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दो डॉक्टर बहनें इस तरह ला रही हैं, दूसरों के घरों में खुशियां

इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट को सबकी पहुंच तक लाना है इन डॉक्टर बहनों का लक्ष्य...

16th Mar 2018
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रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पिछले 5 सालों में इनफर्टिलिटी के मामलों में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। देश के अलग-अलग शहरों में लगातार इनफर्टिलिटी क्लीनिक खुल रहे हैं। इन सभी पहलुओं के साथ एक गौरतलब तथ्य यह है कि ट्रीटमेंट में पर्याप्त पैसा खर्च होता है, जो समस्या से जूझ रही हर दंपती नहीं उठा सकती। दो डॉक्टर बहनों ने इस दिशा में सराहनीय कदम उठाया है।

डॉ. राजलक्ष्मी वलावलकर और डॉ. अनाघा कारखानिस

डॉ. राजलक्ष्मी वलावलकर और डॉ. अनाघा कारखानिस


कोकून फर्टिलिटी की ब्रांच, दादर, सांताक्रूज़, वरसोवा और पुणे में चल रही हैं। कोकून फर्टिलिटी की सबसे ख़ास बात यह है कि यह समस्या से पीड़ित एक बड़े वर्ग को किफायती सॉल्यूशन्स मुहैया करा रहे हैं।

भारत में लगातार इनफर्टिलिटी के केस बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पिछले 5 सालों में इनफर्टिलिटी के मामलों में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। देश के अलग-अलग शहरों में लगातार इनफर्टिलिटी क्लीनिक खुल रहे हैं। इन सभी पहलुओं के साथ एक गौरतलब तथ्य यह है कि ट्रीटमेंट में पर्याप्त पैसा खर्च होता है, जो समस्या से जूझ रही हर दंपती नहीं उठा सकती। दो डॉक्टर बहनों ने इस दिशा में सराहनीय कदम उठाया है। डॉ. राजलक्ष्मी वलावलकर और डॉ. अनाघा कारखानिस ने मुंबई में 2013 में 'कोकून फर्टिलिटी' क्लीनिक की शुरूआत की, जो अब एक चेन का रूप ले चुकी है।

कोकून फर्टिलिटी की ब्रांच, दादर, सांताक्रूज़, वरसोवा और पुणे में चल रही हैं। कोकून फर्टिलिटी की सबसे ख़ास बात यह है कि यह समस्या से पीड़ित एक बड़े वर्ग को किफायती सॉल्यूशन्स मुहैया करा रहे हैं। कोकून फर्टिलिटी साधारण चेक-अप से लेकर ईआरए और पीआईसीएसआई जैसी जटिल प्रक्रियाओं की भी सुविधा उपलब्ध करा रहा है। इनकी आईवीएफ लैब ठाणे में है। विशेषज्ञों के मुताबिक़, इनफर्टिलिटी की समस्या महिलाओं और पुरुषों दोनों ही में तेज़ी से बढ़ रही है। 'योरस्टोरी' से बात करते हुए दोनों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की और अहम सवालों के जवाब दिए।

भारत में इनफर्टिलिटी के मुख्य कारण कौन से हैं?

डॉ. राजलक्ष्मी: भारत में, पुरुषों में स्पर्म काउंट की समस्या और महिलाओं में हार्मोनल इमबैलेंस की समस्या, इनफर्टिलिटी का सबसे मुख्य कारण है। इंडियन नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक़, शहर की महिलाओं में इनफर्टिलिटी रेट सबसे ज़्यादा था, जो शिक्षा के स्तर में सुधार के बावजूद बढ़ता रहा। महिलाएं ज़्यादा उम्र में प्रेग्नेंट होना चाहती हैं, जबकि उम्र के साथ-साथ बायोलॉजिकल फर्टिलिटी कम होती जाती है। कई बार अबॉर्शन के दौरान महिलाओं को इन्फेक्शन भी घेर लेते हैं। उन्होंने बताया कि अभी भी भारत में इनफर्टिलिटी के मुख्य कारणों में टीबी की बीमारी शामिल है।

क्या लोगों के अंदर से इनफर्टिलिटी को लेकर बात करने और विशेषज्ञों से सलाह लेने की झिझक कम हुई है?

