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घाटी में स्टार्टअप संस्कृति को रोशनी दिखाई दो युवाओं ने, बनाया ‘पाइप’ एप्प

2nd Dec 2015
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‘‘घाटी में निरंतर संघर्ष और अस्थिरता के दौर के चलते अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से श्रम बाजार पर एक बहुत ही नाटकीय प्रभाव पड़ा है। इसके चलते युवाओं में कुछ विशेष प्रकार के रोजगारों को लेकर एक सामाजिक-सांस्कृतिक धारणा और झुकाव का माहौल बना है। उदाहरण के लिये सरकारी कर्मचारियों को हड़ताल या फिर कफ्र्यू के दौरान का भी भुगतान मिलता है जिसके चलते सरकारी नौकरी को ‘स्थिर’ माना जाता रहा है। अगर हम सिक्के का दूसरा पहलू देखें तो उद्यमशीलता और निजी क्षेत्र की नौकरियां जोखिम भरी होने के अलावा अस्थिर भी हैं। लगातार चल रहे संघर्ष और अस्थिरता और हमारी मौजूदा शिक्षा प्रणाली और रोजगार के बाजार के बीच की असमानता किसी भी स्टार्टअप की वृद्धि और विकास में सबसे बड़ी बाधा है। हालांकि तकनीकी स्टार्टअप कश्मीर के अनूठे स्टार्टअप पारिस्थितिकीतंत्र को एक बेहतरीन मौका प्रदान कर रहे हैं। विफल होने पर एक तकनीकी स्टार्टअप किसी औद्योगिक या फिर उत्पादक स्टार्टअप के मुकाबले कम नुकसान से रूबरू होता है। ऐसे में हम आने वाले दिनों में घाटी में और अधिक तकनीकी स्टार्टअप के सामने आने की उम्मीद कर रहे हैं जो कश्मीर में स्टार्टअप संस्कृति के निर्माण में काफी सकारात्मक कदम साबित होगा।’’ यह कहना है कश्मीर घाटी में एक तकनीकी स्टार्टअप संचालित कर रहे दो युवाओं आबिद राशिद लोन और ज़ुबेर लोन का।

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कश्मीर के बाशिन्दे ये दो युवा ‘पाइप’ नाम की एक एप्लीकेशन लेकर सामने आए हैं जिसकी मदद से उपयोगकर्ता एक दूसरे को सूचनाएं, मैसेज और लिंक अपनी पसंद से आसानी से भेज सकते हैं। इस एप्प के बारे में बताते हुए ज़ुबेर कहते हैं, ‘‘पाइप विभिन्न उपकरणों और प्लेटफार्मों से जुड़े लोगों के बीच समान रूप से जानकारी साझा करने पर अपना ध्यान केंद्रित करता है और वह भी रियल टाइम में। साथ ही हम यह भी समझते हैं कि वर्तमान समय में लोगों को सिर्फ वहीं सूचना और संदेश चाहिये होते हैं जो उनके काम के होते हैं या जिनमें उनकी रुचि होती है। पाइप अपने उपयोगकर्ताओं को इस बात की आजादी प्रदान करता है कि वे आसानी से उन लोगों का चुनाव कर सकते हैं जिनके संदेश और जानकारियां उन्हें चाहियें।’’

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आगे जानकारी देते हुए वे बताते हैं, ‘‘पहले आपको मैसेज, ईमेल और सोशल नेटवर्किंग संदेशों के एक वृहद जाल में से अपने काम के और अपनी पसंद के संदेशों इत्यादि को चुनने के लिये बहुत ऊर्जा और समय लगाना पड़ता था। हमारी ‘पाइप’ एप्प की सहायता से उपयोगकर्ता वास्तविक समय में सिर्फ अपने स्मार्ट फोन के माध्यम से तत्काल ही महत्वपूर्ण और उपयोगी सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार से यह उपयोगकर्ता का बेहद अमूल्य समय बचाने में बेहद कारगर एप्प साबित हो रही है।’’

