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महिलाओं को जागरुक करने का मंच 'Women Planet'

गुजरात के वड़ोदरा की रहने वाली स्वाति वखारिया अन्य लड़कियों की तरह नियमों में बंधकर हुई बड़ींमहिलाओं से संबंधित मुद्दों और समस्या निवारण के लिये की एक आॅनलाइन मंच ‘वोमेन प्लेनेट’ की स्थापनावाणिज्य में एमबीए करने के बाद बनीं आईटी कंपनी ब्लैक आईडी साॅल्यूशंस प्रा. लिमिटेड का हिस्सा दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद महिलाओ के लिये कुछ करने की ठानी और रखी ‘वोमेन प्लेनेट’ की नींव

23rd Jul 2015
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जब स्वाति पेशेवर पाठ्यक्रमों को पूरा करते हुए भविष्य में एक सफल करियर के लिये खुद को तैयार करते हुए आगे बढ़ रही थीं उसी दौरान उनके परिवार ने उन्हें एक बात को लेकर अपनी सोच से बिल्कुल साफ रूबरू करवा दिया था। उनके परिवार ने उन्हें बिल्कुल साफ शब्दों में यह बता दिया था कि वे अपनी शादी हो जाने तक ही अपनी पसंद के करियर के साथ आगे बढ़ सकती हैं और एक बार विवाह के बंधन में बंधने के बाद उनके काम करने या न करने का निर्णय पूरी तरह से उनके पति और सुसराल वालों की मर्जी पर निर्भर करेगा।

यहां तक कि घर पर मौजूद उनके भाई को भी उनकी ‘रक्षा’ करने करने के निर्देश दिये गए थे और इसी क्रम में उनसे भी स्वाति के लिये अपेन तैयार किये हुए नियमों की एक पूरी सूची तैयार कर रखी थी। ऐसा नहीं था कि वे नियम इतने सख्त थे कि स्वाति उनका पालन नहीं कर पाती थीं लेकिन एक यही तथ्य कि उनके लिये एक नियम पुस्तिका तैयार करी गई है और उन्हें उसके हिसाब से खुद को ढालना है ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। और इसी दौरान उन्होंने फैसला कर लिया के वे अपनी विशषज्ञता का उपयोग महिलाओं तक अपनी पहुंच बनाने में करेंगी। ऐसी महिलाएं जो संकट में हैं, वे महिलाएं जो प्रतिदिन उत्पीड़न का सामना कर रही हैं और जिन महिलाओं को समाज में फैले भेदभाव से रोजाना दो-चार होना पड़ रहा है।

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स्वाति कहती हैं कि वे बहुत भाग्यशाली हैं कि उन्हें एक ऐसे पति और सास मिले जो उनका पूरी तरह से समर्थन करते हैं लेकिन गुजरात के उनके सभी मित्र उनके जितने भाग्यशाली नहीं हैं। गुजरात के वड़ोदरा में पैदा हुई और पली-बढ़ीं स्वाति वखारिया महिलाओं से संबंधित मुद्दों को देखने वाले और समस्या निवारण के लिये विशेषज्ञों को उपलब्ध करवाने वाले आॅनलाइन मंच Women Planet (वोमेन प्लेनेट) की संस्थापक और सीईओ हैं।

30 वर्षीय स्वाति कहती हैं, ‘‘मैंने अपनी कई महिला मित्रों को एक बेहद सफल संभावित करियर से सिर्फ इसलिये मुंह मोड़ते हुए देखा है क्योंकि उनके पति या सुसराल वालों को यह पसंद नहीं था और मेरी नजरों में ऐसा सामाजिक व्यवहार बिल्कुल अस्वीकार्य है।’’

स्कूल के दिनों में स्वाति की रुची खेलकूद और अन्य गतिविधियों में थी लेकिन आखिरकार में अपनी किताबों पर ध्यान केंद्रित रखने में सफल हुईं और वाणिज्य से एमबीए करने के बाद द टाइम्स आॅफ इंडिया के साथ आॅपरेशंस एक्सीक्यूटिव के रूप में जुड़ गईं।