डॉ. कारखानिस: इनफर्टिलिटी की समस्या को लेकर अभी भी लोग झिझकते हैं और इनमें महिलाओं की संख्या ज़्यादा है। आमतौर पर इनफर्टिलिटी के केस में बिना जांच के ही महिलाओं को दोषी ठहरा दिया जाता है। कुछ मामलों में आर्थिक सीमाएं भी रोड़ा बनती हैं। मैं सलाह देती हूं कि डॉक्टर के पास जाने से आपके कई संदेह दूर हो जाएंगे। सभी मरीजों को आईवीएफ की ज़रूरत नहीं होती। हर दंपती की समस्या अलग होती है और समस्या के हिसाब से ही उपाय खोजने की ज़रूरत होती है। आप अकेले नहीं हैं, जो इस बीमारी से पीड़ित हैं, इसलिए आपको संकोच करने की कोई आवश्यकता नहीं।

आप इन समस्याओं को लेकर लोगों के रवैये में किस तरह का बदलाव चाहती हैं?

डॉ. राजलक्ष्मी: फर्टिलिटी डॉक्टर होने के नाते मैं यही चाहती हूं कि लोग इस समस्या को शर्म का विषय न समझें, बल्कि इसे महज़ एक बीमारी के तौर पर समझने की कोशिश करें। मेरी सलाह है कि मरीज़, डॉक्टर से इस बारे में खुलकर बात करें और ज़्यादा से ज़्यादा सवाल करें, ताकि किसी भी तरह के असमंजस की स्थिति न पैदा हो। मैं अपनी पूरी फ्रैटर्निटी की ओर से यही मशवरा देना चाहती हूं कि लोगों को इस बारे में अधिक से अधिक जागरूक किया जाए। इस इंडस्ट्री को भी रेग्युलेशन्स की ज़रूरत है, जो मरीज़ और डॉक्टर दोनों ही के लिए एक सुरक्षित सेवा सुनिश्चित कर सके। मैं चाहती हूं कि इनश्योरेंस की मदद से इनफर्टिलिटी के इलाज को सभी की पहुंच में लाया जाए।

इनफर्टिलिटी से बचाव करने में अच्छी ख़ुराक की क्या भूमिका है? क्या आप इस बारे में कुछ टिप्स दे सकती हैं?

डॉ. कारखानिस: अच्छी ख़ुराक हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए बेहद ज़रूरी है। कोकून फर्टिलिटी में हम एक मेडिकल न्यूट्रीशन प्रोग्राम भी चलाते हैं, जो मरीज़ों को उनकी हिसाब से डायट चार्ट बनाकर देता है।

इनफर्टिलिटी का इलाज कितने वक़्त के भीतर शुरू हो जाना चाहिए?

डॉ. राजलक्ष्मी: आमतौर पर लोग, कुछ समय पर निजी प्रयोगों के बाद स्पेशलिस्ट के पास जाते हैं। अगर महिला की उम्र 35 साल से कम है तो दंपती एक साल के भीतर एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं। 35-40 साल की महिलाओं के लिए यह समय 6 महीने तक सीमित हो जाता है। इससे अधिक उम्र वाले जोड़ों की स्थिति ज़्यादा गंभीर है और उन्हें तुरंत विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए।

पुरुषों को भी अपनी उम्र का ध्यान रखना चाहिए। बढ़ती उम्र के साथ स्पर्म क्वालिटी कम होती जाती है। महिला की उम्र कितनी भी हो, अगर पिता की उम्र 45 से अधिक है, तो गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। पिता की उम्र ज़्यादा होने का असर बच्चे के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

यह भी पढ़ें: बंगाल की पहली ऐसी महिला पंडित जो बिना कन्यादान के करवाती हैं शादी 

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