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सुप्रीम कोर्ट का बेहतरीन फैसला, दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक

9th Oct 2017
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दिल्ली व उसके आस-पास के इलाकों में लगातार बढ़ते प्रदूषण की वजह से अर्जुन गोपाल और दो अन्य बच्चों की तरफ से वकील पूजा धर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई गई थी, कि पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई जाए।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक कुछ शर्तों के साथ हटाई थी। अपने उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में पटाखों की बिक्री के लिए पुलिस की निगरानी में लाइसेंस दिए जाएं। 

सरकार की तरफ से पक्ष रखने वाले वकील ने कहा है कि रोक सिर्फ पटाखे बेचने पर लगी है, इस्तेमाल पर नहीं। इस बार दिवाली 19 अक्टूबर को है और इसका मतलब है कि पटाखों का फूटना काफी कम होगा।

देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली को इस फैसले से काफी राहत मिलेगी। पिछले साल पटाखों की वजह से हुए प्रदूषण से कई दिनों तक वातावरण में धुंध छाई हुई थी और लोगों को सांस लेने व गाड़ी चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। हालांकि पटाखे फोड़ने पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन किसी भी तरह के पटाखों को बेचने पर 31 अक्टूबर तक पाबंदी लगा दी गई है। इससे दूसरे राज्यों से लाकर दिल्ली में पटाखे तो फोड़े जा सकेंगे, लेकिन जानकारों का कहना है कि इससे पटाखे फोड़ने में काफी कमी आएगी।

दिल्ली व उसके आस-पास के इलाकों में लगातार बढ़ते प्रदूषण की वजह से अर्जुन गोपाल और दो अन्य बच्चों की तरफ से वकील पूजा धर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई गई थी कि कोर्ट 12 सितंबर के अपने उस आदेश को वापस ले जिसमें कोर्ट ने शर्तों के साथ दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक हटाई थी। जस्टिस ए. के. सीकरी की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का 12 सितंबर का वह आदेश 1 नवंबर से लागू होगा। उस आदेश में अस्थायी तौर पर स्टे हटाने और पटाखों की बिक्री का आदेश देने की बात कही गई थी।

कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक कुछ शर्तों के साथ हटाई थी। अपने उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में पटाखों की बिक्री के लिए पुलिस की निगरानी में लाइसेंस दिए जाएं। फैसले में अधिकतम 500 अस्थाई लाइसेंस ही देने की बात कही गई थी। सरकार की तरफ से पक्ष रखने वाले वकील ने कहा है कि रोक सिर्फ पटाखे बेचने पर लगी है, इस्तेमाल पर नहीं। इस बार दिवाली 19 अक्टूबर को है और इसका मतलब है कि पटाखों का फूटना काफी कम होगा।

इस अहम फैसले में कोर्ट ने कहा कि दिवाली के बाद इस फैसले से हुए प्रभाव का अवलोकन किया जाएगा और देखा जाएगा कि पटाखों पर बैन के बाद हवा की हालात में कुछ सुधार हुआ है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि 1 नवंबर के बाद पटाखों की बिक्री फिर से शुरू की जा सकती है। इस फैसले के प्रभावी होने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में पटाखा बेचने वाले दुकानदारों को दिए नए और पुराने दोनों ही लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।

इसी महीने वायु प्रदूषण पर नजर रखने वाली केंद्र सरकार की एजेंसी 'सफर' (सिस्टम ऑफ एयर क्वॉलिटी ऐंड वेदर फॉरकास्टिंग ऐड रिसर्च) ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में हवा की क्वॉलिटी खराब हो गई है और अगले कुछ दिनों में हालात और खराब होंगे। वायु गुणवत्ता सूचकांक के खराब होने का मतलब है कि लोग यदि ऐसी हवा में लंबे समय तक रहें तो उन्हें सांस लेने में दिक्कतें हो सकती है। हालांकि पहले पटाखा बेचने के लाइसेंस जारी कर दिए गए थे, जिसकी वजह से दुकानदारों ने अपना स्टॉक भर लिया था। अब कोर्ट के इस फैसले से उन्हें घाटा सहना पड़ेगा।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में 11 नवंबर 2016 को एक फैसला सुनाया था जिसमें सभी पटाखे बेचने वालों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। कोर्ट के उस आदेश को बहाल करने की अपील की गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि दिवाली के मौके पर प्रदूषण की मार झेलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन बढ़ती दिक्कतों को देखते हुए इसमें सुधार की जरूरत है। इसके पक्ष में कई लोगों का कहना है कि धार्मिक उत्सव के मौके पर खुशी जताने के लिए पटाखों की बिक्री के लिए छूट दे दी जानी चाहिए, लेकिन हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि परंपराओं के पहले पहले हमारी जिंदगी और पर्यावरण भी है।

यह भी पढ़ें: अमेरिका में लाखों की नौकरी छोड़कर चेन्नई में करोड़ों का स्टार्टअप खोलने वाली अश्विनी अशोकन

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