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सरकारी बस बनी एंबुलेंस, प्रेग्नेंट महिला को समय पर पहुंचाया अस्पताल

केरल पब्लिक ट्रांसपोर्ट के ड्राइवर और कंडक्टर को सलाम...

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16th May 2018
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सुबह 8.30 बजे के करीब एक गर्भवती महिला अपने पति और बेटे के साथ बस में सवार हुई। लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी हालत कुछ खराब होने लगी। ड्राइवर गिरीश और कंडक्टर साजन के जॉन ने संवेदनशीलता से काम लिया और महिला की हालत जानने की कोशिश की।

ड्राइवर गिरीश और कंडक्टर साजन (फोटो साभार- द न्यूज मिनट)

ड्राइवर गिरीश और कंडक्टर साजन (फोटो साभार- द न्यूज मिनट)


ड्राइवर गिरीश ने बस चलाते रहे और सीधे तिरुवनंतपुरम पहुंचे। वहां उन्हें अवित्तम तिरुमल अस्पताल मिला। अच्छी बात यह थी कि यह अस्पताल महिला और बच्चों का अस्पताल था। ड्राइवर के साथ ही साथी यात्रियों ने भी महिला की मदद की। 

केरल राज्य परिवहन सर्विस के ड्राइवर और कंडक्टर ने वो काम किया है जिससे लगता है कि इंसानियत के आगे स्वार्थ की कोई जगह नहीं होती। सोमवार सुबह की बात है, कोल्लम जिले के चडयामंगलम डिपो से एक बस तिरुवनंतपुरम के लिए रवाना हुई। रास्ते में अयूर नाम की जगह पर सुबह 8.30 बजे के करीब एक गर्भवती महिला अपने पति और बेटे के साथ बसपर सवार हुई। लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी हालत कुछ खराब होने लगी। ड्राइवर गिरीश और कंडक्टर साजन के जॉन ने संवेदनशीलता से काम लिया और महिला की हालत जानने की कोशिश की।

साजन ने द न्यूज मिनट से बात करते हुए बताया, 'बस जब कन्याकुलंगरा के पास पहुंची तो मैंने देखा कि महिला को कुछ दिक्कत हो रही है। उसका पति बस में पीछे खड़ा था। मैंने उससे कहा कि अपनी पत्नी को देखो।' साजन को पता चला कि महिला आठ महीने के गर्भ से है। उन्होंने बिना देर किए महिला की मदद करने के बारे में सोचा। उन्हें लगा कि अगर महिला को मेडिकल सहायता नहीं मिली तो मुश्किल आ सकती है। हालांकि बस से महिला को जल्दी से अस्पताल पहुंचाना थोड़ा मुश्किल काम था। लेकिन वहां कोई और वाहन मौजूद नहीं था, इसलिए उन्होंने सोचा कि बस से ही अस्पताल चलते हैं।

ड्राइवर गिरीश ने बस चलाते रहे और सीधे तिरुवनंतपुरम पहुंचे। वहां उन्हें अवित्तम तिरुमल अस्पताल मिला। अच्छी बात यह थी कि यह अस्पताल महिला और बच्चों का अस्पताल था। ड्राइवर के साथ ही साथी यात्रियों ने भी महिला की मदद की। बस में रोजाना सफर करने वाले एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने पुलिस कंट्रोल रूम में भी स्थिति और बस नंबर सहित सूचना दे दी ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में पुलिस की मदद ली जा सके। पुलिस ने भी उनकी मदद की और रास्ते से ट्रैफिक को हटाने का काम किया। बस में लगभग 70 यात्री थे उन सबने भी बस को जल्दी से अस्पताल पहुंचाने में हरसंभव मदद की।

कई यात्री ऐसे थे जिन्हें बीच में ही उतरना था, लेकिन उन्होंने एक बार भी बस को रोकने के बारे में नहीं कहा। उन्हें लगा कि महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना सबसे ज्यादा जरूरी है। केशवदासपुरम में पुलिस की एक गाड़ी बस का इंतजार कर रही थी। इस गाड़ी ने पायलट गाड़ी का कम किया और बस को ट्रैफिक में फंसने से बचाया। सुखद बात यह रही कि महिला को अस्पताल पहुंचाने के बाद उसकी डिलिवरी सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। अगले दिन मंगलवार को साजन और गिरीश महिला को देखने अस्पताल पहुंचे और उसे अपने बच्चे के साथ देखकर उन्हें खुशी हुई। उनका कहना था कि उन्होंने तो बस अपनी जिम्मेदारी निभाई है। लेकिन उन्हें नहीं पता कि उन्होंने दो जिंदगियां बचाकर कितना बड़ा काम किया है।

यह भी पढ़ें: शानू बेगम ने 40 की उम्र में पास की दसवीं की परीक्षा, बनीं दिल्ली की पहली ऊबर ड्राइवर

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