लेकिन जल्द ही एक स्टार्टअप का हिस्सा बनने की ललक के चलते वे एक आईटी कंपनी ब्लैक आईडी साॅल्यूशंस प्रा. लिमिटेड का हिस्सा बन गईं। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों के कुछ मित्रों को अपने साथ जोड़ा और इस स्टार्टअप की नींव डाली। इस स्टार्टअप के माध्यम से उन्हें ‘आॅनलाइन मार्केटिंग और एसईओ’ का एक अलग विभाग प्रारंभ करने का अवसर दिया और अंततः उन्हें एसईओ के क्षेत्र में आशातीत सफलता मिली। सात वर्षों तक इस कंपनी का सफल संचालन करने क बाद स्वति ने खुद को एक बिल्कुल नई भूमिका के लिये तैयार किया और अपने सपनों को उड़ान देते हुए समाज को कुछ वापस करने के उद्देश्य से ‘वोमेन प्लेनेट’ की स्थापना की।

देश को झझकोर कर रख देने वाले दिल्ली के निर्भया कांड ने स्वाति को भीतर तक हिला कर रखा दिया था और इसके बाद ही उन्होंने महिलाओं की मदद करने और अपने जीवन के प्रति ठीक निर्णय लेने के लिये मदद करने का संकल्प ले लिया। स्वाति कहती हैं, ‘‘मेरा मानना है कि प्रत्येक व्यकित के भीतर कुछ विशेषज्ञता होती है जिसका उपयोग समाज के लिये किसी प्रकार के योगदान के रूप में किया जाना चाहिये और ऐसा करने के लिये किसी को कुछ अलग करने की आवश्यकता भी नहीं है।’’

चूंकि आॅनलाइन मार्केटिंग और एसईओ स्वाति के मजबूत पक्ष थे इसलिये उन्हें लगा कि अगर वे इसी के माध्यम से कुछ ऐसा कर पाती हैं जिसे वे संभाल सकें तो वह बहुत उपयुक्त होगा।

‘वोमेन प्लेनेट’ के माध्यम से इनका इरादा अधिक से अधिक महिलाओं को एक मंच के माध्यम से साथ जोड़ते हुए एक ही समय में उन्हें इस आॅनलाइन मंच के माध्यम से शिक्षित, सशक्त और उनका मजोरंजन करने में मदद करना है। ‘वोमेन प्लेनेट’ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के अलावा महिलाओं के बीच जागरुकता फैलाने का काम करता है और कल्याण के मसलों पर उनका मार्गदर्शन करता है।

स्वाति कहती हैं, ‘‘‘वोमेन प्लेनेट’ के माध्यम से मुझे एक बिल्कुल नए क्षेत्र को तलाशने का अवसर मिला। एक ही समय में अपने आसपास समाज के विभिन्न वर्गों और सोच वाले लोगों से मिलना और अपने जैसी सोच रखने वानी अन्य महिलाओं के साथ काम करना काफी मजेदार और समृद्ध अनुभव होता है।’’

‘वोमेन प्लेनेट’ ने अपना एक ब्लाॅग शुरू किया जिसे स्वाति ने सबके लिये खुला रखा और कोई भी इसपर अपने विचार साझा कर सकता है। और चूंकि यह सिर्फ लोगों के लिये प्रारंभ किया गया था इसलिये वे चाहती थीं कि यह स्वयं ही अपना आकार ले जो एक संरचित और प्लानन की हुई योजना के मुकाबले लोगों का अपना हो। इसकी संस्थापक बताती हैं कि उनका यह विचार बेहतर भविष्य के निर्माण के लिये बहुत कारगर रहा और धीरे-धीरे यह एएक कम्युनिटी, एक मंच, एक प्रिंट और डिजिटल पत्रिका (जो वर्ष में एक बार छपती है) का रूप लेने में सफल रही और अब यह एक ऐसे मंच का रूप ले चुका है जहां कोई भी अपने विचार रख सकता है।

