संस्करणों
विविध

लड़कियों को क्यों आती है मूंछ?

पीसीओडी डिसअॉर्डर की वजह से लड़कियों को आती है मूंछ...

12th Jun 2017
Add to
Shares
38
Comments
Share This
Add to
Shares
38
Comments
Share

चेहरे पर बाल उग आना, बार-बार मुहांसे होना, पिगमैंटेशन, अनियमित रूप से पीरियड्स का होना और गर्भधारण में मुश्किल होना महिलाओं के लिए खतरे की घंटी है। ये सभी लक्षण पीसीओडी के हो सकते हैं। क्या आप जानते हैं पीसीओडी के बारे में? नहीं, तो आईये जानें, क्या है पीसीओडी, इसके खतरे और समाधान भी... 

image


पीसीओडी यानी ‘पोलीसिस्टिक ओवरी डिस्ऑर्डर’। पीसीओडी हार्मोन सम्बंधित एक समस्या है जिसमें महिला में स्त्री यौन हार्मोन का असंतुलन हो जाता है जिससे महिला को कई प्रकार के लक्षण उत्पन्न होते हैं। इस स्थिति की अधिकतर महिलाओं की अंड ग्रंथियों में कई छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाएं होती हैं। इस स्थिति के कारण मासिक चक्र में परिवर्तन, गर्भधारण में कठिनाई और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अपने स्वास्थ्य की अनदेखी कर देती हैं, जिसका खमियाजा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है। लड़कियों को पीरियड्स शुरू होने के बाद अपने स्वास्थ्य पर खासतौर से ध्यान देने की आवश्यकता होती है। महिलाओं के चेहरे पर बाल उग आना, बारबार मुहांसे होना, पिगमैंटेशन, अनियमित रूप से पीरियड्स का होना और गर्भधारण में मुश्किल होना महिलाओं के लिए खतरे की घंटी है। ये सभी लक्षण पीसीओडी के हो सकते हैं।

पीसीओडी यानी ‘पोलीसिस्टिक ओवरी डिस्ऑर्डर’। पीसीओडी हार्मोन सम्बंधित एक समस्या है, जिसमें महिला में स्त्री यौन हार्मोन का असंतुलन हो जाता है और उसमें कई प्रकार के लक्षण उत्पन्न होते हैं। इस स्थिति की अधिकतर महिलाओं की अंड ग्रंथियों में कई छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाएं होती हैं। इस स्थिति के कारण मासिक चक्र में परिवर्तन, गर्भधारण में कठिनाई और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उचित ज्ञान न होने व पूर्ण चिकित्सकीय जांच न होने की वजह से महिलाएं इस समस्या से जूझ रही हैं। पीसीओएस स्टडी के मुताबिक, हर 10 में एक औरत को ये सिंड्रोम होता है। इन 10 में से 6 टीनएज लड़कियां होती हैं। एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ एंडोक्रॉइनॉल्जी एंड मेटाबॉलिज्म की स्टडी के मुताबिक, "बच्चा पैदा करने की उम्र वाली 20 से 25 % औरतों में पीसीओएस के लक्षण पाए गए। पीसीओएस झेल रही 60% औरतें मोटापे का शिकार हैं और 30 से 40 % औरतें फैटी लिवर से पीड़ित हैं। 70 % औरतों का ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है। 60 से 70 % में एस्ट्रोजन का स्तर ज्यादा है।"

"इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने देश भर में पीसीओएस को लेकर सर्वे कराया। जिसमें पाया गया कि ये समस्या औरतों में और बढ़ रही है।"

पीसीओडी का बढ़ने कारण इसकी जानकारी का न होना है। डॉक्टरों के पास जाने में शर्म या गुप्त अंगों के रोगों को लेकर लोग इतने संवेदनशील हैं, कि आपस में ज़िक्र तक नहीं करते। पर अब ज़रुरत है कि हम शर्म छोड़ कर खुल कर बात करें और अपने से जुड़ी हर बदलाव को समझे और कुछ भी अगल या परेशानी होने पर डॉक्टरों की सलाह लें। सिर्फ डॉक्टरों ही क्यूं न हम आपस में इसकी जानकारी रखें और आपस में साझा करें। ताकि अब कोई भी स्त्री ज्ञान के अभाव में प्रताड़ना को न सहे। खुद को जांचे, खुद को समझे क्योंकि यह सिर्फ आपका शरीर नहीं, आपका मंदिर है।

ये भी पढ़ें,

मोटापा कम करने के कुछ आसान तरीके

पीसीओडी को और बेहतर तरीके से समझने के लिए हमने डॉ. मीरा सेठी (तीर्थराम शाह हॉस्पिटल, दिल्ली) से बात की। डॉक्टर मीरा जो एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और पिछले 15 वर्षों से इसी क्षेत्र में काम कर रहीं हैं।

पीसीओडी क्या है?

