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उत्तराखंड में एडवेंचर स्पोर्ट्स पर लगी पाबंदी हटी, ऋषिकेश में फिर शुरू होगी राफ्टिंग

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14th Sep 2018
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अब ऋषिकेश में गंगा नदी में रिवर राफ्टिंग और टिहरी झील में वॉटर स्पोर्ट्स फिर से शुरू हो सकेगा। हालांकि कोर्ट ने आदेश दिया है कि इसका संचालन नियमों के मुताबिक ही होना चाहिए।

तस्वीर साभार- अलकनंदा रिवर राफ्टिंग

तस्वीर साभार- अलकनंदा रिवर राफ्टिंग


 कोर्ट ने कोई सही नीति न होने की वजह से यह पाबंदी लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके बाद सरकार ने नई नीति बनाई और राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद इस नीति को पेश किया गया। 

कुछ दिन पहले उत्तराखंड में वॉटर और एडवेंचर स्पोर्ट्स पर हाई कोर्ट ने पाबंदी लगा दी थी। इससे रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग करने के ख्वाब पालने वाले पर्यटकों में मायूसी छा गई थी। लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस रोक को हटा लिया है। यानी अब ऋषिकेश में गंगा नदी में रिवर राफ्टिंग और टिहरी झील में वॉटर स्पोर्ट्स फिर से शुरू हो सकेगा। हालांकि कोर्ट ने आदेश दिया है कि इसका संचालन नियमों के मुताबिक ही होना चाहिए।

दरअसल कोर्ट ने कोई सही नीति न होने की वजह से यह पाबंदी लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके बाद सरकार ने नई नीति बनाई और राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद इस नीति को पेश किया गया। उत्तराखण्ड में राफ्टिंग व बंजी जंपिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स काफी बड़े पैमाने पर होते रहे हैं। गंगा नदी समेत तमाम नदियों में इन गतिविधियों का संचालन किया जाता है। बीते 21 जून को हाईकोर्ट नैनीताल ने राज्य सरकार को रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य पानी से जुड़े खेलों के लिए उचित नियम और नीति बनाने के निर्देश दिए थे, तब से प्रदेश में इन खेलों पर रोक लगा दी गई थी।

इस फैसले से साहसिक खेलों के व्यवसाय से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया था। सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो गई थी। अगस्त में उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने संशोधित नियमावली का मसौदा तैयार कर इसका प्रस्ताव कैबिनेट में रखा था। कैबिनेट से 'उत्तराखण्ड रिवर राफ्टिंग/क्याकिंग संशोधन नियमावली-2018' को मंजूरी मिलने के बाद अब राज्यपाल बेबी रानी मार्या ने इसे मंजूरी दे दी है। नई नियमावली में जो प्रमुख संशोधन हैं उनमे राफ्टिंग के दौरान धूमपान और किसी भी प्रकार के नशे के सेवन प्रतिबंधित किया है ।नदी तटों पर उपलब्ध राजस्व व वन भूमि में किसी प्रकार की पर्यटन गतिविधि के संचालन भूमि आवंटन से पहले पर्यटन विभाग से अनुमति लेनी होगी।राफ्टिंग तकनीकी समिति नदियों के दोनों किनारों पर राफ्ट नदी में उतारने व निकालने के स्थल चिह्नित करेगी।

हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मद्देनजर गंगा में प्रदूषण रोकने को राफ्टिंग ढुलान में प्रयुक्त होने वाले वाहन नदी तट से 100 मीटर दूर रखेंगे।अब 65 साल की उम्र तक राफ्टिंग का लुत्फ उठाना संभव हो सकेगा। पहले यह आयु सीमा 14 से 60 साल निर्धारित थी।16 फुट लंबी राफ्ट में आठ पर्यटक और दो गाइड ही बैठ पाएंगे।इसी प्रकार 14 फुट की राफ्ट के लिए दो गाइड समेत कुल आठ रहेगा संख्या। तय की गई है।प्रत्येक नदी में विशेष अभियानों के लिए अलग से अनुमति लेनी होगी।

यह भी पढ़ें: केरल बाढ़: पानी में लेटकर सीढ़ी बन जाने वाले मछुआरे को गिफ्ट में मिली 10 लाख की कार

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