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अब किजीए फ्युनरल मॅनेजमेंट

अंतिम संस्कार और बरसी तक का पुरा मॅनेजमेंट सुखांत संभालती है, अकेले रहनेवाले वृद्धों के लिए सुखांत जैसी सेवा कारगर साबित हो रही है शरीर दान से जुडी एक बडी मुहिम भी सुखांत ने शुरू की हैl इसके लिए वो लोगों मे जनजागृती ला रहे है

Roshani Dubey
13th May 2016
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मृत्यू... जीवन का वो सच, जिसका सामना एक ना एक दिन सब भी को करना हैl लेकिन मौत का नाम सुनतेही सबको डर लगता हैl जब कोई इस दुनिया में आता है तो सब तरफ खुशी की लहर दौडती हैl पर जब मौत का सामना होता है या कीसी दुर्घटनावश किसीकी मौत हो जाती है, तो सब तरफ मातम छा जाता हैl ऐसे वक्त परिवार के लोगों को कुछ समझ नही आता की अब क्या करे, तब किसे बुलाए क्या करें, कुछ समझ नही आता, सब तरफ माहौल में मायुसी छा जाती हैl अपना कोई जिसे हम बहोत प्यार करते थे वो अब इस दुनिया में नही है, बस ये खयाल अंदर ही अंदर हमें खाने लगता हैl दुसरी तरफ मुंबई और महानगरों में अकेले रहनेवाले वृद्धों की संख्या बढती जा रही हैl कभी खुद की मर्जी से, कभी हालात से मजबुर, तो कभी किसी का बोझ न बनने के कारण वो अकेला रहना ही पसंद करते हैl अगर ऐसे वक्त उनका देहान्त हो जाए तो परिवार के लोगों को कौन बताएगा? उनका अंतिम संस्कार कौन करेगा? इसी सोच को सामने रखते हुए मुंबई के संजय रामगुडे, पुंडलिक लोकरे और भारती महेश चव्हाण ने अंतिम संस्कार मॅनेजमेंट यानी फ्युनरल मॅनेजमेंट करनेवाली कंपनी की स्थापना की हैl जिसका नाम उन्होने सुखांत फ्युनरल मॅनेजमेंट रखा हैl ये कंपनी फ्युनरल का पुरा मॅनेजमेंट संभालती हैl किसी की मौत होने बाद परिवार के लोगों को बुलाने से लेकर, अंतिम संस्कार और बरसी तक का पुरा मॅनेजमेंट सुखांत संभालती हैl

संजय रामगुडे कहते है, "सुखांत ने तीन हजार लोगों का सर्वेक्षण किया है" उसमे से ७० प्रतिशत लोग अकेले रहते हैl जिनके बच्चे, रिश्तेदार विदेश मे रहते हैl इन सब लोगों की हालात देखते हुए इनके साथ कभी भी कुछ भी हो सकता हैl ऐसे वक्त सुखांत की जरूरत पडती हैl हम अंतिम संस्कार से लेकर रिश्तोदारों को बुलाने तक और जो फ्युनरल में नही आ सकते उनको फोटो भेजने तक की सभी जिम्मेदारींया निभाते हैl

भागदौड भरी जिंदगी की वजह से हमारे आसपास का माहौल आर्टीफिशीअल बनता जा रहा हैl एक दुसरे से बात करने के लिए हमारे पास वक्त ही नहीl लाईक और कमेंट की दुनिया में हम एक दुसरे से खुलकर बात नही कर रहे हैl ऐसे वक्त अकेले रहनेवाले वृद्धों के लिए सुखांत जैसी सेवा कारगर साबित हो रही हैl 

कैसे काम करता है सुखांत...

सुखांत के साथ आपको एक अॅग्रीमेंट करना पडता हैl दस हजार सात सौ से लेकर तीस हजार तक का कोई भी पॅकेज आप अपनी सुविधानुसार ले सकते हैl

इस हिसाब से सुखांत आपके अंतिमसंस्कार का मॅनेजेंट करती हैl इसमें अँम्ब्युलन्स लाने से लेकर अंतिमसंस्कार का सामान, अर्थी उठाने के लिए लोग, पंडित जी को बुलाने से लेकर अंतिमसंस्कार होने के बाद मृत्यूप्रमाणपत्र देने तक सभी काम सुखांत संभालती हैl

समशान भुमी में होनेवाली सभी कठीन कागजी प्रक्रीया सुखांत करती हैl इस हिसाब से सुखांत आपके अंतिमसंस्कार का मॅनेजेंट करती हैl इसमें अँम्ब्युलन्स लाने से लेकर अंतिमसंस्कार का सामान, अर्थी उठाने के लिए लोग, पंडित जी को बुलाने से लेकर अंतिमसंस्कार होने के बाद मृत्यूप्रमाणपत्र देने तक सभी काम सुखांत संभालती हैl के लिए आनेवाले रिश्तेदारोंके पानी देने से लेकर उन्हे समशान भुमी तक लाने का काम सुखांत करती हैl

सुखांत ने अंतिमसंस्कार का मॅनेजमेन्ट करते समय एक नयी तरकीब भी निकाली हैl अगर आप सुखांत के इस सर्वीस का शुरुवात से ही पंजीकरण करवाते है तो सुखांत एक छोटी फिल्म बनाकर, मरने वाले व्यक्ती की आखरी इच्छा को भी आप तक पहूंचाने का काम करती हैl

मृत्य के बाद दस साल तक बरसी की याद दिलाने का काम भी सुखांत करता हैl जयंती और पुण्यतिथी का रिमांईंडर भी रिश्तेदारों को भेजा जाता हैl

सुखांत सिर्फ अंतिमसंस्कार और उससे जुडे कामों में ही काम नही करती बल्कि शरीर दान से जुडी एक बडी मुहिम भी सुखांत ने शुरू की हैl इसके लिए वो लोगों मे जनजागृती ला रहे हैl अब तर ढाई हजार से ज्यादा लोगों ने सुखांत में अपना पंजीकरण किया हैl

ऊपर -ऊपर से देखें तो ये सब बडा अजीब लगता है पर सुखांत आज की जरूरत हैl जब इन्सान सिर्फ अपने आप में ही जी रहा हैl दुनिया सिमटकर अपने में समा रही हैl ऐसे वक्त सुखांत आपको अपने लोगों के करीब ले जा रहा हैl यही सत्य हैl

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