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अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री में पहली सीएफओ बनीं चेन्नई की दिव्या

भारतीय मूल की दिव्या सूर्यदेवरा बनीं अमेरिका की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी जनरल मोटर्स की पहली महिला मुख्य वित्तीय अधिकारी...

जय प्रकाश जय
15th Jun 2018
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भारतीयों का टैलेंट लगातार दुनिया की टॉप मल्टीनेशनल कंपनियों को ललचा रहा है। अभी-अभी निकेश अरोड़ा पालो ऑल्टो में 858 करोड़ रुपए के सालाना पैकेज पर दुनिया में सबसे ऊंचा वेतन पाने वाले सीईओ बने हैं। अब भारतीय मूल की अमेरिकी महिला दिव्या सूर्यदेवरा अमेरिका की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी जनरल मोटर्स की पहली महिला मुख्य वित्तीय अधिकारी बनी हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सचमुच अब भारत दुनिया भर में ऑलराउंडर बना रहा है।

 दिव्या सूर्यदेवरा (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

 दिव्या सूर्यदेवरा (फोटो साभार- सोशल मीडिया)


भारतीय मूल की अमेरिकी महिला दिव्या सूर्यदेवरा अमेरिका की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी जनरल मोटर्स की पहली महिला मुख्य वित्तीय अधिकारी बनी हैं। दिव्या सूर्यदेवरा पहली सितंबर से अपना कार्यकाल संभालेंगी और जनरल मोटर्स की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैरी बर्रा को रिपोर्ट करेंगी।

क्या सचमुच अब भारत दुनिया भर में ऑलराउंडर बना रहा है। भारतीय टेलेंट दुनिया भर को प्रभावित और आकर्षित कर रहे हैं। ऊंचे पदों पर भारतीयों की लगातार बढ़त तो ऐसे ही संकेत दे रही है। भारतीय कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिकाएं सक्षमतापूर्वक निभा रहे हैं। दुनिया भर के कॉर्पोरेट्स में भारतीय टेलेंट का जलवा होता जा रहा है। विदेश की टॉप कंपनियों में भारतीय टॉप पोजीशन हासिल कर रहे हैं। उनमें भारतीय कार्यकारियों का कद तेजी से बढ़ा है। अभी हाल ही में गाजियाबाद (उ.प्र.) के निकेश अरोड़ा अमेरिका की साइबर सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर कंपनी पालो ऑल्टो में 858 करोड़ रुपए के सालाना पैकेज पर दुनिया में सबसे ऊंचा वेतन पाने वाले सीईओ बन गए हैं।

अब अमेरि‍का की सबसे बड़ी कार कंपनी में से एक जनरल मोटर्स ने चार्टर्ड फाइनेंशि‍यल एनालि‍स्‍ट दि‍व्‍या सूर्यदेवरा को कंपनी का चीफ फाइनेंस ऑफि‍सर (सीएफओ) नियुक्‍त कि‍या है। दि‍व्‍या सूर्यदेवरा पहली महि‍ला हैं जि‍न्‍हें ऑटो इंडस्‍ट्री में यह पॉजि‍शन मि‍ली है। इसी तरह गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, फिलिप्स लाइटिंग में दक्षिण एशिया के हेड हर्ष चिताले, प्रमुख जापानी कंपनी पैनासॉनिक के वाइस प्रेजिडेंट मनीष शर्मा, कोका कोला के सीईओ गौरव चतुर्वेदी, चीन की मोबाइल कंपनी शिओमी के अंतर्राष्ट्रीय वाइस प्रेजिडेंट मनु कुमार जैन, आईबीएम जीबीएस (ग्लोबल बिजनेस सर्विसेज) के सीईओ अमित शर्मा, पेप्सिको के प्रेजिडेंट समुद्र भट्टाचार्य, अंशुल खन्ना, ब्रिटिश कंपनी रैकिट बैंस्किसर के ग्लोबल एचआर गुरवीन कौर, दुनिया की दिग्गज फार्मास्युटिकल कंपनी नोवार्टिस के सीईओ वसंत नरसिम्हन, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला, पेप्सिको की सीईओ इंदिरा नूई, अडॉबी के सीईओ शांतनु नारायण, सन माइक्रोसिस्टम के सह संस्थापकों में से एक विनोद खोसला, स्लाइडशो की सह संस्थापक रश्मि सिन्हा, अग्रणी वेब सर्विस हॉटमेल के सह संस्थापक सब्बीर भाटिया आदि के नाम लिए जा सकते हैं। फ्रेंच आईटी कंपनी कैपजेमिनी की टॉप ग्लोबल पोजिशंस में 30 फीसदी पर भारतीय काबिज हैं। तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था और नियामकीय सुधारों के चलते 75 प्रतिशत से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत टॉप कर्मचारियों का प्रमुख आउटसोर्सिंग बन गया है।

