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इस साल दिसंबर से चलेगी भारत और नेपाल के बीच पहली पैसेंजर ट्रेन

posted on 6th November 2018
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भारत और नेपाल के बीच पहली पैसेंजर ट्रेन इसी साल दिसंबर से चलने लगेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय रेल अधिकारियों ने इसकी पुष्टि कर दी है। इस ट्रेन का पहला स्टेशन बिहार के जयनगर में होगा, जहां चेकिंग के लिए इमीग्रेशन काउंटर भी खोला जाएगा। 

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली के भारत दौरे के वक्त सरकार ने पैसेंजर ट्रेन चलाने की योजना बनाई थी। हालांकि चीन भी नेपाल की राजधानी काठमांडू तक रेल नेटवर्क बिछाने की योजना बना चुका है। 

भारत और नेपाल के बीच पहली पैसेंजर ट्रेन इसी साल दिसंबर से चलने लगेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय रेल अधिकारियों ने इसकी पुष्टि कर दी है। इस ट्रेन का पहला स्टेशन बिहार के जयनगर में होगा, जहां चेकिंग के लिए इमीग्रेशन काउंटर भी खोला जाएगा। वहीं नेपाल के धनुसा में कुर्था स्टेशन ट्रेन का आखिरी पड़ाव होगा। यह स्टेशन जनकपुर जिले के अंतर्गत आता है।

बिहार में स्टेशन पर चेक पोस्ट या तो ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन विभाग द्वारा संचालित होगी या फिर राज्य सरकार उसके लिए कोई प्रबंध करेगी। हालांकि भारत से नेपाल आने-जाने के लिए किसी तरह के वीजा की आवश्यकता नहीं होती है। यह ट्रेन 8 से 16 घंटे के शिफ्ट में चलेगी। हालांकि नेपालियों ने पैसेंजर और मालगाड़ी दोनों को चलाने में रुचि प्रकट की है। भारत के इस कदम को चीन को तगड़े जवाब के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि चीन भी नेपाल के साथ रेल मार्ग साझा करने के प्रयास में लगा हुआ है।

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली के भारत दौरे के वक्त सरकार ने पैसेंजर ट्रेन चलाने की योजना बनाई थी। हालांकि चीन भी नेपाल की राजधानी काठमांडू तक रेल नेटवर्क बिछाने की योजना बना चुका है। हालांकि भारत से नेपाल को जोड़ने वाला रेलमार्ग जयनगर से कुर्ठा को ब्रिटिश राज में ही विकसित किया गया था ताकि जंगल से काटी जाने वाली लकड़ी की ढुलाई की जा सके। उस वक्त इस मार्ग की लंबाई 52 किलोमीटर तक थी जो 15 साल पहले आई बाढ़ की वजह से यह मार्ग बह गया।

रेलवे के इस प्रॉजेक्ट की अनुमानिक लागत 5.5 अरब रुपये है जिसे तीन चरणों में विभाजित करके काम को पूरा किया गया। पहले जयनगर से कुर्ठा तक 34 किलोमीटर लंबी दूरी को पूरा किया गया उसके बाद कुर्ठा से महोत्तरी जिले में पड़ने वाले भंगहा स्टेशन तक 18 किलोमीटर का काम पूरा हुई। तीसरे और अंतिम चरण में बभंगहा से बारदिबस तक 17 किलोमीटर दूरी का काम समाप्त हुआ। गौर करने वाली बात ये है कि इतनी पूरी दूरी में से भारत में सिर्फ 3 किलोमीटर मार्ग होगा।

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