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महिलाओं के लिए '112 इंडिया' ऐप लॉन्च, एक क्लिक पर मिलेगी सुरक्षा

3rd Dec 2018
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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नागालैंड और हिमाचल की महिलाओं के लिये विशेष '112 इंडिया' आपात सेवा मोबाइल ऐप लॉन्च किया। इस ऐप के जरिए तत्काल आवश्यकता वाले मुद्दे पर मदद मांगी जा सकती है।

सांकेतिक तस्वीर

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'यह ऐप जीपीएस प्रणाली का इस्तेमाल कर सबसे पहले प्रतिक्रियाकर्ता को संकट में घिरी महिला की सटीक लोकशन को ट्रेक करते हुए प्रभावी प्रतिक्रिया में मददगार साबित होगा।'

हमेशा से महिलाओं की सुरक्षा समाज में एक अहम मुद्दा रहा है, लेकिन इस दिशा में अभी भी कई कड़े कदम उठाए जाने शेष हैं। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार कई तरह के प्रयास कर रही है। इसी के तहत हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नागालैंड और हिमाचल की महिलाओं के लिये विशेष '112 इंडिया' आपात सेवा मोबाइल ऐप लॉन्च किया। इस ऐप के जरिए तत्काल आवश्यकता वाले मुद्दे पर मदद मांगी जा सकती है।

महिलाओं की सुरक्षा के लिये तैयार किये गए इस ऐप में खासतौर पर एक 'शाउट' (SHOUT) फीचर उपलब्ध करवाया गया है जो एक विशेष आपात प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा यह ऐप किसी परेशान महिला की मौजूदगी की जगह का पता लगाने के लिए जीपीएस सिस्टम का भी इस्तेमाल करेगा।

शनिवार को, देश भर में सभी तरह की आपात सेवाओं के लिए तैयार किये गये मोबाइल ऐप '112 इंडिया' के शुभारंभ के साथ ही नागालैंड पूर्वोत्तर का पहला राज्य और हिमाचल प्रदेश के बाद देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया जहां इस अखिल भारतीय आपातकालीन मोबाइल ऐप्लीकेशन को लॉन्च किया गया है। इस ऐप में महिलाओं के पुलिस और स्वयंसेवियों से त्वरित सहायता पाने के लिए एक खास 'फीचर' मौजूद है।

नागालैंड में इस ऐप के लॉन्च के मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 'इस '112 इंडिया' मोबाइल ऐप में खासतौर पर महिलाओं के लिए एक विशेष 'शाउट' (SHOUT) फीचर उपलब्ध किया गया है जो आपात प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) से जुड़ा हुआ है।' इस मौके पर राजनाथ सिंह ने बताया कि किसी भी तरह के संकट में घिरी महिलाएं इस फीचर का इस्तेमाल करके अपने आसपास मौजूद पंजीकृत स्वयंसेवकों के अलावा आपात प्रतिक्रिया केंद्र (ERC) से बिना समय गंवाए तत्काल सहायता पा सकेंगी।

उन्होंने बताया, 'यह ऐप जीपीएस प्रणाली का इस्तेमाल कर सबसे पहले प्रतिक्रियाकर्ता को संकट में घिरी महिला की सटीक लोकशन को ट्रेक करते हुए प्रभावी प्रतिक्रिया में मददगार साबित होगा।'

गृहमंत्री ने आगे बताया कि ERSS स्थान आधारित सेवाओं का उपयोग करते हुए संकट में घिरे किसी भी कॉलर का पता लगाने में ERC की मदद करता है। एकीकृत आपातकालीन सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य में ERC स्थापित करने के अलावा तीन जिलों में कमांड केंद्रों की भी स्थापना की गई है। किसी भी महिला का एसओएस मिलते ही ERC उसकी सहायता के लिये उस स्थान का सबसे नजदीकी प्रतिक्रिया वाहन बिना समय गंवाए भेज सकते हैं।

गृहमंत्री ने कहा कि देश के विकास और प्रगति के लिए महिलाओं को सुरक्षित और संरक्षित वातावरण देने और विकास की सभी गतिविधियों में उनकी भागीदारी की सुविधा प्रदान करनी होगी। उन्होंने कहा, 'अगर हम अपने शहरों और बस्तियों को सुरक्षित बनाते हैं, तो महिलाएं स्वयं देश की प्रगति में भाग लेंगी और देश आगे बढ़ेगा।'

राजनाथ सिंह ने कहा, 'महिलाएं देश की आबादी का आधा हिस्सा हैं। अगर हम अपने शहरों और बस्तियों को सुरक्षित बनाते हैं तो महिलाएं स्वतः देश की प्रगति में हिस्सा लेंगी और देश आगे बढ़ेगा. जिस देश में महिलाएं सुरक्षित होती हैं, वह देश मजबूत होता हैं और उसका विकास कोई नहीं रोक पाता है।' उन्होंने कहा कि इस मोबाइल ऐप का उपयोग करके आम जनता किसी भी परेशानी की स्थिति में पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन और ऐसी तमाम अन्य एजेंसियों से तत्काल सहायता प्राप्त करने में सक्षम होगी।

गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय में अलग से महिला सुरक्षा विभाग की स्थापना करने के अलावा विभिन्न हेल्पलाइनों के निर्माण सहित कई नई पहल की हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए भारतीय दंड संहिता और आपराधिक प्रक्रिया संहिता में कई कानूनों में संशोधन करते हुए उन्हें और अधिक कठोर बनाया गया है।

इसके अलावा यौन उत्पीड़न से संबंधित मामलों से निपटने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए गए हैं और यौन अपराधियों और साइबर क्राइम से संबंधित राष्ट्रीय डेटाबेस के लिए पोर्टल लॉन्च किए गए हैं। इस मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर राज्य के लोगों को पुलिस, स्वास्थ्य, दमकल एवं अन्य एजेंसियों से तुरंत सहायता मिलेगी। ERSS में पुलिस (100), दमकल (101), स्वास्थ्य (108) और महिला (1090) हेल्पलाइनों को मिला दिया गया है।

अब ये आपात सेवाएं एक ही नंबर '112' पर मिलेंगी और विभिन्न आपात सेवाओं के लिए एक ही नंबर रहेगा। धीरे-धीरे इसे पूरे देश में शुरू किया जाएगा और यह बिल्कुल अमेरिका के '911' की तरह काम करेगा। इस मौके पर नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि इस ऐप का शुभारंभ सही वक्त पर हुआ है क्योंकि 19वां हॉर्नबिल उत्सव अभी शुरू ही हुआ है और इसमें अगले 10 दिन में लाखों लोग हिस्सा लेंगे।

रियो ने कहा, 'फिलहाल यह परियोजना कोहिमा, दीमापुर और मोकोक्चंग जिलों में लागू की जा रही है और जल्द ही इसे बाकी बचे जिलों में भी लॉन्च कर दिया जाएगा।' केंद्र सरकार ने पूरे देश में ERSS परियोजना को लागू करने के लिए निर्भया कोष के तहत 321.69 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं। नागालैंड को इस परियोजना के लिए 4.88 करोड़ रुपये दिये गये हैं।

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