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21 साल के अमित हैं देश के नंबर वन युवा उद्यमी, पीएम मोदी कर चुके हैं सम्मानित

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16th Aug 2017
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अमित का जीवन चुनौतीपूर्ण और दुख दर्द से भरा हुआ था। वो एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार से हैं। उनकी मां और पिताजी ने जीवित रहने के लिए बहुत संघर्ष किया और उनके सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा प्रेरित किया और शायद मां-पिता की मेहनत का ही नतीजा है कि आज अमित देश के नंबर वन युवा उद्यमी बन गये हैं।

अमित अग्रवाल

अमित अग्रवाल


21 साल के लड़के ने किया एक ऐसा इनोवेशन, कि बन गया देश का सबसे युवा आंत्रेप्रेन्योर।

अमित के इनोवेशन 'अपकार्ट' ने पहाड़ी इलाकों में सामान को ऊपर चढ़ाने की समस्या को हद से ज्यादा कम कर दिया है। अब तक पहाड़ी रास्तों पर वजनी सामानों को चढ़ाना काफी दुरूह और मंहगा काम हुआ करता था।

जलपाईगुड़ी के एक छोटे से गांव में रहने वाले लड़के ने अपने कौशल से पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। इस लड़के का नाम है अमित अग्रवाल। अमित की उम्र केवल 21 साल है। अमित को भारत के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने नंबर वन युवा उद्यमी के खिताब से नवाजा है और ये खिताब उन्हें खुद प्रधानमंत्री मोदी ने दिया। अमित के इनोवेशन 'अपकार्ट' ने पहाड़ी इलाकों में सामान को ऊपर चढ़ाने की समस्या को हद से ज्यादा कम कर दिया है। अब तक पहाड़ी रास्तों पर वजनी सामानों को चढ़ाना काफी दुरूह और मंहगा काम हुआ करता था।

कौन हैं अमित

अमित एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार से हैं। नियति ने अपना खेल खेला और पढ़ाई पूरी होने के बाद अमित को एक अच्छी और टिकाऊ नौकरी नहीं मिली। अमित का स्कूल उनके घर से 108 किलोमीटर दूर था। जब वो दूसरी कक्षा में थे तबसे ही उनके पिता सुबह 5 बजे उठकर उन्हें अपने स्कूटर पर एक बस तक छोड़कर आते थे। और अमित को ये बस पहुंचाती थी एक जीप के पास। ये जीप ही अमित को उनके स्कूल तक पहुंचाती थी। अमित ने हर रोज स्कूल जाने के लिए ऐसा ही किया। अमित का जीवन चुनौतीपूर्ण और दुख दर्द से भरा हुआ था। अमित के मुताबिक, मेरी मां और पिताजी ने जीवित रहने के लिए बहुत संघर्ष किया और मेरे सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा प्रेरित किया।

क्या है अपकार्ट

अपकार्ट न केवल सीढ़ियों से भार और भारी चीज की समस्या को हल करता है बल्कि अन्य उद्देश्यों को भी पूरा करता है। इसमें एक एर्गोनोमिक हैंडल है जो पूरे 360 डिग्री पर घूमता है। इसकी ट्रॉली के भीतर बना रैक एक मिनी अलमारी के रुप में काम करता है। इसकी ट्राई स्टार व्हील मैकेनिज्म, इसे किसी भी सतह पर काम करने के लिए कामयाब बनाता है। यह सीढ़ियों या चट्टानी इलाके में अच्छे से काम करता है। इसमें एक बटन है, जो एक लॉक के रुप में काम करता है। इसमें चार अलमारियां इनबिल्ट हैं, जिसमें एक पेयजल के लिए, एक लैपटॉप ट्रे, एक बड़ा कपड़े का बैग, एक जूता- चप्पल बैग है। यह एक ऐसा तंत्र है जो सामान को अच्छे से जमाए रखता है साथ ही बजट के हिसाब से अधिक किफायती भी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें एक इनबिल्ट ट्रैकिंग सिस्टम है जो इसे इस्तेमाल करने वाले के फोन से जुड़ा होता है ताकि कोई अपने सामान को सुरक्षित रूप से ट्रैक कर सकता है।

