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ट्रक पर चलने वाला सिनेमा: अब गांव के लोग सिर्फ 35 रुपये में देख सकेंगे फिल्में

दिल्ली से हुई शुरुआत...

29th May 2018
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 आज सिर्फ शहरों में ही अच्छे मल्टीप्लेक्स और सिनेमाहॉल्स हैं। गांवों और कस्बों में आज भी लोग फिल्में देखने से वंचित रह जाते हैं। दुखद बात यह है कि दूर गांवों तक इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच भी उतनी सुलभ नहीं है।

इसी तरह के ट्रकों पर सिनेमाहॉल को ले जाया जाएगा

इसी तरह के ट्रकों पर सिनेमाहॉल को ले जाया जाएगा


ये सिनेमाहॉल्स ट्रकों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह बड़ी आसानी से लाए और ले जाए जा सकते हैं। इन्हें मोबाइल डिजिटल मूवी थियेटर (MDMT) का नाम दिया गया है। उनकी योजना देशभर में इन सिनेमाहॉलों को भेजने की है।

भारत सिनेप्रेमियों का देश है। देश में हर साल विभिन्न भाषाओं में बनने वाली 1,000 से ज्यादा फिल्में इस बात की गवाह हैं। सिनेमा की प्रगति एक वक्त देश में अपने उफान पर थी और यही वजह थी कि सुदूर छोटे-छोटे कस्बों में भी सिनेमाहॉल खुल गए थे। लेकिन मल्टीप्लेक्स के जमाने में सिनेमाहॉलों के बनने का सिलसिला रुक सा गया। आज सिर्फ शहरों में ही अच्छे मल्टीप्लेक्स और सिनेमाहॉल्स हैं। गांवों और कस्बों में आज भी लोग फिल्में देखने से वंचित रह जाते हैं। दुखद बात यह है कि दूर गांवों तक इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच भी उतनी सुलभ नहीं है। इस स्थिति को बदलने के लिए मशहूर बॉलिवुड फिल्म डायरेक्टर सतीश कौशिक ने चलते फिरते सिनेमा को लॉन्च कर दिया है।

ये सिनेमाहॉल्स ट्रकों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह बड़ी आसानी से लाए और ले जाए जा सकते हैं। इन्हें मोबाइल डिजिटल मूवी थियेटर (MDMT) का नाम दिया गया है। उनकी योजना देशभर में इन सिनेमाहॉलों को भेजने की है। इससे गांव के लोग भी आसानी से फिल्में देख पाएंगे। गांव के लोगों को फिल्में देखने के लिए अपनी जेब न ढीली करनी पड़े इसलिए टिकट के दाम 35 रुपये से लेकर 75 रुपये रखे गए हैं। इन थियेटर्स को इस तरह से डिजाइन किया गया है जिससे ये आसानी से कहीं भी लगाए जा सकते हैं। खास बात ये है कि इनके भीतर एयर कंडीशन भी लगा हुआ है।

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ये थिएटर सभी मौसमों के अनुकूल हैं। इसमें करीब 150 लोगों के बैठने की व्यवस्था भी की गई है। इन्हें काफी कम वक्त में कहीं भी लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक ऐसे कुल 35 थिएटर्स तैयार गए गए हैं। आने वाले समय में इनकी संख्या 150 हो जाएगी। दिलचस्प बात ये है कि इन थियेटर्स को अलग-अलग नाम दिए गए हैं जो कि मशहूर फिल्मों के नाम पर हैं। जैसे- किसी थिएटर का नाम मिस्टर इंडिया रखा गया है तो किसी का नाम बाहुबली। शाहंशाह, डॉन नाम वाले थिएटर भी हैं।

कहीं भी लग जाने वाला सिनेमा

कहीं भी लग जाने वाला सिनेमा


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस प्रॉजेक्ट की सराहना करते थियेटर्स का उद्घाटन किया। इस पहल के पीछे उद्यमी सुशील चौधरी का हाथथ है। वे 'पिक्चर टाइम' कंपनी के फाउंडर हैं। ये कंपनी इन थिएटर्स को संचालित कर रही है। इस पहल के बारे में बात करते हुए सतीश कौशिक ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, 'ये थिएटर्स सिर्फ फिल्म के लिए ही नहीं बल्कि शैक्षणिक और सरकारी क्रियाकलापों के लिए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। अगर नेता दिल्ली में भाषण दे रहें हों तो इन थिएटर्स के माध्यम से वे अपनी पहुंच सुदूर तक स्थापित कर सकते हैं।'

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