संस्करणों
विविध

कंगना तुम दिल जीत लेती हो

मृणाल वल्लरी की फेसबुक वॉल से...

10th Mar 2017
Add to
Shares
3
Comments
Share This
Add to
Shares
3
Comments
Share

"आठ मार्च को जब महिला दिवस क्यों मनाएं, पुरुष मजदूर जैसे मजाक बन रहे थे उसी वक्त बीबीसी पर पितृसत्ता के खिलाफ एक अभिनेत्री की जंग की खबर भी चल रही थी। कंगना को जिस तरह से मर्दानी मानसिकता के खिलाफ आवाज उठानी पड़ी है उसे देख कर लगता है कि अभी तो सौ बरस और महिला दिवस मनाने की जरूरत है।"

image


"कंगना ने करण पर ‘मूवी-माफिया’ की तरह काम करने का आरोप भी लगाया था। लेकिन करण जौहर की मर्दानगी मानसिकता को करारा जवाब देते हुए कंगना ने मुंबई मिरर में कहा, ‘मैं करण जौहर के भाई-भतीजेवाद की समझ पर कुछ नहीं कह सकती। यदि वे सोचते हैं कि भतीजों, बेटियों और चचेरे भाइयों को रोका गया है तो मुझे कुछ भी नहीं कहना है। करण जौहर एक महिला को महिला होने के कारण अपमानित कर रहे हैं।"

बीबीसी के मुताबिक करण जौहर ने लंदन स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स में एक कार्यक्रम से अलग कहा था, कि "कंगना शायद भाई-भतीजावाद का मतलब नहीं समझती हैं। कंगना महिला और पीड़ित कार्ड खेलती हैं। यदि बॉलीवुड में उन्हें ज्यादा समस्या हो रही है, तो उन्हें बॉलीवुड छोड़ देना चाहिए।"

कंगना रानाउत हिंदी फिल्म उद्योग की उन चुनिंदा अदाकारा में से हैं, जो पर्दे के बाहर दिल जीत लेती हैं। 8 मार्च को जब महिला दिवस क्यों मनाएं, पुरुष मजदूर जैसे मजाक बन रहे थे, उसी वक्त बीबीसी पर पितृसत्ता के खिलाफ एक अभिनेत्री की जंग की खबर भी चल रही थी। कंगना को जिस तरह से मर्दानी मानसिकता के खिलाफ आवाज उठानी पड़ी है उसे देख कर लगता है कि अभी तो सौ बरस और महिला दिवस मनाने की जरूरत है। बीबीसी के मुताबिक करण जौहर ने लंदन स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स में एक कार्यक्रम से अलग कहा था, कि कंगना शायद भाई-भतीजावाद का मतलब नहीं समझती हैं। कंगना महिला और पीड़ित कार्ड खेलती हैं। यदि बॉलीवुड में उन्हें ज्यादा समस्या हो रही है तो उन्हें बॉलीवुड छोड़ देना चाहिए। मतलब जो करण जौहर के मर्दाने कैंप में मर्दों के मुताबिक नहीं चलेंगी उन्हें बालीवुड में नहीं रहने दिया जाएगा।

"मैं करण जौहर से नहीं लड़ रही हूं, बल्कि मैं पुरुष वर्चस्व के खिलाफ लड़ रही हूं: कंगना रनाउत"

कंगना ने 19 फरवरी के अपने टीवी शो करण को भाई-भतीजावाद का झंडाबरदार करार दिया था। कंगना ने करण पर ‘मूवी-माफिया’ की तरह काम करने का आरोप भी लगाया था। लेकिन करण जौहर की मर्दानगी मानसिकता को करारा जवाब देते हुए कंगना ने मुंबई मिरर में कहा, ‘मैं करण जौहर के भाई-भतीजेवाद की समझ पर कुछ नहीं कह सकती। यदि वे सोचते हैं कि भतीजों, बेटियों और चचेरे भाइयों को रोका गया है तो मुझे कुछ भी नहीं कहना है। करण जौहर एक महिला को महिला होने के कारण अपमानित कर रहे हैं। उन्होंने महिला और पीड़ित कार्ड की बात क्या कही है? इस तरह की बात महिलाओं को कमतर आंकने के लिए है। यह काफी आपत्तिजनक है। महिला कार्ड से कोई विंबलडन चैंपियन नहीं बन सकती या कोई ओलंपिक मेडल नहीं जीत सकती और न ही किसी को राष्ट्रीय सम्मान मिल सकता है। यहां तक कि इससे आपको कोई नौकरी भी नहीं मिल सकती है। महिला कार्ड से किसी गर्भवती महिला को भीड़भाड़ वाली बस में सीट मिल सकती है। महिला कार्ड का इस्तेमाल खतरे की स्थिति में किया जा सकता है। उसी तरह पीड़ित कार्ड में मैं अपनी बहन रंगोली का उदाहरण दे सकती हूं। वह ऐसिड अटैक पीड़िता है। कोर्ट में लड़ते हुए वह इस कार्ड का इस्तेमाल कर सकती है। मैं हर संभव कार्ड का इस्तेमाल करती हूं। मैं प्रतिस्पर्धा में मुकाबले के लिए आत्मविश्वास कार्ड का इस्तेमाल करती हूं। मैं अपनों के बीच लव कार्ड का उपयोग करती हूं। दुनिया से लड़ने के लिए मर्यादा कार्ड का इस्तेमाल करती हूं और बस में सीट लेने के लिए महिला कार्ड का इस्तेमाल करती हूं। यहां समझने की जरूरत यह है कि हम लोगों से नहीं लड़ रहे हैं बल्कि हम एक मानसिकता से लड़ रहे हैं। मैं करण जौहर से नहीं लड़ रही हूं बल्कि मैं पुरुष वर्चस्व के खिलाफ लड़ रही हूं। अब करण जौहर एक बेटी के पिता हैं। उन्हें उसे हर कार्ड देना चाहिए। महिला कार्ड और पीड़ित कार्ड के साथ स्वनिर्मित आत्मनिर्भर महिला कार्ड और आत्मविश्वास कार्ड जिसे मैंने उनके शो में दिखाया था, सब उन्हें देना चाहिए। मैं अपनी राह से बाधा हटाने के लिए हर जरूरी कार्ड का इस्तेमाल करती हूं। करण जौहर को यह भी याद रखना चाहिए कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री कोई छोटा स्टूडियो नहीं है जैसा कि उनके पिता ने उन्हें बीसवीं सदी में सौंपा था। वह एक छोटे कण की तरह था। यह इंडस्ट्री सभी भारतीयों के लिए है। यह इंडस्ट्री मेरे जैसे बाहरियों के लिए भी है जिसके माता-पिता काफी गरीब हैं और उन्होंने मुझे ट्रेनिंग दी। मैंने यहां काम सीखा और उसके लिए पैसे मिले। इन पैसों का इस्तेमाल मैंने न्यूयॉर्क में खुद को शिक्षित करने में किया। कोई व्यक्ति मुझे यहां से हटने के लिए नहीं कह सकता। मिस्टर करण जौहर मैं यहां से कहीं नहीं जा रही’।

आज जब हर जगह करण जौहर जैसे खलनायक महिला अस्मिता को खारिज कर रहे हैं, तो कंगना का असल जिंदगी का यह संवाद उन्हें हम सबकी नायिका बनाता है। छप चुके और चर्चित हो चुके कंगना के इन संवादों को फिर से पढ़ना ज्यादा बोरिंग नहीं लगेगा।

Add to
Shares
3
Comments
Share This
Add to
Shares
3
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags