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आप अपनी पुरानी चीज़ दीजिए और ज़रुरत की दूसरी चीज़ लीजिए 'प्लैनेट फॉर ग्रोथ' पर

Harish Bisht
14th Mar 2016
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कभी आपने सोचा कि जिस चीज को हम कई बार इस्तेमाल करने के बाद यूं ही फेंक देते हैं, हो सकता है कि वो किसी दूसरे के काम आ जाये, या फिर घर के किसी कोने में रखा कोई समान जो आपके के लिये फिजूल का हो गया हो, वो किसी दूसरे के लिए काफी महत्वपूर्ण हो। खास बात ये कि अगर आप अपने उस समान को किसी दूसरे व्यक्ति को दें और वो आपको बदले में अपना कोई समान दे जो आपके लिये काफी काम का हो, तो कितना मजा आ जाए। ऐसे में दोनों की जरूरत तो पूरी होगी ही, साथ ही इस प्रक्रिया में पैसे का कोई लेनदेन भी नहीं होगा। 'प्लैनेट फॉर ग्रोथ' एक ऐसा ही प्लेटफॉर्म है जिसे शुरू किया है वरूण चंदौला ने।


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वरूण चंदोला की शुरूआती पढ़ाई हल्द्वानी में हुई है। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो दिल्ली आ गये। यहां पर दिल्ली यूनिवर्सिटी से उन्होंने ग्रेजुएशन किया और इसके बाद एमबीए किया। उन्हें शुरू से ही संगीत, तबला और सामाजिक कार्यो से बहुत लगाव था। इस दौरान वो उन लोगों के लिए काम करना चाहते थे जो समाज की मुख्यधारा से पीछे कहीं छूट गये हों।

वरूण बताते हैं,

"एक दिन मुझे अचानक वस्तु विनिमय प्रणाली का ध्यान आया। मैंने सोचा कि पुराने जमाने में जब लोगों के पास पैसा नहीं था तब वो आपस में वस्तुओं का आदान प्रदान कर अपनी जरूरतों को पूरा करते थे। इस काम को वे बड़ी आसानी से और बिना वाद विवाद के किया करते थे। तब हम क्यों नहीं कर सकते हैं। इसी सोच के साथ जनवरी 2015 को मैंने ‘प्लैनेट फांर ग्रोथ’ को रजिस्टर्ड किया और नवंबर 2015 से इसने काम करना शुरू कर दिया है।"


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वरूण ने योर स्टोरी को बताया- 

“आज लोग अपनी उन वस्तुओं को फेंक देते हैं जो कि उनके इस्तेमाल की नहीं होती। मैंने सोचा कि आज जो वस्तु हमारे काम की नहीं है वह दूसरे व्यक्ति के लिए काम की हो सकती है, क्यों न हम एक ऐसा सामाजिक प्लेटफार्म बनाएं जिसमें की वस्तुओं की अदला बदली हो सके।” 

तब उन्होंने एक ऐसा प्लेटफार्म बनाया जिसमें वस्तु विनिमय के माध्यम से दूसरों की मदद की जा सके और दूसरा उनकी बनाई वस्तुओं को खरीदकर उन्हें रोजगार दे सकें।


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‘प्लैनेट फांर ग्रोथ’ के काम करने के तरीके के बारे में वरूण का कहना है कि इस प्लेटफार्म के जरिये कोई भी व्यक्ति अपना और दूसरा, दोनों का भला कर सकता है। उनका कहना हैं कि बाजार में रोज नया सामान आ रहा है। इसलिए लोग पुराने सामान को छोड़ नया सामान ले लेते हैं, लेकिन यही पुराना सामान किसी दूसरे के लिए काम का हो सकता है। इस प्लेटफार्म में हम सामानों की अदला बदली भी करते हैं। वे बताते हैं इसके जरिये लोग किताब, जूते, बैग, कपड़े आदि समान की अदला बदली ही नहीं कर सकते बल्कि अपनी सेवाओं का भी आदान प्रदान कर सकते हैं। जैसे कोई विदेशी भाषा सीखना चाहता है जैसे की रशियन, फ्रेंच या कोई दूसरी तो वो वैबसाइट के जरिये इसे दूसरे व्यक्ति से इसे सीख सकता है। इतना ही नहीं वो खाना बनाने की रैसिपी या अपने दूसरे हुनर को लोगों के साथ साझा कर सकता है।


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‘प्लैनेट फांर ग्रोथ’ एक सामाजिक प्लेटफार्म है जहां पर कोई भी कहीं से भी बैठकर ग्रामीण महिलाओं की बनाई वस्तुएं और ऑरगेनिक सामान को खरीद सकता है। वरूण अपनी वैबसाइट और फेसबुक के जरिये लोगों को जागरूक कर उनसे कहते हैं कि वे गैर जरूरी चीजों को दूसरों देकर मदद करें। इसके अलावा वे कई होटल वालों से बात कर रहें हैं ताकि वे अपने बचे खाने को न फेंके बल्कि इनके जरिये वे उस खाने को गरीब लोगों तक पहुंचा दें। वरूण कहते हैं, 

“मैं लोगों से ये नहीं कहता कि आप अपना पेट काट कर लोगों की मदद करो। मैं उनसे कहता हूं कि जो आपके इस्तेमाल की नहीं है उसे आप दान कर दूसरों की मदद करें।” 

वरूण बताते हैं कि अभी उनका उत्तराखण्ड सरकार के साथ एक समझौता हुआ है जिसमें उनकी संस्था उन संगठनों और एनजीओ से हैंडीक्राफ्ट का सामान खरीदेगी और अपनी वैबसाइट के जरिये उस समान को देश-विदेश में बेचेगी। अभी तक इनकी वैबसाइट से रूस, ब्राजील, टर्की, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश के एनजीओ जुड़ चुके हैं।

वरूण अपनी वेलफेयर शॉप को अप्रैल में लांच कर रहे हैं। उन्होने बताया कि उनकी ये शॉप फिलहाल ऑनलाइन ही है। ये वैबसाइट आम वैबसाइट की तरह नहीं है जिसमें सिर्फ सामान ही बेचा जाता है। वे बताते हैं कि अभी वे सरकारी अफसरों के साथ उत्तराखण्ड के कई इलाकों में गये और वहां उन्होने देखा कि महिलाएं कितनी मेहनत से अपना सामान बनाती हैं लेकिन बाजार में वे इसे नहीं बेच पातीं। वरूण कहते हैं कि वे वैलफेयर शॉप के जरिये लोगों को ये भी बतायेंगे की किन लोगों ने इसे कितनी मेहनत से तैयार किया हैं ताकि लोग इन उत्पादों को खरीदने के लिए तैयार हों।


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हाल ही में वरूण और उनकी टीम ने ‘हर पैर चप्पल’ नाम से एक अभियान चलाया जिसमें 1 हजार बच्चों को इन्होंने नई चप्पले पहनाई। इस प्रोगाम को ये अब और विस्तार देना चाहते हैं इसके लिए 'रिलेक्सो' कंपनी के साथ इनकी बातचीत अपने अंतिम चरण में है। इस बार इनकी योजना देश के विभिन्न भागों में करीब 10 हजार लोगों को चप्पल पहनाने की है। ये लोगों को जागरूक करते हैं कि वे अपने कपड़े सिंग्नल में रहने वाले गरीब लोग या झुग्गियों में कपड़ो का दान करें। इतना ही नहीं ये गरीब और भिखारियों को समझाते हैं कि उनके पास काम करने के लिए बहुत कुछ है और अगर वो साफ सुथरे कपड़े पहन कर काम मांगने जाएंगे तो उनको काम मिलने में आसानी होती है।


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फंडिग के बारे में वरूण का कहना है कि शुरूआती निवेश 20-25 लाख का उन्होंने खुद किया है। चूंकि ज्यादातर काम वस्तु विनिमय का ही है इसलिए अभी बहुत ज्यादा पैसे की जरूरत इन्हें नहीं पड़ी हैं। भविष्य में इनकी योजना अपने काम को देश और विदेश में फैलाने की है। जिसमें निवेश के लिए इनकी बात राज्य सरकार के साथ साथ कई दूसरें संगठनों से भी चल रही है। प्लैनेट फांर ग्रोथ में 6 लोग इसकी स्थापना से ही जुड़े हैं जो इनके अलग अलग विभागों से जुड़े हैं। 20 लोगों को इन्होंने अपने यहां पर काम पर रखा है और करीब 200 लोग इनके साथ वॉलियंटर के तौर पर जुड़े हैं। फिलहाल वरूण अपने इस काम को दिल्ली और देहरादून से चला रहे हैं।

वेबसाइट : www.planetforgrowth.com

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