डॉक्टर- यह एक हार्मोनल डिसऑर्डर है। पीरियड्स के पहले और बाद में महिलाओं के शरीर में बहुत तेज़ी से हार्मोन में बदलाव आते हैं जो कई बार इस बीमारी का रूप ले लेते हैं। पीसीओडी प्रजनन योग्य महिलाओं (12-45 वर्ष) के उम्र के किसी भी स्त्री को हो सकता है। हर महीने महिलाओं की दाईं और बाईं ओवरी में पीरियड्स के बाद दूसरे दिन से अंडे बनने शुरू हो जाते हैं। ये अंडे 14-15 दिनों में पूरी तरह से बन कर 18-19 मिलीमीटर साइज के हो जाते हैं। इस के बाद अंडे फूट कर खुद फेलोपियन ट्यूब्स में चले जाते हैं और अंडे फूटने के 14वें दिन महिला को पीरियड्स शुरू हो जाता है। लेकिन कुछ महिलाओं, जिन्हें पीसीओडी की समस्या है, उनमें अंडे तो बनते हैं पर फूट नहीं पाते जिस की वजह से उन्हें पीरियड्स नहीं आता। ऐसी महिलाओं को 2 से 3 महीनों तक पीरियड्स नहीं आने की शिकायत रहती है। ऐसे हालात में फूटे अंडे ओवरी में ही रहते हैं और एक के बाद एक उन से सिस्ट बनती चली जाती हैं। लगातार सिस्ट बनते रहने से ओवरी भारी लगनी शुरू हो जाती है। इसी ओवरी को पोलीसिस्टिक ओवरी डिस्ऑर्डर (पीसीओडी) कहते हैं।

ये भी पढ़ें,

होम्योपैथी बनाये दिल को मजबूत

पीसीओडी के लक्षण क्या है?

डॉक्टर- प्रजनन की योग्यता में कमी, अनियमित मासिक चक्र, अत्यधिक मुहांसे, पेट दर्द, पिगमेंटेशन, यौन इच्छा में कमी, बार-बार गर्भपात, सिर के बाल झड़ना, चेहरे के बाल, मोटापा, इन्सुलिन प्रतिरोध और उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर- ये सब पीसीओडी के लक्षण हैं। अल्ट्रासाउंड किये जाने पर अंडग्रंथियों में कई थैलीनुमा रचनाओं का मिलना सबसे आम लक्षण है।

किन वजहों से पीसीओडी होता है?

डॉक्टर- पीसीओडी की मुख्य वजहों में होता है इन्सुलिन प्रतिरोध और अनुवांशिक रूप से माता या पिता द्वारा भी आ जाता है। पीसीओडी होने के कुछ करणों में जीवन शैली का बड़ा योगदान माना जा रहा है। भागदौड़ वाली जीवनशैली, अनियमत खान पान, एक्सरसाइज न करना, ज्यादा जंक फूड का सेवन जिससे मोटापा बढ़ता है। मोटपा बढ़ने से फेट एसिड की मात्रा बढ़ती है। मोटापा बढ़ने से शरीर में मेल हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है। जिसके कारण इन्सुलिन प्रतिरोध आने लग जाता है।

पीसीओडी कितना खतरनाक है?

डॉक्टर- काफी खतरनाक है, क्योंकि यदि इसे समय से कंट्रोल नहीं किया गया भविष्य में काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पीसीओडी से प्रभावित स्त्रियों में डायबिटीज, मेटाबोलिज्म में असंतुलन, बांझपन, उच्च रक्तचाप और हृदय से जुड़े रोगों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

कई लोगों का मानना है कि लड़कों के कपड़े पहनने से भी पीसीओडी होता है। यह कहां तक सच है?

डॉक्टर- यह सरारसर गलत भ्रांति है। पीसीओडी का लड़कों के कपड़े पहनने से कोई ताल्लुक नहीं है। पीसीओडी के बारे में सही जानकारी न होने के कारण ऐसी अफवाहों को बढ़ावा मिलता है।

ये भी पढ़ें,

संभल कर खायें जंक फूड! हो सकती है पथरी

पीसीओडी को कंट्रोल करने के लिए क्या करना चाहिए?

डॉक्टर- लाइफस्टाइल में बदलाव लाएं। रेगुलर एक्सरसाइज और वर्कआउट करें। अपने खान-पान का ख्याल रखें और नियमित आहार लें। एक्सरसाइज़ को अपनी जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाएं। अधिक मात्रा में पानी पिएं और फल और सब्जियां खूब खाएं। ज्यादा मुंहासे, अनियमित पीरियड्स, एक दम से वजन के बढ़ना, शरीर पर अनचाहें बालों के बढ़ना, इन सभी लक्षणों को देखते ही डॉक्टर से सम्पर्क करें। डॉ इन्सुलिन प्रतिरोध को समान्य करने के लिए दवाइयां देते है और पीरियड्स को रेगुलर करने के लिए दवाइयों का सहारा लिया जाता है।

पीसीओडी के अलावा ऐसे कौन से दूसरे डिस्ऑर्डर है जिसके बारे में स्त्रियों को जानकारी कम है?

डॉक्टर- पीसीओडी के अलावा वर्जिनिया इंफेक्शन, वर्जिनिया इंफेक्शन पीसीओडी के बाद सबसे खतरनाक डिस्ऑर्डर है। रोज़मर्रा की अनियमित जीवनशैली इसका मुख्य कारण माना जाता है। इसमें इंफेकशन की स्थिती समय के साथ साथ बढ़ती जाती है। इसमें वर्जाइन पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

-प्रज्ञा श्रीवास्तव

Add to
Shares
38
Comments
Share This
Add to
Shares
38
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags