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गांवों के लोगों को क्योर करने में जुटा "आईक्योर"

- गांवों में रहने वालों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचा रहा है आईक्योर। - कम दाम में अच्छी सुविधाएं पहुंचाना है लक्ष्य। - उड़ीसा, बिहार, असम और पूर्वी भारत में विस्तार की है योजना

Ashutosh khantwal
7th Jun 2015
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क्या आप जानते हैं कि भारत में गांवों में रहने वालों की आबादी तकरीबन 840 मिलियन से ज्यादा है और इस आबादी के लिए भारत के कुल मेडिकल फोर्स का मात्र तीस प्रतिशत इस बड़ी आबादी के लिए कार्य कर रहा है? कहने का अभिप्राय यह है कि अधिकांश मेडिकल सुविधाएं शहरी लोगों तक सीमित हैं और ग्रामीण लोगों को चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा की अच्छी सुविधाएं नहीं हैं इस कारण कई बार छोटी समस्याएं ही बड़ी बीमारी का रूप धारण कर लेती हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार ने इस दिशा में कोई काम न किया हो। राज्य सरकारें और केंद्र सरकार समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी अभियान चलाती रहती हैं लेकिन इतना सब ही काफी नहीं होता। इन लोगों को और भी सुविधाओं की जरूरत है। ऐसे में आईक्योर ने आगे आकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने का संकल्प लिया है ताकि ग्रामीणों को कम पैसों में अच्छी सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

आईक्योर के संस्थापक और सीईओ सुजय सांत्रा ने अपनी जिंदगी को इसी मकसद के लिए समर्पित कर दिया है। उनकी जिंदगी का अब यही उद्देश्य है कि वे ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ दे सकें और हर जरूरतमंद ग्रामीण के काम आ सकें। वे चाहते हैं कि ग्रामीणों को भी शहरी लोगों की तरह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। सुजय की पूरी कोशिश अब इस काम पर है कि कम दाम पर अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं ग्रामीणों को मिले और उनके घर के नज़दीक वे इन सेवाओं को उपलब्ध करा सकें।

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ग्रामीण क्षेत्रों में बेसिक सुविधाएं न होने की वजह से डॉक्टर्स भी गांवों में जाने से कतराते हैं। जिस कारण ग्रामीणों को सेहत संबंधी सुविधाओं के लिए शहर जाना पड़ता है।

विश्व स्वास्थ संगठन की एक रिपोर्ट के आंकड़ें बताते हैं कि भारत के कुल गांवों में मात्र 43.5 प्रतिशत गांव ही ऐसे हैं जहां मात्र एक डॉक्टर है। यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने के लिए काफी है। ऐसे में आईक्योर विभिन्न नवीनतम तकनीकों द्वारा लोगों का इलाज करता है।

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वायरलेस हेल्थ इनसीडेंट मॉनीटरिंग सिस्टम यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जिसे आईक्योर इस्तेमाल करता है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से आईक्योर ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली आम बीमारियों का डाटा रखता है इसके अलावा इस सॉफ्टवेयर से सभी डॉक्टर्स भी जुड़े रहते हैं। साथ ही इसमें मरीजों का रिकॉर्ड भी रखा जाता है। इसमें विडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी है और इसमें मरीज़ों के सारे पुराने रिकॉर्ड भी रखे जाते हैं जिससे डॉक्टर्स को इन केसेज को समझने में मदद मिलती है।

आईक्योर के पास धन अर्जित करने के दो तरीके हैं। पहला मरीजों से ली जाने वाली न्यूनतम फीस और दूसरा मरीजों का इलाज करने के दौरान ली जाने वाली फीस।

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आईक्योर आने वाले समय में अपना विस्तार करना चाहता है और ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों तक अपनी पहुंच बनाना चाहता है। जिस तरह से आईक्योर सर्विसेज की डिमांड लगातार बढ़ रही है उस डिमांड को पूरा कर पाना भी अब अपने आप में आईक्योर के लिए चुनौती बन गया है। इसके अलावा दूर दराज के कई ऐसे क्षेत्रों में पहुंच बनाना जहां बिजली व पानी तक की सुविधा नहीं है वहां काम करना भी आईक्योर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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आईक्योर की टीम 24 घंटे काम करती है और लोगों की मदद में जुटी रहती है। डॉक्टर्स के अलावा इनके पास और भी कई विशेषज्ञों की टीम है जो ऐसे सुदूर क्षेत्रों में काम करना मुमकिन बना रहे हैं। आईक्योर के पास कई सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं जो इनके सॉफ्टवेयर अप ग्रेड करते हैं। इसके अलावा कुछ पॉलिसी विशेषज्ञ हैं जो आईक्योर के विस्तार के लिए कार्यक्रम बनाते हैं। आईक्योर की भविष्य के लिए योजनाएं तैयार करते हैं। कंपनी के पास अब 28 आरएचसी भी हैं और कई जिलों में इनके डॉक्टर्स फैले हुए हैं। आईक्योर अब उड़ीसा, बिहार, असम और पूर्वी भारत में विस्तार की योजना पर काम कर रही है।

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सुजय मानते हैं कि भविष्य में जीत का स्वाद वही चख सकता है जिसने हार भी देखी हो और उसे स्वीकार कर उससे सीख भी ली हो। यही सुजय की सफलता का मंत्र है।

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