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अहमदाबाद का यह शख्स अपने खर्च पर 500 से ज्यादा लंगूरों को खिलाता है खाना

29th Oct 2018
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 गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले स्वप्निल सोनी ने बेजुबान और बेघर लंगूरों की पिछले दस सालों से सेवा कर रहे हैं। वे हर सोमवार को अपने घर से रोटी बनाकर लाते हैं और इन लंगूरों को खिलाते हैं।

स्वप्निल सोनी

स्वप्निल सोनी


खुद को पवन पुत्र हनुमान का भक्त मानने वाले स्वप्निल ने अपनी मुश्किल घड़ियों में भी इन लंगूरों को खाना खिलाना नहीं छोड़ा। कुछ दिन पहले ही उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

हम इंसान आधुनकिक सभ्यता की दौड़ में इतनी तेजी से आगे भागते चले गए कि हमें हमारी जड़ों और प्रकृति का ख्याल न रहा। हमने जंगलों को काटकर ऊंची बिल्डिंग्स और कारखाने तो बना दिये, लेकिन ये नहीं सोचा कि जिनके घरों को उजाड़कर हम अपना आशियाना बना रहे हैं उनका क्या होगा? गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले स्वप्निल सोनी ने बेजुबान और बेघर लंगूरों की पिछले दस सालों से सेवा कर रहे हैं। वे हर सोमवार को अपने घर से रोटी बनाकर लाते हैं और इन लंगूरों को खिलाते हैं।

खुद को पवन पुत्र हनुमान का भक्त मानने वाले स्वप्निल ने अपनी मुश्किल घड़ियों में भी इन लंगूरों को खाना खिलाना नहीं छोड़ा। कुछ दिन पहले ही उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। स्वप्निल हर सप्ताह लगभग 1,700 रोटियां तैयार करते हैं और लंगूरों के पास जाते हैं। इन लंगूरों की खासियत है कि ये छीन झपट कर नहीं खाते बल्कि आराम से खाने का इंतजार करते हैं। स्वप्निल की ऐसी भलमनसाहत को देखते हुए शहरवासियों ने उन्हें मंकी मैन की उपाधि दे दी है।

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एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग छह महीने पहले स्वप्निल की आर्थिक स्थिति डगमगा गई थी लेकिन तब भी उन्होंने बंदरों को रोटियां खिलाना बंद नहीं किया। उन्होंने पैसों के लिए अपनी बेटी की पॉलिसी तक तुड़वा दी थी। स्वप्निल का कहना है कि बंदरों संग उनका रिश्ता ऐसा हो गया है कि वो अब उन्हें अपने परिवार का ही एक सदस्य मानते हैं। उनका कहना है कि उनके बाद उनका बेटा ऐसा करेगा। इस काम को करते हुए उनका परिवार भी अच्छा महसूस करता है और उनके बच्चे भी साथ जाते हैं। स्वप्निल इतने लंबे समय से लंगूरों को रोटी खिला रहे हैं और अब तो लंगूर भी उन्हें पहचानने लगे हैं। वह असली में पशु प्रेमी हैं इसकी मिसाल उनके फेसबुक पर अपलोड तस्वीरों से देखी जा सकती है। 

यह भी पढ़ें: ‘चलते-फिरते’ क्लासरूम्स के ज़रिए पिछड़े बच्चों का भविष्य संवार रहा यह एनजीओ

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