संस्करणों

मोटी महिलाओं को होता है ब्रेस्ट कैंसर का ज्यादा खतरा

22nd Aug 2017
Add to
Shares
0
Comments
Share This
Add to
Shares
0
Comments
Share

मोटे जानवरों में दुबले जानवरों की तुलना में अधिक ट्यूमर कोशिकाएं होती है, विशेष रूप से संवेदनशील एण्ड्रोजन रिसेप्टर्स ज्यादा होते हैं, जिससे इन कोशिकाओं में हार्मोन टेस्टोस्टेरोन की वृद्धि होती है। 

<b>सांकेतिक तस्वीर</b>

सांकेतिक तस्वीर


जिस तरह से कई स्तन कैंसर एस्ट्रोजेन रिसेप्टर्स के साथ अपने विकास को बढ़ावा देते है उसी तरह मोटापे से ग्रस्त चूहों में ट्यूमर एण्ड्रोजन रिसेप्टर्स की वजह से कैंसर के लक्षण ज्यादा दिखे।

 ऐसी हजारों महिलाऐं जो मोटापे से परेशान हैं उनको इस इलाज से फायदा होगा। साथ ही कम या गैर-एस्ट्रोजन वातावरण में स्तन कैंसर को बढ़ावा मिलने से भी निजात मिलेगी।

जर्नल हार्मोन्स एंड कैंसर में प्रकाशित एक अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि मोटापे से ग्रसित महिलाओं में स्तन कैंसर होने की संभावनाएं अधिक होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मोनोपॉज के बाद ऊतक एस्ट्रोजेन का निर्माण करते हैं और यही एस्ट्रोजन ट्यूमर के विकास को बढ़ावा देता है। इस अध्ययन में मोटे चूहों के माध्यम से ये दिखाया गया है कि मोटापे वाले शरीर में स्तन कैंसर ज्यादा जल्दी होने की सम्भावना होती है। मोटे जानवरों में दुबले जानवरों की तुलना में अधिक ट्यूमर कोशिकाएं होती है। विशेष रूप से संवेदनशील एण्ड्रोजन रिसेप्टर्स ज्यादा होते हैं, जिससे इन कोशिकाओं में हार्मोन टेस्टोस्टेरोन की वृद्धि होती है। जिस तरह से कई स्तन कैंसर एस्ट्रोजेन रिसेप्टर्स के साथ अपने विकास को बढ़ावा देते है उसी तरह मोटापे से ग्रस्त चूहों में ट्यूमर एण्ड्रोजन रिसेप्टर्स की वजह से कैंसर के लक्षण ज्यादा दिखे।

क्या हैं इस रिसर्च के मायने

अध्ययन से जुड़े एक शोधकर्ता के मुताबिक, हमारा मूल लक्ष्य मोटापे और स्तन कैंसर का एक मॉडल बनाना था जो महिलाओं की हालत को दिखाता हो। हम मॉडल को देखकर यह जानते है कि इस पहलू ने हमें एंटी-एस्ट्रोजन उपचार के बाद कैंसर की प्रगति की रिसर्च करने के लिए एक शानदार मौका दिया है क्योंकि इन चूहों में वसा कोशिकाएं एस्ट्रोजेन नहीं करती हैं, वे मानव स्तन कैंसर के रोगियों जैसे एस्ट्रोजेन को हटाने के लिए इलाज कर रहे हैं। इन जांचकर्ताओं और उनकी टीम ने यह पता लगाया है कि मोटोपे से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है।

कितना फायदा मिलेगा इस परिणाम से

अमेरिका की लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं मोटापे से ग्रस्त है और लगभग 75 प्रतिशत स्तन कैंसर एस्ट्रोजेन-रिसेप्टर पॉजिटिव हैं। जिनमें से ज्यादातर का इलाज एंटी-एस्ट्रोजन थेरेपी से किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि ऐसी हजारों महिलाओं जो मोटोपे से परेशान है उनको इस इलाज से फायदा होगा। साथ ही कम या गैर-एस्ट्रोजन वातावरण में स्तन कैंसर को बढ़ावा मिलने से भी निजात मिलेगी।

एन्ड्रोजन रिसेप्टर्स और उनके हार्मोन पार्टनर टेस्टोस्टेरोन, सीयू कैंसर सेंटर में काम करते हैं और लंबे समय से प्रोस्टेट कैंसर के चालकों के रूप में पहचाने जाते हैं। ये कई तरह के स्तन कैंसर में एक ड्राइवर के रूप में एण्ड्रोजन को निस्तारण कर रहे हैं। जब वेल्बर्ग और सहकर्मियों ने मोटे चूहों का इलाज एंटी-एंड्रोजन दवा एंजाल्टामाइड के साथ किया, तो पाया यह गया कि पहले वाला ट्यूमर सिकुड़ गया और नए ट्यूमर पनपने में विफल रहे।

जितना ज्यादा शुगर उतना ज्यादा नुकसान

एंडरसन कहते हैं कि जब आप दुबले और मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों के बारे में बात करते है तो उसमें आप इंसुलिन, उच्च शर्करा, और सूजन की बात करते है। इस एण्ड्रोजन रिसेप्टर संवेदनशीलता के कारण हो सकता है कि आप इन अंतरों के माध्यम से जान सकते हैं। समूह ने पहले यह दिखाया था कि सूजन का एक साइटोकिन के स्तर जिसे इंटरलेक्लिन 6 (आईएल -6) कहा जाता है, दुबले चूहों की तुलना में मोटापे वाले चूहों में अधिक है। 

वर्तमान समय में इस ग्रुप का कहना है कि आईएल -6 को स्तन कैंसर की कोशिकाओं में पेश करने से एण्ड्रोजन रिसेप्टर्स की गतिविधि को बढ़ाया जाता है। सूजन का मसला आईएल -6 के उच्च स्तर के साथ जुड़ा हुआ है। आईएल -6 एण्ड्रोजन रिसेप्टर्स को संवेदनशील करता है। संवेदनशील एण्ड्रोजन रिसेप्टर्स के वृद्धि संकेतों को बढ़ाते हैं जो कम एस्ट्रोजन उपलब्धता के वातावरण में भी स्तन कैंसर को बढ़ावा देते हैं।

यह भी पढ़ें: अब इंसानों में अंग प्रत्यारोपण करना होगा और सुरक्षित

Add to
Shares
0
Comments
Share This
Add to
Shares
0
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags

Latest Stories

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें