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घर बैठे मंगवाएं सब्ज़ी, फल और किराने का सामान ‘फर्स्टप्राइस’ से

सीए की पढ़ाई छोड़कर आॅनलाइन स्टोर खोला समीर नेदुकानों के मुकाबले कम दामों पर घर भिजवाते हैं सामानफिलहाल सिर्फ हैदराबाद में दे रहे हैं सेवाएंजल्द ही पूरे देश में आॅनलाइन शाॅपिंग को करना चाहते हैं मशहूर

Pooja Goel
18th Jun 2015
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आज के समय में कंप्यूटर ओर इंटरनेट के द्वारा किये जाने वाले व्यापार ने दुकानदारी को नए आयाम मिये हैं और उपभोक्ता के व्यवहार को एक नए सिरे से परिभाषित किया है और इस ई-काॅमर्स ने व्यापार करने के तौर-तरीकों को बदलकर रख दिया है। घर बैठे आराम से आॅनलाइन शाॅपिंग की सुविधा ने खरीददारी को, विशेषकर किराने के समान लाने को बहुत आसान कर दिया है।

बिगबास्केट, ज़ैपनाओ और नेचर्स बास्केट जैसे कई आॅनलाइन स्टोर किराने के सामान को चयनित करने और उपभोक्ता के दरवाजे तक पहुंचाने में उसकी सहायता कर रहे हैं। हालांकि इन स्टोर्स से उपभोक्ता को ‘मेट्रो’’ जैसे फुटकर विक्रेता के यहां मिलने वाले लाभ नहीं मिल पाते जो किराने और रोजमर्रा की जरूरत के उत्पादों को थोक के दामों में उपलब्ध करवाते हैं।

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अमरीका के बाॅक्स्ड होलसेल की तर्ज पर अब भारत में भी प्रत्येक उपभोक्ता के लिये किराने का सामान थोक के दामों में पहुंचाने का विचार धरी-धीरे अमली जामा पहन रहा है और इंडियाएटहोम जैसी कुछ वेबसाइट इस खेल में पैर जमाने का प्रयास कर रही हैं। इसी खेल में एक नया खिलाड़ी ‘फर्स्टप्राइस’, जो हैदराबाद के बाहर स्थित है उपभोक्ताओं के बीच आॅनलाइन थोक की किराने की दुकान में मशहूर हो रहा है।

वाणिज्य से स्नातक समीर वंजे एक दिन अपने पिता के साथ ‘मेट्रो’ में खरीददारी करने गए और वहीं से तभी उनके मन में ‘फस्र्टप्राइस’ को शुरू करने का विचार आया। ‘‘मेरे पिता का अपना व्यवसाय है और उन्होंने खरीददारी के लिये मेट्रो कार्ड बनवा रखा है। एक दिन हम लोग वहां से कुछ घरेलू सामान खरदने गए तो हमने वहां से किराने का सामान भी खरीदा। जब मैंने वहां पर मिलने वाले सामान के दाम देखे तो मुझे लगा कि इन कम दामों का लाभ हर उपभोक्ता को मिलना चाहिये।’’

उन दिनों समीर ने इंटर की परीक्षा दी थीं और वे भविष्य की योजनाओं का खाका तैयार कर रहे थे। ‘‘मैंने फ्रेशबाजारडाॅटकाॅम के नाम से एक आॅनलाइन स्टोर शुरू किया लेकिन कुछ आंतरिक मुद्दों और समय की कमी के चलते मुझे उसक बंद करना पड़ा,’’ समीर बताते हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी शिक्षा को जारी रखा और चार्टेड एकांटेसी के कोर्स में दाखिला ले लियो। ‘‘जल्द ही मैंने सीए की पढाई छोड़ दी क्योंकि मुझे महसूस हुआ कि मैं अपने जीवन में कुछ अलग करना चाहता हूँ। वास्तव में मैं एक आॅनलाइन किराने की दुकान खोलना चाहता था जो कई वर्षों से मेरा सपना था।’’

