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युवा विचारों को आवाज़ देता है "यूथ कनेक्ट"

इस नवाचार के पीछे एक मात्र दृष्टिकोण, घटनाओं, प्रतिभा और सामग्री के संदर्भ में शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र को एकीकृत करना था

Prakash Bhushan Singh
26th Jul 2015
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कुछ कॉलेज, संस्थान, और विश्वविद्यालयों को उनको लोकप्रियता, जरूरत और स्थान के आधार पर चुनकर "यूथ कनेक्ट प्लस नेटवर्क" youthconnectmag.com के तहत कोई भी अनिवार्य लागत वसूल किये बिना शैक्षिक संस्थान विशिष्ट पत्रिकाओं का निर्माण करने का लक्ष्य कर रहा है.

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"यूथ कनेक्ट" की शुरुआत २०१२ में राहुल बाघचन्दानी और दिवेश अश्वनी द्वारा युवाओं के विचारों को आवाज़ देने के लिए प्रिंट और डिजिटल मंच के रूप में की गयी थी.

“यह मेरे और राहुल के बीच एक सतही फेसबुक वार्तालाप था, पर आगे हमदोनो ने विमर्श किया कि वैसे तो बहुत सारी घिसी-पिटी सामग्री बाजार में उपलब्ध है लेकिन युवाओं के लिए भी कुछ सामग्री होनी चाहिए." सह-संस्थापक और सीईओ दिवेश अश्वनी कहते हैं.

“आम धारणा के विपरीत, हमने पाया कि युवा पढ़ना तो चाहता है, लेकिन पढ़ने के लिए उसके पसंद की योग्य सामग्री उपलब्ध नहीं है." राहुल लेखन और ब्लॉगिंग से जुड़े थे जबकि मैं डिजाइनिंग में अच्छा था और इस प्रकार हमारी एक अच्छी टीम बन गयी." वो जोड़ते हैं.

इस जोड़ी ने २०१० में इस पर काम शुरू कर दिया, जब भागचंदानी ने अपनी स्कूली पढाई पूरी की और दिवेश गुजरात तकनीनकी विश्वविद्यालय से अपने इन्जीनीरिंग स्नातक के पहले साल में थे. बाद में विश्वविद्यालय ने अपने "स्टूडेंट स्टार्टअप सपोर्ट सिस्टम (S4)" के अंतर्गत उनके इस उद्यम का पोषण किया.

इस नवाचार के पीछे एक मात्र दृष्टिकोण, घटनाओं, प्रतिभा और सामग्री के संदर्भ में शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र को एकीकृत करना था. साथ-साथ,यह शैक्षिक संस्थानों को अपनी सार्वजनिक छवि के उन्नयन और मुफ्त जन संपर्क गतिविधियों के लिए एक अवसर देता है.

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अक्सर, संस्थानों की मौजूदा वेबसाइटें पूरी तरह से दाखिले और परिणाम के लिए ही बनायीं जाती हैं. लेकिन "यूथ कनेक्ट" के माध्यम से कॉलेज या संस्थान के प्रधानाचार्य, छात्र समिति या किसी भी छात्र या शिक्षक का सन्देश, विचार या और भी बहुत कुछ साझा किया जा सकता है.

"यूथ कनेक्ट" की विशेषतायें:

• पूरी तरह कार्यशील सामग्री प्रबंधन प्रणाली

• अनुकूलित सामग्री

• संपादकीय सहायता

• एकीकृत मंच

• पूरी तरह से मुफ्त

वर्तमान में, वो विभिन्न कॉलेजों और अन्य संस्थाओं से समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए संपर्क कर रहे है. उन्होंने महानगरों से शुरुआत की है और धीरे-धीरे छोटे शहरों तक विस्तार करने की उनकी योजना है. सह-संस्थापक और एडिटर-इन- चीफ भागचंदानी कहतें है -

" कुछ प्रशासक हैं जो अपने कॉलेज को अगले स्तर तक ले जाने के लिए कोशिश कर रहे हैं. उनके लिए पाठक आधार वाले एक नेटवर्क के तकनीकी रखरखाव में सहयोग, उन्हें इसके लिए एक अच्छी दिशा देगा. इसलिए, हमें इसके उप-डोमेन होने में कोई परेशानी नहीं है"

इसके अलावा, यूथ कनेक्ट का उप डोमेन संस्थानों को प्रोत्साहित करने के लिए मुफ्त में उपलब्ध कराया गया है.अगले 18 महीनों में,काफी संख्या में शैक्षिक संस्थानों के इसमें शामिल होने की उम्मीद है. इसके अलावा, तब तक उन्हें कुछ प्रतियोगिता का भी अनुमान है. "क्योंकि इस साइट और इस विचार को दोहराना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है" भागचंदानी कहते हैं.

"प्रिंट कारोबार में शुरुआत करना जब यह उद्योग सही हालत में नहीं हो शायद सबसे जोखिम का काम था जो कि हमने किया लेकिन इस जोखिन से क्या फायदा हुआ वह एक अलग कहानी है." भगचनदानी कहते हैं.

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"यूथ कनेक्ट" का प्राथमिक राजस्व का स्रोत बैनर, विज्ञापन और प्रायोजित कहानियाँ है. एक लंबी अवधि के आधार पर, "हम इस मंच का उपयोग कर के अंतर-संस्थान स्पर्धा के संचालन की योजना बना रहे हैं. दो साल से इस में होने के नाते, हमारे पास विज्ञापनदाताओं के रूप में ठोस ग्राहक हैं जो कि "युथ कनेक्ट" जैसे एक मंच पर विज्ञापन करने के लिए तैयार हो जायेंगें और जो हमारे विज्ञापन के राजस्व को तेजी से बढ़ाने में मदद करेगा– और जो अनतः इस पूरे मॉडल को स्थायित्व देने में हमें मदद करेगा.

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