ज़ुबेर अर्थशास्त्र में स्नातक होने के अलावा एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट प्रोफेशनल हैं। वहीं दूसरी तरफ उनके सहसंस्थापक आबिद सूचना तकनीक के क्षेत्र में स्नातक की डिग्री रखते हैं। आबिद बताते हैं, ‘‘हम दोनों की पहली मुलाकात वर्ष 2009 में हुई और उसके बाद हमनें कम लागत वाली कुछ वेबसाइटों का विकास करने के अलावा कश्मीर घाटी के स्थानीय व्यवसायों से संबंधित एक आॅनलाइन बिजनेस डायरेक्ट्री तैयार की। इसके बाद वर्ष 2010 में हमनें एक ऐसा वेब आधारित प्लेटफाॅर्म तैयार करने की दिशा में अपने कदम बढ़ाए जो उपयोगकर्ता सदस्यों को एसएमएस के माध्यम से जानकारी और विभिन्न एलर्ट उपलब्ध करवाता। हालांकि उसी दौरान वर्ष 2010 में कश्मीर घाटी में फैली अस्थिरता के चलते एसएमएस सेवा पर पाबंदी लगा दी गई जो मई 2014 तक लागू रही। एक बार प्रतिबंध हटने के बाद हम अपना पांच वर्ष पुराना सपना पूरा करने के लिये दोबारा एक साथ आए। हालांकि इन पांच वर्षों में बहुत कुछ बदल चुका था तो ऐसे में हमनें एक वेबसाइट के स्थान पर एक एप्लीकेशन तैयार करने पर विचार किया। और इस प्रकार ‘पाइप’ का जन्म हुआ।’’

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तकनीक के दिवाने इन युवाओं ने इस एप्प को तैयार करने के लिये किसी से भी वित्तीय सहायता नहीं ली औैर इसे पूरी तरह से अपनी निजी बचत से बूटस्ट्रैप किया है। सामने आई चुनौतियों के बारे में आबिद बताते हैं, ‘‘हम बीते आठ महीनों से इस एप्प को तैयार कर रहे थे और 17 अक्टूबर को हम इसे लाँच करने में कामयाब रहे। हमारा अबतक का सफर बेहतरीन और सीखों से भरा रहा है। हालांकि हमारे सामने लगातार यह चुनौती रही कि कहीं हम एक और मैसेजिंग या फिर सोशल नेटवर्किंग एप्प न तैयार कर बैठें। ऐसे में हमें अपनी इस एप्प में फीचर्स को जोड़ने और इसका विकास करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ा कि हम अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रहें।’’ पाइप के गूगल प्ले स्टोर पर आने के बाद ये कुछ निवेशकों के संपर्क में हैं जिन्होंने इनकी एप्प में दिलचस्पी दिखाई है और ये एक सकारात्मक परिणाम की उम्मीद में हैं।

बीते एक महीने में ही यह जोड़ी अपनी पाइप एप्लीकेशन में सुधार लाते हुए 6 अपडेट ला चुकी है। आबिद बताते हैं, ‘‘हमनें प्रारंभ में एंड्राइड आधारित एप्प के साथ शुरुआत की है और हम आईओएस और विन्डोज़ के लिये परियोजना पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा हम वेब संस्करण की दिशा में भी प्रयासरत हैं। हम पाइप की परिकल्पना एक ऐसी सूचना प्रसार सेवा के रूप में कर रहे हैं जो विभिन्न उपकरणों और प्लेटफार्मों के बीच कैसा भी भेदभाव न करता हो।’’ इसके अलावा उनका कहना है कि वर्तमान में इन दोनों का इरादा निकट भविष्य में किसी और एप्प के विकास में अपना ध्यान न लगाकर सिर्फ इसी एप्प को और अधिक बेहतर बनाने का है।

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इन युवा संस्थापकों का इरादा वर्तमान में भारत के अलावा समूचे दुनिया में बढ़ रही स्टार्टअप की लहर पर सवारी करना का है। इनका कहना है कि ये वास्तव में अपने और दूसरे युवाओं के लिये कुछ प्रेरणादायक तैयार करना चाहते हैं ताकि वे भी इनके साथ इस लहर की सवारी करने को प्रेरित हों। वे आगे कहते हैं, ‘‘कश्मीर के हजारों शिक्षित युवा उत्पादक और लाभप्रद रोजगार के मामले में बेहद अंधकारमय अवसरों का सामना करते हैं। वैश्विक स्तर पर नजर डालें तो बेरोजगार युवाओं के सामने भी कुछ ऐसी ही समस्याएं आती हैं। हालांकि बेरोजगारी के इन नकारात्मक प्रभावों के अलावा यहां के युवा सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करने को मजबूर हैं। कश्मीर का एक सुदृद्ध और स्थाई भविष्य अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में वास्तविक नौकरियों के सृजन पर निर्भर करने के अलावा इस बात पर भी निर्भर करता है कि कश्मीरी युवाओं को इनके माध्यम से अपने भविष्य के निर्माण की इजाजत दी जाए। एक स्टार्टअप संस्कृति का निर्माण और विकास ही वह इकलौता रास्ता है जो कश्मीर में रोजगार के सृजन और युवाओं के सशक्तीकरण की दिशा में कारगर है।’’


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