पढ़ाई से अपने कदमों को वापस खींचते हुए समीर ने ‘फर्स्टप्राइस’ को शुरू करने का इरादा किया और नए जोश और जुनून के साथ इसमें लग गए। ‘‘इस बार मैं पहले से अधिक सूझबूझ और परिपक्वता के साथ इस काम में उतरा। हमने वेब डेवलपर्स की मदद से एक नए बैकएंड और एक बेहतर यूजर इंटरफेस को विकसित किया और साइट का नाम बदलकर ‘फर्स्टप्राइस’ रखा,’’ समीर कहते हैं। कई अन्य परीक्षणों इम्तिहानों के बाद इसे 18 मार्च को उपयोगकर्ताओं के लिये लांच किया गया।

‘‘हमारा व्यापार धीरे-धीरे लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है और प्रारंभ में हम सिर्फ हैदराबाद पर ही ध्यान दे रहे हैं। अभी हमारा दूसरे शहरों में विस्तार का कोई इरादा नहीं है,’’ समीर कहते हैं। अभी ‘फर्स्टप्राइस’ एक बहुत ही बुनियादी माॅडल पर संचालित हो रहा है। ‘‘मैंने उत्पादों को मंगाने और उनके वितरण के लिए अपने पिता के साथ करार किया है। जैसे ही हमारे पास कोई आॅर्डर आता है एक छोटी गाड़ी के द्वारा उसे उपभोक्ता के दरवाजे तक पहुंचा दिया जाता है।’’

काम के इस माॅडल में वस्तु के दाम और उसपर होने वाला लाभ आमतौर पर एक-दूसरे पर काफी निर्भर करते हैं। समीर इस बात को समझाते हुए एक उदाहरण देते हैं, ‘‘अगर किसी चीज के एक पैकेट को बेचने पर हमें 10 प्रतिशत का लाभ होता है और इसके उलट अगर हम उसी वस्तु के पूरे पैकेट को इकट्ठा बेचें तो हमारा लाभ बढ़कर करीब दोगुना हो जाता है।’’ इस तरह आप अधिक लाभ कमा पाते हैं।

इस काम में अन्य प्रतिस्पर्धियों के बारे में बात करते हुए समीर कहते हैं कि, ‘‘हम अपने उपभोक्ताओं को 7 से 10 प्रतिशत तक की छूट देतेे हैं जो कई वस्तुओं में तो 25 प्रतिशत तक पहुंच जाती है जबकि हमारा कोई भी प्रतिस्पर्धी 5 प्रतिशत से अधिक की छूट नहीं देता। इस तरह से हम अपने उपभोक्ताओं को किराने की दुकान के मुकाबले कम दामों पर सामान उपलब्ध करवाकर उनका फायदा करवा रहे हैं। बदले में हम उनसे सिर्फ डिलीवरी चार्ज के रूप में 39 रुपये अतिरिक्त वसूल रहे हैं। इसके अलावा हमने कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए अपनी बचत का मार्जिन 1 से 2 प्रतिशत ही रखा है।’’

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वर्तमान में वे किसी अन्य व्यवसाय के मालिक की तरह ही काम कर रहे हैं। ‘फर्स्टप्राइस’ थोक के विक्रेताओं से ही अपना सामान खरीदता है। ‘‘हम लोग इन दुकानदारों के साथ और मजबूत गठजोड़ के प्रयास में हैं ताकि हम खुद को और अपने उपभोक्तओं को अधिक से अधिक लाभ दे सकें। वर्तमान में तो हम सिर्फ हैदराबाद में संचालित हैं लेकिन भविष्य में हम पूरे देश में अपने काम को फैलाना चाहते हैं।’’

समीर ‘फर्स्टप्राइस’ को उसी मुकाम पर पहुंचाने का सपना देखते हैं जिस मुकाम पर अमरीका में ‘बाक्स्ड’ है।

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