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ड्राइवर भी महिला और गार्ड भी: बिहार की बेटियों ने मालगाड़ी चलाकर रचा इतिहास

1st Aug 2018
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अभी भी कई ऐसी जगह हमें दिख जाती है जहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व या तो कम होता है या फिर न के बराबर। रेलवे एक ऐसा ही क्षेत्र है जहां ड्राइविंग और ऑपरेशन में महिलाओं की उपस्थिति नगण्य है। हालांकि महिलाओं को वहां तक पहुंचाने के कई प्रयास किए जा चुके हैं और किए भी जा रहे हैं।

लोको पायलट विभा और सोनी कुमारी

लोको पायलट विभा और सोनी कुमारी


इन महिला कर्मचारियों का तकनीकी कौशल और हौसला देखकर दानापुर डीआरएम रंजन प्रकाश ठाकुर ने कहा कि सवारी गाड़ी चलाना आसान होता है, लेकिन मालगाड़ी को चलाने में कई तरह की दिक्कतें आती हैं। 

सीमा पर देश की सुरक्षा करने से लेकर फाइटर प्लेन उड़ा कर देश की स्त्रियों ने साबित कर दिया है कि वे किसी भी मामले में पुरुषों से कमतर नहीं हैं। अगर उन्हें मौका मिले तो वे हर मौके पर अपनी काबिलियत साबित कर सकती हैं। लेकिन अभी भी कई ऐसी जगह हमें दिख जाती है जहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व या तो कम होता है या फिर न के बराबर। रेलवे एक ऐसा ही क्षेत्र है जहां ड्राइविंग और ऑपरेशन में महिलाओं की उपस्थिति नगण्य है। हालांकि महिलाओं को वहां तक पहुंचाने के कई प्रयास किए जा चुके हैं और किए भी जा रहे हैं। हाल ही में ईस्ट सेंट्रल रेलवे ने सामान ढोने वाली पूरी ट्रेन महिला कर्मचारी के हवाले कर इतिहास रच दिया।

गार्ड स्वाति स्वरूप

गार्ड स्वाति स्वरूप


बीते शुक्रवार को पूर्व मध्य रेलवे ने दो महिला लोको पायलट यानी ड्राइवर और एक महिला गार्ड को स्वतंत्र जिम्मेदारी सौंपी। यह ट्रेन दानापुर से फतुहा गई। ट्रेन के इंजन पर सोनी कुमारी और विभा कुमारी थीं तो वहीं गाड़ी के पीछे गार्ड की जिम्मेदारी स्वाति स्वरूप निभा रही थीं। उन्होंने 31 किलोमीटर की दूरी तय कर के यह जानने की कोशिश की इन स्टेशनों से गुजरना ठीक है। यह माल गाड़ी सामान लेकर दानापुर से दोपहर 1.10 बजे छूटी और 2.35 बजे तक फतुहा पहुंची।

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इन महिला कर्मचारियों का तकनीकी कौशल और हौसला देखकर दानापुर डीआरएम रंजन प्रकाश ठाकुर ने कहा कि सवारी गाड़ी चलाना आसान होता है, लेकिन मालगाड़ी को चलाने में कई तरह की दिक्कतें आती हैं। उन्होंने कहा, 'जहां तक मालगाड़ी चलाने की बात है तो महिलाओं के लिए यह सिर्फ एक शुरुआत है। हालांकि इन महिला कर्मचारियों को आने वाले समय में छोटी दूरी की सवारी गाड़ियों की भी जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्हें सिर्फ दिन में ट्रेन चलाने को मिलेगा।' डीआरएम ने बताया कि इन महिलाओं को रेलवे ने सुरक्षाकर्मी भी दिए ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो।

डीआरएम ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा कि पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर डिविजन के पास ऐसी प्रशिक्षित महिला लोको पायलट हैं जो यह जिम्मेदारी अच्छे से निभा सकती हैं। उन्होंने कहा, 'इन महिला लोको पायलट्स ने साबित कर दिया है कि वे हर जिम्मेदारी और चुनौती का सामना करने में सबसे आगे हैं।' भारतीय रेलवे महिलाओं को टेक्निकल जगहों पर नियुक्त करने और रेलवे में महिला पुरुष बराबरी का माहौल स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यही वजह है कि बीते दिनों कुछ स्टेशनों के संचालन की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपी गई।

यह भी पढ़ें: भारतीय कबड्डी टीम में खेलने वाली एकमात्र मुस्लिम महिला खिलाड़ी शमा परवीन की कहानी

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