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कुछ ही सालों में यूजलेस हो जाएंगे एटीएम और क्रेडिट कार्ड: अमिताभ कांत

13th Nov 2017
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नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि आने वाले 3 से 4 सालों में डेबिट, क्रेडिट कार्ड और एटीएम बेकार हो जाएंगे और लोग वित्तीय लेनदेन के लिए मोबाइल फोन्स का इस्तेमाल करेंगे।

अमिताभ कांत

अमिताभ कांत


कांत ने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां एक अरब बायॉमीट्रिक और इतने ही मोबाइल फोन्स व बैंक अकाउंट हैं और इसलिए सिर्फ यह देश कई बदलाव लाएगा।

 नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी की पिछले दिनों डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजे गए कांत ने कहा, 'भारत अगले 3-4 सालों में क्रेडिट-डेबिट कार्ड्स और एटीएम को तकनीकि रूप से अनावश्यक बना देगा।' 

जब से कैशलेस इकॉनमी बनाने के लिए सरकार ने काम करना शुरू किया है तब से नई-नई अटकलें लगाई जाती हैं। किसी का मानना है कि इतनी जल्दी इसे सफलता नहीं मिलने वाली तो कोई यह मानता है कि बहुत जल्द ही बाजार से कैश का चलन खत्म हो जाएगा। इस बार नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि आने वाले 3 से 4 सालों में डेबिट, क्रेडिट कार्ड और एटीएम बेकार हो जाएंगे और लोग वित्तीय लेनदेन के लिए मोबाइल फोन्स का इस्तेमाल करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि भारत में 72 फीसदी जनसंख्या 32 वर्ष से कम आयु की है और यह डेमोग्राफिक डिविडेंट के मामले में अमेरिका और यूरोप के मुकाबले एक अडवांटेज होगा। नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी की पिछले दिनों डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजे गए कांत ने कहा, 'भारत अगले 3-4 सालों में क्रेडिट-डेबिट कार्ड्स और एटीएम को तकनीकि रूप से अनावश्यक बना देगा। हम लेनदेन के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करेंगे।'

कांत ने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां एक अरब बायॉमीट्रिक और इतने ही मोबाइल फोन्स व बैंक अकाउंट हैं और इसलिए सिर्फ यह देश कई बदलाव लाएगा। मोबाइल से वित्तीय लेनदेन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा, 'भारत करीब 7.5 फीसदी की गति से आगे बढ़ रहा है और दुनियाभर में बंजर आर्थिक परिदृश्य के बीच हरियाली है, लेकिन हमारी चुनौती और 9-10 फीसदी की गति से विकास हासिल करना है।' उन्होंने कहा कि भारत एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है जोकि इतिहास में कभी-कभी ही होता है।

अमिताभ कांत ने कहा कि भारत की 72 फीसदी आबादी 32 साल से कम की है और 2040 तक हमारी जनसंख्या जवान और जवान होती जाएगी, जबकि अमेरिका और यूरोप की आबादी बूढ़ी और बूढ़ी होती जाएगी। हमें ऐसे समाज की जरूरत है जो हमेशा कुछ नया करे और यह बदलाव लाएगा।' उन्होंने कहा कि अब स्मार्टफोन और तेज स्पीड इंटरनेट हर किसी की पहुंच में है। इससे आने वाले समय में कैशलेस इकॉनमी बनाने में काफी मदद मिलेगी। 

यह भी पढ़ें: बिजनेस शुरू करने के लिए बेच दिया घर, आज करोड़ों की कंपनी के मालिक

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