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आज के पितृसत्तात्मक समाज में लीक को तोड़ते हुए कुछ करने वाली महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियां स्वाति को आश्चर्य से भर देती हैं। स्वाति कहती हैं, ‘‘हमारा विचार समाज में लैंगिक समानता के मुद्दे को लेकर जागरुकता फैलाना है और हम भारतीय समाज की मानसिकता को बदलने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में रहने वाली लड़कियों को रजोनिवृति और स्वच्छता जैसे वर्जित विषयों के बारे में जानकारी देना बहुत आवश्यक है और हम उन्हें जागरुक करने के लिसे उनतक पहुंचने के हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

वड़ोदरा में फुटपाथ पाठशाला की पहल को जमाने वाली जुइन दत्ता सवाति के इस मंच के बारे में अपने विचार रखते हुए कहते हैं, ‘‘वास्तव में यह लोगों तक अपनी पहुंच बनाने का एक बेहतरीन जरिया है। हम एक लड़की के जीवन में शिक्षा के महत्व को बहुत अच्छे से जानते हैं और इस प्रकार की पहल निश्चित ही सराहनीय है। इसके मंच पर इप प्रकार के विषयों को बहुत गहराई के साथ उठाया जाता है और इसके माध्यम से लोगों को समाज में लड़कियों के साथ होने वाले अन्याय के बारे में जानने का मौका मिलता है।’’ जुइन ने अपने इस अभियान के माध्यम से निर्माण के काम में लगे श्रमिकों के बच्चों को शिक्षित करने के अपने जुनून को पूरा करने के लिये अपनी नौकरी को भी छोड़ दिया। हालांकि जुइन का मानना है कि ऐसे मंचों को और अधिक लोगों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश करनी चाहिये ताकि वे भी इसका फायदा उठा सकें।

महिलाओं के प्रति कुछ सकारात्मक करने के लिये स्वाति को एक घटना से प्रेरणा मिली। भारत के ग्रामीण इलाके में एक महिला विवाह हुआ और एक वर्ष तक तो बहुत हंसी-खुशी से भरे माहौल में रही। कुछ समय बाद जब वह गर्भवती हुई तो उसके सुसराल वालों को यह पता लगा कि उसके गर्भ में एक लड़़की पल रही है। इसके बाद उसकी सुसराल वालों ने उसकी सास में अगुवाई में उसका गर्भपात करवा दिया और उसे यह हिदायत दी कि अगर अगली बार भी उसके गर्भ में एक लड़की पली तो वे लोग उसे छोड़ देंगे और उसके पति की दूसरी शादी करवा देंगी।

स्वाति कहती हैं, ‘‘इस कहानी को सुनने के बाद मुझे इस बात का बेहद दुख हुआ कि हम एक ऐसे समाज में रह रहे हैं जहां महिलाएं ही महिलाओं की दुश्मन हैं। कई बार में खुद ऐसी परिस्थितियों से रूबरू होती हूँ जहां महिलाएं दूसरी महीलाओं के साथ इंसान जैसा व्यवहार ही नहीं करती हैं। मेरा मानना है कि महिलाओं में समानता और सक्षमता तभी हो पाएगी जब महिलाएं एक दूसरे के साथ सम्मान का व्यवहार करेंगी। जब वे दूसरी महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार करेंगी जैसा वे स्वयं के लिये उनसे चाहती हैं।’’

स्वाति उन महिलाओं से प्रेरित होती हैं जो अपनी खुद की पहचान बनाने के लिये और दूसरों के जीवन का उत्थान करने के लिये कड़ी मेहनत कर रही हैं। तेजाव के हमले से बची लक्ष्मी और उनके जैसे ही अपने अधिकारों के लिये लड़ने वाली जीवट चरित्र वाली अन्य महिलाएं स्वाति के लिये रोल माॅडल सरीखी हैं।

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