एक वक्त होता था, जब आज की अरबों-ख़रबों की मल्टीनेशनल कंपनियों अमेज़न, एप्पल, गूगल आदि की तरह कभी ईस्ट इंडिया कंपनी हुआ करती थी। उसमें भी इनसाइडर ट्रेडिंग, शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव जैसी आज की चीज़ों का असर और दखल होता था। उसका मुख्यालय आज के गूगल या फ़ेसबुक जैसी कंपनियों के शानदार दफ़्तरों जैसा तो नहीं था लेकिन इसके टॉप मुलाज़िमों की तनख़्वाह आज के सीईओ की तरह ही होती थी। उस वक्त ईस्ट इंडिया कंपनी में नौकरी पाने के लिए आज जैसी ही होड़ मचती थी। किसी को भी नौकरी तब मिलती थी, जब उसके नाम की सिफ़ारिश कंपनी का कोई डायरेक्टर कर देता था। उस वक्त भी कंपनी के कर्मचारियों को अपनी ही कंपनी के शेयर के कारोबार में हिस्सा लेने की इजाज़त होती थी। आज जहां अमेरिका में केवल पचास फीसदी लोग ही अपनी नौकरी से संतुष्ट हैं, वहीं फ्रांस में केवल 43 फ़ीसद और जर्मनी में 34 परसेंट ख़ुश पाए जाते हैं। फिर भी एक सच सिर चढ़कर बोलने लगा है कि आज अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस, न्यूजीलैंड, चीन, रूस, आस्ट्रेलिया आदि कौन सा ऐसा देश है, जहां की कंपनियों में टॉप सीटों पर भारत के लोग काबिज नहीं होते जा रहे।

भारतीय मूल की अमेरिकी महिला दिव्या सूर्यदेवरा अमेरिका की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी जनरल मोटर्स की पहली महिला मुख्य वित्तीय अधिकारी बनी हैं। दिव्या सूर्यदेवरा पहली सितंबर से अपना कार्यकाल संभालेंगी और जनरल मोटर्स की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैरी बर्रा को रिपोर्ट करेंगी। भारत में पैदा और पली-बढ़ी दिव्या ने चेन्नई के मद्रास विश्वविद्यालय से वाणिज्य में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद दिव्या 22 साल की उम्र में हायर स्टडी के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के हार्वर्ड चली गईं। वहां से एमबीए की डिग्री ली और निवेश बैंक यूबीएस में अपनी पहली नौकरी की और 25 साल की उम्र में एक साल बाद जनरल मोटर्स से जुड़ीं। वर्ष 2016 में दिव्या को ऑटोमोटिव क्षेत्र की ‘राइजिंग स्‍टार’ का खिताब मिला।

पिछले साल 40 से कम उम्र के लिए दिव्या को डेट्रोइट बिजनेस के 40 में नामित किया गया था। 39 वर्षीय, दिव्या ने इस महीने की शुरुआत में जापानी तकनीकी जायंट सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प द्वारा जनरल मोटर्स क्रूज़ में 2.25 अरब डॉलर के निवेश को सुरक्षित रखने में प्रमुख भूमिका निभाई। दिव्या ने स्वतः ड्राइविंग वाहन स्टार्टअप क्रूज के अधिग्रहण समेत कई महत्वपूर्ण सौदों में भी जरूरी भूमिका निभाई है। दिव्या को लेकर जनरल मोटर्स की सीईओ मैरी बर्रा कहती हैं कि हमारे वित्तीय परिचालनों में कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिव्या के अनुभव और नेतृत्व ने पिछले कई वर्षों में मजबूत व्यापारिक परिणाम दिए हैं।

जनरल मोटर्स ने अपने एक बयान में कहा है कि कंपनी की मौजूदा उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट फाइनेंस) 39 वर्षीय दिव्या एक सितंबर को चक स्टीवेंस का स्थान लेंगी। दिव्या उपाध्यक्ष पद पर जुलाई 2017 से कार्यरत हैं। बर्रा और दिव्या वाहन उद्योग में संबंधित इन शीर्ष पदों पर पहुंचने वाली पहली महिलाएं हैं। अब तक कोई भी ऐसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी नहीं रही है, जहां सीईओ या सीईओ और सीएफओ दोनों महि‍लाएं हों। दिव्या वर्ष 2005 में 25 साल की उम्र में जीएम के साथ जुड़ने से पहले यूबीएस और प्राइसवाटरहाउसकूपर्स में काम कर चुकी हैं।

यह भी पढ़ें: घरों में काम करने वाली महिला ने वर्ल्ड रेसिंग चैंपियनशिप के लिए किया क्वॉलिफाई

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