कि कैसे मेरी मां मेरे अकेले जाने पर रोई थीं। लेकिन हकीकत में वह मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वॉइंट था जो मुझे मैथमेटिक्स के और करीब ले गया।” उसके बाद वह एक रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए आईआईटी कानपुर चली गईं। फिर उन्होंने एमटेक किया और जीएटीई इंट्रेंस एग़्जामिनेशन की तैयारी करना शुरू कर दिया। राखी ने बगैर किसी कोचिंग के खुद ही इसकी तैयारी की। फिर भी उनकी जीएटीई एग्जाम में ऑल इंडिया रैंकिंग 66 आई।

Ed3D की यूएसपी

इस वेंचर का जो सबसे इनोवेटिव पहलू है वो ये है कि यहां बच्चों की ग्रुपिंग उनके ग्रेड्स या एज के आधार पर नहीं होती बल्कि उनकी लर्निंग कैपेबिलिटिज, एप्टीट्यूड और रुचियों को ध्यान में रखकर होती है। राखी कहती हैं- “प्रत्येक बच्चे में अलग-अलग क्षमताएं होती हैं और उनमें से सभी से किसी विषय में एक तरह की पकड़ की उम्मीद बेमानी है। हमने बच्चों की क्लास लेवल के आधार पर उनकी बेसिक आईक्यू लेवल और गणितीय तर्क को जांचने के लिए एक इंट्रेंस टेस्ट डिजाइन किया है। इन दो सालों में हमें आश्चर्य हुआ कि हमने ऐसे 50 टेस्ट कंडक्ट किये मगर सिर्फ 4 फीसदी बच्चे ही अपने क्लास लेवल के टेस्ट को पास कर सकें। टेस्ट में छात्रों का एवरेज मार्क 3.5 था।”

इसलिए स्टूडेंट्स को तब तक एक लेवल नीचे रखा गया जब तक कि वो विश्वास के साथ टेस्ट पास नहीं कर लेते। इसके बाद ही वे फंडामेंटल्स पर काम करना शुरू करते थे। राखी कहती हैं- “इस रिपेयरिंग और मेंडिंग प्रॉसेज में समय तो लगता है मगर इसके रिजल्ट काफी शानदार हैं।” उन्होंने हाल ही में फ्लिप्ड क्लासरूम कल्चर भी शुरू किया है जहां स्टूडेंट्स अपने असाइंड वीडियो के देखते हैं जिससे उन्हें और ज्यादा सोचने, चर्चा करने और प्रॉबल्म-सॉल्विंग में काफी मदद मिलती है।

चुनौतियां और समर्थन

पेरेंट्स को न्यू मेथड्स को आजमाने के लिए कनविंस करना रेखा के इस पूरे सफर का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा था। Ed3D ने शहरी छात्रों के लिए कोडिंग को भी इंट्रोड्यूस किया। राखी मुस्कुराते हुए कहती हैं- “हालांकि मेरे मां-बाप शुरुआत में थोड़े हिचक रहे थे और वो मेरे आकर्षक जॉब को छोड़कर एक एजुकेशन वेंचर शुरू करने के फैसले को लेकर कुछ सशंकित थे। मगर उन्होंने कभी भी अपना सपोर्ट वापस नहीं लिया। मेरे सास-ससुर भले ही बहुत दूर रहते हैं मगर उन्होंने भी कभी मेरे बिज शेड्यूल्स को लेकर कभी कोई शिकायत नहीं की। यहां तक कि मुझे कभी-कभी 20 घंटे नॉन-स्टॉप काम करना पड़ा मगर उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। और सबसे बड़ी बात ये कि मेरा 6 साल का बेटा भी मुझे अच्छी तरह समझता है और अपने साथ बीतने वाले मेरे हर लम्हे को अमूल्य बना देता है।” उनके पति के साथ-साथ Ed3D की पूरी टीम से भी उन्हें शानदार सपोर्ट मिलता है।

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