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ऐमज़ॉन के इस पूर्व कर्मचारी ने 'घाटी' तक पहुंचाया कोलकाता के काठी रोल का ज़ायका

13th Nov 2018
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 यह कारनामा करने वाले 30 वर्षीय जाविद पार्सा ने कोलकाता और हैदराबाद के कुज़ीन्स के बेहतरीन फ़्यूजन के साथ काठी रोल के बेजोड़ ज़ायके को जम्मू-कश्मीर तक पहुंचाया। जाविद पार्सा जम्मू-कश्मीर के ही रहने वाले हैं और ऐमज़ॉन के साथ काम कर चुके हैं।

टीम पार्सा

टीम पार्सा


जाविद ने अपने रेस्तरां में काम करने वालों का चयन कई बातों को ध्यान में रखते हुए किया है। उनके ज्यादातर कर्मचारी वे हैं, जो कभी स्कूल ही नहीं जा पाए और जिनकी उम्र 20 से 29 साल के बीच है।

आज हम एक ऐसी शख़्सियत की बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने खाने और खिलाने के शौक़ को एक शानदार बिज़नेस आइडिया में तब्दील कर जम्मू-कश्मीर में एक लोकप्रिय फ़ूड चेन की शुरुआत की। यह कारनामा करने वाले 30 वर्षीय जाविद पार्सा ने कोलकाता और हैदराबाद के कुज़ीन्स के बेहतरीन फ़्यूजन के साथ काठी रोल के बेजोड़ ज़ायके को जम्मू-कश्मीर तक पहुंचाया। जाविद पार्सा जम्मू-कश्मीर के ही रहने वाले हैं और ऐमज़ॉन के साथ काम कर चुके हैं। वह हैदराबाद में कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करते थे, जिसे छोड़कर 2014 में वह अपने घर वापस लौट आए। इस साल ही जाविद ने काठी जंक्शन फ़ूड चेन खोलने की पूरी तैयारियां कर लीं। इस दौरान ही कश्मीर में भीषण बाढ़ आई और वहां का जन-जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया। हालात विपरीत थे, लेकिन इसके बावजूद जाविद ने 31 अक्टूबर, 2014 को अपने काठी जंक्शन की शुरुआत कर दी।

स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच काठी जंक्शन को तेज़ी से लोकप्रियता मिलने लगी। सफलता के रास्ते में समय की आज़माइश आपका हमेशा ही इम्तेहान लेती रहती है और ऐसा ही कुछ जाविद और उनके बिज़नेस के साथ भी हुआ। 2016 में हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी की मौत के फलस्वरूप शुरू हुए विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में सात महीनों की बंदी रही और इसका जाविद के बिज़नेस पर काफ़ी बुरा असर पड़ा। लेकिन जाविद को बचपन से ही खाने-खिलाने के काम में रुचि थी और यही उनका पैशन था, जिसने उन्हें इस कठिन समय में हिम्मत दी और उन्होंने अपने नाम पर फ़ूड चेन स्थापित करने के दिशा में कोशिश जारी रखी।

तीन साल बाद उसी दिन जाविद ने पार्साज़ (Parsa's) नाम से काठी रोल की फ़ूड चेन शुरू की। इस सेंटर पर ग्राहक कोलकाता और हैदराबादी कुज़ीन्स का बेहतरीन मेल चख सकते हैं। जाविद कहते हैं कि इस इलाके के लोग अपने आप में ही रहना पसंद करते हैं, लेकिन इसके बावजूद पार्साज़ में आने वाले ग्राहक एक ही टेबल पर खाते हैं और अपनी यादें और विचार एक-दूसरे से साझा करने में कोई गुरेज़ नहीं करते।

पार्साज़ की मुख्य टारगेट ऑडियंस इलाके की युवा आबादी है। उनके मेन्यू में 50 रुपए से लेकर 190 रुपए तक के काठी रोल्स मौजूद हैं। जाविद बताते हैं कि उनका फ़ोक्स कॉलेज स्टूडेंट्स पर अधिक रहता है और इस वजह से उन्होंने पार्साज़ के अधिकतर आउटलेट्स या सेंटर्स स्कूलों और कॉलेजों के नजदीक ही खोले हैं। हाल में, पार्साज़ 7 आउटलेट्स के साथ काम कर रहा है। सबसे पहला आउटलेट श्रीनगर के सराह सिटी सेंटर में खोला गया और इसके अलावा लद्दाख की लेह मार्केट, बारामूला, एसएसएम कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, इस्लामिक यूनिवर्सिटी (अवंतिपुर), गांडेरबाल और अनंतनाग में भी पार्साज़ के आउटलेट्स मौजूद हैं।

जाविद ने अपने रेस्तरां में काम करने वालों का चयन कई बातों को ध्यान में रखते हुए किया है। उनके ज्यादातर कर्मचारी वे हैं, जो कभी स्कूल ही नहीं जा पाए और जिनकी उम्र 20 से 29 साल के बीच है। पहली बार जम्मू-कश्मीर में किसी महिला वेटर को हायर किया गया और इस प्रचलन का आग़ाज़ भी पार्साज़ ने ही किया। इतना ही नहीं, पार्साज़ के सेंटर्स पर कई लोग पढ़ाई के साथ-साथ ही काम कर रहे हैं।

जाविद ने 9 लाख रुपए के निवेश के साथ काठी जंक्शन की फ़्रैंचाइज़ी की शुरुआत की थी और इसके बाद उन्होंने 12 लाख रुपए के अतिरिक्त निवेश के साथ पार्साज़ की शुरुआत की। उनका दावा है कि पहले 6 महीनों में ही पार्साज़ ने निवेश की रकम रिकवर कर ली। पार्साज़ के हर आउटलेट पर रोज़ाना 300-400 ग्राहक आते हैं। जम्मू-कश्मीर में पार्साज़ का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी काठी जंक्शन ही है, जिसके पूरे राज्य में कई आउटलेट्स हैं।

यह भी पढ़ें: गरीब दिव्यांगों को कृत्रिम अंग बांटने के लिए स्कूली बच्चों ने जुटाए 40 लाख रुपये

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