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64 हजार करोड़ की बिजली चोरी के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली महिला IAS रितु माहेश्वरी

वो महिला IAS जिसने बिजली चोरी को मुश्किल ही नहीं नामुमकिन बना दिया...

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5th Dec 2017
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पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) ग्रेजुएट रितु माहेश्वरी को 2011 में केस्को के प्रमुख अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया और जल्द ही उन्होंने कंपनी के एक-तिहाई ग्राहकों के यहां नये मीटर लगवाये, जिनमें बिजली चोरी करना मुश्किल था।

रितु माहेश्वरी (फोटो साभार- ब्लूमबर्ग)

रितु माहेश्वरी (फोटो साभार- ब्लूमबर्ग)


मूलरूप से पंचकुला हरियाणा निवासी रितु के पति मयूर माहेश्वरी भी IAS अधिकारी हैं और फिलहाल पीएमओ में डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं। रितु इससे पहले गाजीपुर, जेपी नगर और पीलीभीत में भी डीएम रह चुकी हैं। 

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और चौथा सबसे बड़ा इलेक्टिसिटी उपभोक्ता है. जबकि, अभी बस 96 फीसदी भारतीय गावों तक ही बिजली पहुंची है पर उनमें से 69 फीसदी घरों को ही बिजली मिलती है। उत्तर प्रदेश का उदाहरण लेते हैं, जहां लगभग 99 फीसदी गांवों में बिजली पहुंच चुकी है। केवल 60 फीसदी घरों में ही बिजली आती है। वहीं अर्थव्यवस्था को भी बिजली चोरी के चलते बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। जो कानुपुर कभी 'भारत का मैनचेस्टर' कहा जाता था, आज बिजली कटौती की भयंकर समस्या से जूझ रहा है। गर्मियों में 45 डिग्री तक पारा पहुँचने वाले इस शहर में बेतहाशा बिजली कटौती होती है और व्यवस्था की इस नाकामी से लोगों को निजात दिलाने वाली महिला अधिकारी का नाम है रितु माहेश्वरी।

39 साल की 2003 बैच की आईएएस अधिकारी रितु माहेश्वरी गोयल को समझ आया कि ऐसे में क्या करने की जरूरत है? और उन्होंने बिजली चोरी रोकने के लिये उपाय शुरू कर दिये। कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी यानि केस्को में काम करने के दौरान उन्होंने बिजली चोरी से कंपनी को होने वाले नुकसान को रोकने के लिये कई कदम उठाये। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज ग्रेजुएट रितु माहेश्वरी को 2011 में केस्को के प्रमुख अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया और जल्द ही उन्होंने कंपनी के एक-तिहाई ग्राहकों के यहां नये मीटर लगवाये, जिनमें बिजली चोरी करना मुश्किल था।

गाजियाबाद की डीएम बनने के बाद रितु माहेश्वरी

गाजियाबाद की डीएम बनने के बाद रितु माहेश्वरी


ये मीटर डिजिटल थे और अगर इनसे कोई छेड़छाड़ का प्रयास किया जाता था तो गड़बड़ी का आसानी से पता लगाया जा सकता था, वो भी उसी वक्त जबसे उन्होंने अपना पद संभाला, कंपनी का नुकसान 30 फीसदी से घटकर 15 फीसदी पर आ गया। इंडिया संवाद की एक रिपोर्ट के हिसाब से, फ्रेंच इलेक्ट्रिकल इक्यूपमेंट मेकर्स की इंडियन यूनिट का एनर्जी बिजनेस के उप प्रमुख और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश चंद्राकर कहते हैं, राज्य की उपयोगिताओं में से एक का बड़ा नुकसान गांवों में बिजली पहुंचाने और वहां उसके उपयोग से जुड़ा कुल नुकसान 25-30 फीसदी होता है।

उस वक्त कानपुर बिजली सप्लाई कंपनी की नयी मैनेजिंग डायरेक्टर रितु माहेश्वरी बिजली चोरी रोकने में कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती थीं। 2014 में इस विषय पर एक फिल्म बनी थी, कटियाबाज। उस फिल्म में कानपुर में होने वाली बिजली चोरी और उस पर सख्ती लगाने वाली अधिकारी रितु माहेश्वरी के संघर्ष को दिखाया गया था।

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रितु केस्को के रेवेन्यू को बढ़ाने और कानपुर में बिजली चोरी रोकने के लिए अपने लेबल पर कोशिश स्‍टार्ट करती हैं। इस जुगत में रितु अपने डिपार्टमेंट के लोगों को बिजली चोरी करने वालों के कनेक्शन काटने और उन पर सख्त से सख्त जुमार्ना लगाने का आदेश देती है। इससे बिना बिल दिए एसी और कटिया से पूरी की पूरी फैक्टरी चलाने वालों के लिए आफत आ जाती है।

केस्को की जिम्मेदारी निभाने का बाद उनकी जिम्मेदारी बदल दी गई। बाद में उन्हें गाजियाबाद के डीएम पद को सुशोभित करने की जिम्मेदारी मिली। मूलरूप से पंचकुला हरियाणा निवासी रितु के पति मयूर माहेश्वरी भी आईएएस हैं और फिलहाल पीएमओ में डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं। रितु इससे पहले गाजीपुर, जेपी नगर और पीलीभीत में डीएम रह चुकी हैं। इसके अलावा वह मेरठ विकास प्राधिकरण, हापुड़-पिलखुआ विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। रितु माहेश्वरी सरकारी कार्यों को कंप्यूटराज्ड सिस्टम में लाने के लिए ई-गवर्नेंस में नैशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है। यूएनओ के अंडर सेक्रेटरी जनरल फॉर आरोग्यम की तरफ से भी वह सम्मानित हो चुकी हैं।

इस स्टोरी को इंग्लिश में भी पढ़ें...

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