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डिस्कवरी चैनल की नौकरी छोड़ खोला फूड स्टार्टअप, विदेशी फ़्लेवर्स को दिखा रहीं भारत का रास्ता

इस महिला ने खाने-पीने के शौक के चलते टीवी इंडस्ट्री की अपनी ग्लैमरस जॉब को छोड़ दिया...

31st Jul 2018
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भारत लौटकर श्रद्धा डिस्कवरी चैनल के साथ जुड़ी रहीं। लंबे प्रोफ़ेशनल अनुभव के बाद श्रद्धा को महसूस हुआ कि उनका असली पैशन तो फ़ूड इंडस्ट्री में ही है। श्रद्धा हमेशा से ही खाने-पीने की शौक़ीन रही हैं और 2007 में यूएस से भारत लौटने के बाद उन्हें कुज़ीन्स के फ़्लेवर में काफ़ी अंतर देखने को मिला।

श्रद्धा अग्रवाल

श्रद्धा अग्रवाल


फ़ूड इंडस्ट्री में बिज़नेस करने के लिए सिर्फ़ खाने-पीने का शौकीन होना काफ़ी नहीं, बल्कि आपको इसकी बारीकियों के बारी में सही जानकारी होनी चाहिए। नौकरी छोड़ने के बाद श्रद्धा ने कुछ वक़्त तक फ़्रीलांस काम किया। 

आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने खाने-पीने के शौक के चलते टीवी इंडस्ट्री की अपनी ग्लैमरस जॉब को छोड़ दिया। श्रद्धा की करियर ग्रोथ कमाल की थी और वह अमेरिका में हॉलिवुड में भी काम कर चुकी थीं, लेकिन देश वापस लौटने के बाद उन्हें यहां के फ़ूड कल्चर और मार्केट में कई ऐसी कमियां दिखीं कि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर 'मिस छोटीज़' नाम से एक फ़ूड प्रोडक्ट्स ब्रैंड लॉन्च किया।

भारत लौटकर श्रद्धा डिस्कवरी चैनल के साथ जुड़ी रहीं। लंबे प्रोफ़ेशनल अनुभव के बाद श्रद्धा को महसूस हुआ कि उनका असली पैशन तो फ़ूड इंडस्ट्री में ही है। श्रद्धा हमेशा से ही खाने-पीने की शौक़ीन रही हैं और 2007 में यूएस से भारत लौटने के बाद उन्हें कुज़ीन्स के फ़्लेवर में काफ़ी अंतर देखने को मिला।

श्रद्धा बताती हैं, "मैं दिनभर की थकान के बाद जब घर पहुंचती थी, तब मुझे घर का परंपरागत भारतीय खाना बिल्कुल पसंद नहीं आता था। ग्राहकों और उपभोक्ताओं की प्राथमिकता में बदलाव हो रहा था। प्रवासी भारतीयों का एक बड़ा कुनबा था, जो देश लौट रहा था और उसकी प्राथमिकता थी, प्रेज़रवेटिव फ़्री फ़ूड। अपने काम के दौरान मेरी मुलाक़ात फ़ूड इंडस्ट्री के कई दिग्गजों से हो चुकी थी और मुझे समझ आ गया था कि इस क्षेत्र में बिज़नेस के लिहाज से अपार संभावनाएं हैं।"

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फ़ूड इंडस्ट्री में बिज़नेस करने के लिए सिर्फ़ खाने-पीने का शौकीन होना काफ़ी नहीं, बल्कि आपको इसकी बारीकियों के बारी में सही जानकारी होनी चाहिए। नौकरी छोड़ने के बाद श्रद्धा ने कुछ वक़्त तक फ़्रीलांस काम किया। इस वक़्त का ही एक वाक़या साझा करते हुए श्रद्धा बताती हैं कि वह एक बार गोवा के एक इटैलियन रेस्तरां में अपनी बहन के साथ डिनर करने गई थीं। श्रद्धा को वह रेस्तरां काफ़ी पसंद आया। अगले ही दिन उनकी बहन ने उनसे रेस्तरां में काम करने की बात कही और श्रद्धा को यह ख़्याल काफ़ी पसंद आया। उन्होंने तत्काल ही रेस्तरां के मालिक से बात की, जो उनकी बात सुनकर काफ़ी हैरान हुआ क्योंकि श्रद्धा टीवी इंडस्ट्री का ग्लैमरस करियर छोड़कर ऐसे काम में हाथ आज़माना चाहती थीं।