जब अपकार्ट ने लिया जन्म

अमित उन दिनों की बात याद करते हुए बताते हैं, 'एक बार की बात है, मेरी मां एक यात्रा से लौटी थीं। हमें उनका सामान ऊपर की ओर ले जाना था लेकिन यह मां के लिए मुश्किल था और मेरे लिए भी। इसलिए इस छोटे से काम के लिए एक रिक्शा चालक को बुलाया और इस काम के लिए भारी कीमत भी चुकानी पड़ी। उसने मुझसे कहा कि अगर सूटकेस के पहिये होते तो सामान को ढोने में आसानी होती। और हम इस तरह का कोई अविष्कार नहीं कर सकते। मैं उस वक्त तो चुप रहा लेकिन मेरी रणनीति चुप रहने और उन लोगों की बात सुनने की नहीं थी। लेकिन घर पहुंचते ही मैंने दुरूह पहाड़ी रास्तों पर सामान ढोने के लिए परिवहन विकल्पों पर काम करना शुरू कर दिया। लोगों ने मेरे इस काम के लिए आलोचना शुरू कर दी। वो मेरा मजाक उड़ाते थे कि इतने सालों से सामान ऐसे ही ढोया जा रहा है, तुम जाने क्या नया कर दोगे। मैं उनकी बातें एक कान से सुनता और दूसरे कान से निकाल देता। मेरा एक ही मकसद था, सामान की ढुलाई के लिए सस्ते और आसान साधनों का आविष्कार। मेरे लिए घण्टे दिनों में बदल गए और दिन हफ्तों में बदल गए। अंत में अपकार्ट को एक मूर्त उत्पाद रूप में बदल दिया।'

जब अमित के विचार ने आकार लेना शुरू किया था, तब उसके मन में कुछ आशंकाएं भी थीं। जैसे कि वह परिवार के खिलाफ इस कदम की ओर बढ़ रहा है तो वो सही है या नहीं। इस मामूली सी साधन कंपनी को शुरु करना उचित होगा या नहीं, इतनी कम उम्र में उसका यह सोचना ठीक है या नहीं आदि। अमित ने उस वक्त अपने दिमाग को समझाया, 'अपनी इच्छा शक्ति को पूरा करने के लिए मुझे अपने मन में चल रही इन आशंकाओं को दूर करना होगा और आगे बढ़ना होगा।'

2016 की बात है, अमित ने NASSCOM ई-शिखर सम्मेलन जीतने के लिए प्रयास शुरू कर दिए। अपने कॉलेज के माध्यम से, उन्होंने वैश्विक उद्यमिता सप्ताह में भाग लिया, जो कि कौशल विकास और उद्यमिता के मेक इन इंडिया अभियान द्वारा शुरू किया गया था। मंच वैश्विक उद्यमिता नेटवर्क (जेन) द्वारा प्रदान किया गया था। प्रस्तुतियों और साक्षात्कार के साथ-साथ तीन सप्ताह के समय में कई चरण थे। अमित भारत के 21,08,000 प्रतिभागियों में से 112 स्थान पर था।अमित के लिए प्रस्तुति एक चुनौतीपूर्ण काम था। दो महीने तक लगातार मेहनत करने के बाद अमित ने ये मुकाम हासिल किया। अगले ही हफ्ते अमित के साथ आश्चर्य करने वाली घटना हुई जब उन्हें सरकार से एक आधिकारिक पत्र मिला जिसमें उन्हें 28 सितंबर 2016 को राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सम्मानित करने के लिए 'भारत के शीर्ष 10 युवा उद्यमी' में शामिल किया।

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अमित उस पल को याद करते हुए बताते हैं, 'मुझे मंत्रालय से अचानक कॉल आया और कहा गया कि अंतिम रैंकिंग के लिए 10 मिनट के भीतर एक ऑनलाइन समूह साक्षात्कार होगा। घबराहट में, मैंने लॉग इन किया और अपना सबसे अच्छा दिया। अगली सुबह 9: 33 में, मुझे सबसे पहले रैंकिंग के रूप में मुझे बधाई देने के लिए एक कॉल मिला।

अमित को मंत्रालय से क्षेत्रीय स्तर पर सत्कार मिला और 1 करोड़ रुपये का निवेश करने का आश्वासन दिया। अमित का उत्पाद अब तैयार है और पेटेंटिंग के लिए भेजा दिया गया है। बाजार में इस उत्पाद की कीमत अनुमानत: लगभग 2,000 रुपए है।

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