गोवा के इस रेस्तरां में, श्रद्धा ने आलू की बोरियां उठाने से लेकर तरह-तरह की डिशेज़ बनाने तक के सभी काम किए और बहुत कुछ सीखा। सीखने का यह समय दो महीनों तक चला। इसके बाद श्रद्धा ने एशिया सेवन (ऐंबियंस मॉल, गुड़गांव), कोलाबा (मुंबई) के कैलिफ़ोर्नियन रेस्तरां द टेबल में भी काम किया। दिनभर की मेहनत के बाद इन बड़े रेस्तरां के खाने से भी श्रद्धा संतुष्ट नहीं थीं। वजह यह थी कि जिस तरह के मसाले और सॉस यूएस में वह खाती थीं, वे अभी भी भारत तक नहीं पहुंच सके थे। इसके बाद ही उन्होंने तरह-तरह के सॉसेज़ के साथ प्रयोग करना शुरू किया और अक्टूबर 2012 में उन्होंने मिस छोटीज़ ( Miss Chhotee’s)की शुरुआत की।

'मिस छोटीज़' नाम के पीछे की सोच को स्पष्ट करते हुए श्रद्धा कहती हैं, "छोटी एक ऐसा नाम है, जो आपको भारत के लगभग हर घर में सुनने को मिल जाएगा। साथ ही, इस नाम को सुनते ही आपके ज़हन में एक भावुक और मस्त-मौला शख़्सियत की तस्वीर बनती है, जो हर काम को मुस्कुराते हुए करती हो।" श्रद्धा ने अपने ब्रैंड के तहत 2012 में चार तरह के सॉसेज़ लॉन्च किए- ओलिव टेपेनेड, पेरी पेरी सॉस, करी मेयेनिज़ और पेस्तो।

श्रद्धा का कहना है कि उन्होंने घर से ही अपने स्टार्टअप की शुरुआत की और जब पर्याप्त ऑर्डर मिलने लगे, तब लगभग दो हफ़्तों बाद उन्होंने वसंत विहार के मॉडर्न बाज़ार से स्टॉक रखने की बात की। कुछ समय बाद उन्होंने एक कंपनी रजिस्टर कराई और एक छोटी सी टीम के साथ काम करना शुरू किया। थोड़ी ही वक़्त में उनके स्टार्टअप के प्रोडक्ट्स ल मर्के, फ़ूड हॉल और स्पेन्सर्स जैसे बड़े स्टोर्ट पर उपलब्ध होने लगे।

मिस छोटीज़ की प्रोडक्ट रेंज में अब स्पिनैच लैवाश क्रिस्प्स, हर्ब्ड लैवाश क्रिस्प्स, क्लासिक लैवाश क्रिस्प्स और बीटरूट लैवाश क्रिस्प्स भी शामिल हैं। हाल ही में अटल इनक्यूबेशन सेंटर द्वारा बनस्थली विद्यापीठ में आयोजित हुए वी स्प्रिन्ट प्रोग्राम में भी श्रद्धा ने अपने स्टार्टअप के लिए पिचिंग की थी। श्रद्धा बताती हैं, "6 साल बाद भी मैं यह नहीं कह सकती कि हम अपने बिज़नेस को ब्रेक इवेन की स्थिति तक पहुंचा पाए हैं, लेकिन हम उस स्थिति के काफ़ी करीब हैं। रीटेल इंडस्ट्री काफ़ी जटिल होती है और मैं अपने ब्रैंड को आगे ले जाने के लिए फ़ंडिंग और मेंटरशिप, दोनों ही की तलाश कर रही हूं।"

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